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कुन्तेश्वर महादेव मंदिर में कांवारियों का तांता


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। बम-बम भोले हर-हर महादेव का उद्घोष, पैरों में बंधे छमा छम बजते घुघरुओं की सुमधुर आवाजें, बर बस ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। त्रिनेत्र धारी भगवान शिव का दर्शन करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। महाभारत कालीन ऐतिहासिक तीर्थस्थल किन्तूर स्थित कुन्तेश्वर धाम की ओर कांवरिये अपने कंधों पर चम चमाती पन्नियों और मयूर पंखों से सुसज्जित कांवर लिए हर-हर महादेव, बम-बम महादेव करते, पैरों में बंधे घुंघरुओं की छमा छम सुमधुर आवाजों से सारे वातावरण को शिव भक्ति से आच्छादित करते हुए कांवरिये लोधेश्वर महादेवा में जलाभिषेक करने के उपरान्त बढ़ते चले जा रहे हैं। सैकड़ों कि.मी. की पद यात्रा करने के बावजूद भी उनमें एक अनूठा उत्साह दिखायी दे रहा है। जनपद लखीमपुर से कंधे पर कांवर लाने वाले राम पदारथ, शिव ओम, राम बरन, आदि कांवरिये बताते हैं। कि शिव की नगरी महादेवा व किन्तूर स्थित कुन्तेश्वर धाम इन दोनो तीर्थ स्थलों में आने से पूरा साल खुशी-खुशी बीत जाता है। मेरी पीढ़ी और दर पीढ़ी के लोग जो गुजर गये हैं। वे इन दोनो तीर्थ स्थलों में कांवरें लेकर अवश्य आते थे। सारे बिगड़े हुए काम अपने आप बन जाते थे। और अब मै अपने भाइयों के साथ कांवर लेकर आता हूं। मन को शान्ति मिलती है। इसकी महत्व के सम्बन्ध में यहां के पुजारी भीखम दास बताते हैं कि महाभारत काल में अज्ञात वास के दौरान पाण्डवों ने अपना कुछ समय घाघरा नदी के तट पर व्यतीत किया था। उस दौरान पूजा अर्चना करने के लिए इस महा शिव लिंग को पाण्डवों की माता कुन्ती ने अपने हाथों से प्र्रत्यारोपित किया था। इसलिए यह स्थान कुन्तेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध हो गया जहां पर महाशिवरात्रि के दिन हजारों की संख्या में शिवभक्त इस अनुपम शिवलिंग का जलाभिषेक करके मनोवांछित फल प्राप्त करेंगे।

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