रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे...
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। जनपद में रंगों का पर्व होली बड़े ही धूम-धाम एवं परम्परागत ढंग से मनायी गयी। सुबह करीब साढ़े तीन बजे होलिका दहन के बाद लोगों ने होली की पूजा और परिक्रमा की। सुबह होते ही होलियारों की टोलियां सड़कों पर निकल पड़ीं। ढोलक की थापों पर होली गीत गाते होलियारों ने सड़कों पर खूब हुड़दंग किया। शहर में हर ओर रंग-गुलाल से सभी सराबोर दिखे। पूरा शहर होली की मस्ती में था। रंग खेलने के बाद लोग एक दूसरे के गले मिले और शुभकामनाएं दीं। होलिका दहन के बाद लोग होली की आग घरों में लाए और घरों में महिलाओं ने श्रद्धा के साथ होली की पूजा की। यहां होली पूरी मस्ती से मनाई गई। बच्चे तो सुबह से ही रंग गुलाल और पिचकारियां लेकर छतों पर चढ़ गए। रास्ते से गुजरने वाले हर व्यक्ति पर रंगों की बौछार कर खुश हुए। बच्चों ने एक दूसरे को रंग से सराबोर कर दिया। रंग खेलने में बड़े भी पीछे नहीं रहे। लोगों ने एक दूसरे के घरों में जाकर होली खेली और पकवानों का आनंद लिया। अलग-अलग मोहल्लों में युवाओं की टोलियां गाते बजाते रंग खेलने निकलीं। लोग रंग और गुलाल से इतना सराबोर थे कि एक दूसरे को पहचानने तक में दिक्कत हो रही थी। सड़कों पर होली गीतों के अलावा कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था और रंगों के अलावा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। वही गुरूवार को भी होली की धूम सड़कों एवं अन्य स्थानों पर सुबह से ही नजर आ रही थी। इस बार दो दिन की होली ने पूरा जनपद रंगोत्सव कर दिया। बस स्टेशनों पर बसों की संख्या न के बराबर रही। इससे लोगों को दिक्कत उठानी पड़ीं। ट्रेनों पर यात्रियों की संख्या काफी कम रही। दोपहर बाद रंग थमा तो लोग रंग बिरंगे कपड़ों में होली मिलने निकल पड़े। लोगों ने एक दूसरे के घर जाकर आपस में गले मिले और एक दूसरे को गुझिया और दूसरे पकवान खिलाकर होली की शुभकामनाएं दी। होली पर शुभकामनाएं देने का सिलसिला सोशल मीडिया और एसएमएस के जरिए देर रात तक जारी रहा।


