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शिकायतों के बाद नही होती नर्सिंग होम संचालकों पर कार्यवाही

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। शहर में सैकड़ो मानक विहीन नर्सिंगहोम कुकरमुत्ते की तरह उगे
हुये है। कई नर्सिंग होम पर गंभीर आरोप भी लगाये जा चुके हैं। परन्तु
स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक कुम्भकरणीय नींद में
शो रहा है। मामला हाल ही में जमुरिया नाले पर स्थित एक हास्पिटल संचालक
का है। जिसने एक 24 दिन के नवजात शिशु को परिवार सहित इसलिये बंधक बना
लिया था। कि वह साढ़े सात हजार रुपये इलाज के प्रतिदिन चुका सके। गायत्री
मंदिर के सामने स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम पर बच्चे को गायब करने का
आरोप लगाते हुये एक महिला ने जिलाधिकारी सहित एसपी व कोतवाली से न्याय की
गुहार लगायी थी। यह शिकायतें तो बानगी हैं शहर में प्रतिदिन प्राइवेट
नर्सिंग होम संचालकों के द्वारा सैकड़ो मरीजों की जान के साथ न र्सिफ
खिलवाड़ किया जाता है बल्कि तीमारदारों का जमकर शोषण भी किया जाता है।
विषम परिस्थितियों में जब मामला कोतवाली पुलिस के पास जाता है तो पुलिस
भी मैनेजमेंट के प्रयास में रहती है। आयकर विभाग की रेड से यह चर्चा भी
आम हो गयी है कि वास्वतविक शिकायतों पर एक्शन न लेने वाले कुम्भकरणी
विभाग को अचानक रेड का ख्याल कैसे आया। जो भी हो यह तो जांच पूरी होने के
पश्चात सामने आयेगा। आयकर विभाग ने अगर निष्पक्ष व प्रभावी कार्यवाही
शुरु की तो न सिर्फ मरीजों व तीमारदारों की दुआएं उनके साथ होंगी। बल्कि
कर चोरी के आरोपियों का नकाबी चेहरा बाहर आ जायेगा।

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