मदरसा में मानकों की अनदेखी कर रहा विभाग
https://husainijnp.blogspot.com/2016/03/blog-post_822.html
मनीष सिंह
बाराबंकी। प्रदेश सरकार जहां एक ओर अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए
योजनाओं को जमीनी हकीकत पर लाने के लिए कटिबद्ध है। वहीं दूसरी ओर जिला
अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अपनी जेब गर्म करने के लिए मदरसों को मिलने
वाले अनुदान में बंदरबांट करने जुटे हैं। इतना ही नहीं, कुछ एक मदरसों के
प्रबंधन में जहां आपसी खींचतान हो रही है, उक्त अधिकारी उसमें फायदा
उठाने में भी नहीं चूक रहे हैं। ऐसा ही एक मामला कस्बा सआदतगंज स्थित
मदरसा इस्लामियां अहले सुन्नत मिरातुल उलूम का प्रकाश में आया है। जहां
प्रबंधन की आपसी खींचतान के चलते जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा
न सिर्फ दोशियों का साथ दिया जा रहा है। बल्कि मानकों के पूरा न होने के
बावजूद मदरसा के तथाकथित प्रबंधक से मिलीभगत कर अनुदान देने की तैयारी भी
की जा रही है। इस बाबत मदरसा के प्रबंधक ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और कई अन्य उच्चाधिकारियों से मामले की
निष्पक्ष जांच कर दोशियों के विरूद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। मदरसा
के प्रबंधक सूफियान ने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि विद्यालय के
तथाकथित प्रबंधक सलीम कादरी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी एच.पी.
अम्बेडकर द्वारा शासन को गुमराह कर मदरसा को मिलने वाले अनुदान में
बंदरबांट किया जा रहा है। मदरसा के मानकों का उल्लेख करते हुए मो.
सूफियान ने कहा कि मदरसा मानकों के अनुरूप नहीं है। ऐसे में अनुदान दिये
जाने का प्रष्न ही नहीं उठता है। इसके बावजूद एक लम्बी धनराशि लेकर जिला
अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मदरसा को अनुदान देने की तैयारी में है। अरबी
एवं फारसी मदरसा मान्यता एवं सेवा नियमावली पर अगर गौर फरमाये तो मदरसों
में तहतानियां के लिए 20 गुणे 50 के तीन कमरे, फौकानियंा के लिए 20 गुणे
15 के तीन कमरे (तहतानियां स्तर के तीन कमरों के अतिरिक्त) तथा आलिया के
लिए 20 गुणे 15 के 02 कमरे होने आवश्यक हैं। इसके अतिरिक्त
प्रधानाध्यापक, पुस्तकालय तथा कार्यालय के लिए 03 कमरे 150 वर्ग फिट के
होने आवश्यक हैं। लेकिन मानकों पर यह मदरसा पूरे तौर खरा नहीं उतर रहा
है। इसके बावजूद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा मोटी रकम लेकर
मदरसा को अनुदान देने की तैयारी की जा रही है। प्रबंधक और तथाकथित
प्रबंधक के बीच एक विवाद उच्च न्यायालय लखनऊ खण्डपीठ में चल रहा है। इस
सम्बन्ध में एक जांच उपजिलाधिकारी सिरौलीगौसपुर द्वारा पूरी कर बीती 08
मार्च 2016 को अपर जिलाधिकारी कार्यालय में भेजी गयी। जिसमें मदरसा एक
शिक्षक दरियाबाद के एक अन्य मदरसा में बतौर प्रिंसिपल तैनात है। ऐसे में
यह भी कहा जा सकता है कि जिस मदरसा के शिक्षकों द्वारा घालमेल किया जा
रहा है, वहां के तथाकथित प्रबंधक द्वारा न जाने कितने ऐसे कार्य किये गये
होंगे, जिनसे मानकों की खुलेआम अवहेलना हुई हो।
बाराबंकी। प्रदेश सरकार जहां एक ओर अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए
योजनाओं को जमीनी हकीकत पर लाने के लिए कटिबद्ध है। वहीं दूसरी ओर जिला
अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अपनी जेब गर्म करने के लिए मदरसों को मिलने
वाले अनुदान में बंदरबांट करने जुटे हैं। इतना ही नहीं, कुछ एक मदरसों के
प्रबंधन में जहां आपसी खींचतान हो रही है, उक्त अधिकारी उसमें फायदा
उठाने में भी नहीं चूक रहे हैं। ऐसा ही एक मामला कस्बा सआदतगंज स्थित
मदरसा इस्लामियां अहले सुन्नत मिरातुल उलूम का प्रकाश में आया है। जहां
प्रबंधन की आपसी खींचतान के चलते जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा
न सिर्फ दोशियों का साथ दिया जा रहा है। बल्कि मानकों के पूरा न होने के
बावजूद मदरसा के तथाकथित प्रबंधक से मिलीभगत कर अनुदान देने की तैयारी भी
की जा रही है। इस बाबत मदरसा के प्रबंधक ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और कई अन्य उच्चाधिकारियों से मामले की
निष्पक्ष जांच कर दोशियों के विरूद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। मदरसा
के प्रबंधक सूफियान ने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि विद्यालय के
तथाकथित प्रबंधक सलीम कादरी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी एच.पी.
अम्बेडकर द्वारा शासन को गुमराह कर मदरसा को मिलने वाले अनुदान में
बंदरबांट किया जा रहा है। मदरसा के मानकों का उल्लेख करते हुए मो.
सूफियान ने कहा कि मदरसा मानकों के अनुरूप नहीं है। ऐसे में अनुदान दिये
जाने का प्रष्न ही नहीं उठता है। इसके बावजूद एक लम्बी धनराशि लेकर जिला
अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मदरसा को अनुदान देने की तैयारी में है। अरबी
एवं फारसी मदरसा मान्यता एवं सेवा नियमावली पर अगर गौर फरमाये तो मदरसों
में तहतानियां के लिए 20 गुणे 50 के तीन कमरे, फौकानियंा के लिए 20 गुणे
15 के तीन कमरे (तहतानियां स्तर के तीन कमरों के अतिरिक्त) तथा आलिया के
लिए 20 गुणे 15 के 02 कमरे होने आवश्यक हैं। इसके अतिरिक्त
प्रधानाध्यापक, पुस्तकालय तथा कार्यालय के लिए 03 कमरे 150 वर्ग फिट के
होने आवश्यक हैं। लेकिन मानकों पर यह मदरसा पूरे तौर खरा नहीं उतर रहा
है। इसके बावजूद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा मोटी रकम लेकर
मदरसा को अनुदान देने की तैयारी की जा रही है। प्रबंधक और तथाकथित
प्रबंधक के बीच एक विवाद उच्च न्यायालय लखनऊ खण्डपीठ में चल रहा है। इस
सम्बन्ध में एक जांच उपजिलाधिकारी सिरौलीगौसपुर द्वारा पूरी कर बीती 08
मार्च 2016 को अपर जिलाधिकारी कार्यालय में भेजी गयी। जिसमें मदरसा एक
शिक्षक दरियाबाद के एक अन्य मदरसा में बतौर प्रिंसिपल तैनात है। ऐसे में
यह भी कहा जा सकता है कि जिस मदरसा के शिक्षकों द्वारा घालमेल किया जा
रहा है, वहां के तथाकथित प्रबंधक द्वारा न जाने कितने ऐसे कार्य किये गये
होंगे, जिनसे मानकों की खुलेआम अवहेलना हुई हो।


