डा. अम्बेडकर की 125वीं जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित हुआ समारोह
https://husainijnp.blogspot.com/2016/04/125.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। डा. अम्बेडकर ने भारतीय समाज में छुआछूत और गैर बराबरी के
खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करके दलितों के सम्मान की रक्षा की। उनकी
इस क्रांतिकारी कार्यशैली ने समाज को एक नई दिशा दी। जो आज सामाजिक
परिवर्तन का अहम अंग बन गया है। उक्त विचार भारतीय संविधान के संस्थापक
एवं भारत रत्न डा. भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयंती की पूर्व संध्या पर
गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट द्वारा गांधी भवन में आयोजित व्याख्यान माला
एवं श्रद्धांजलि सभा में समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने व्यक्त किया।
श्री शर्मा ने बताया कि डा. अम्बेडकर की 125 वीं जयंती को गांधी जयंती
समारोह ट्रस्ट पूरे वर्ष भर प्रत्येक माह की 14 तारीख को गोष्ठियों का
आयोजन किया जायेगा। जिसके माध्यम से युवा पीढ़ी को सामाजिक परिवर्तन के
जननायकों के विचारों से रुबरु कराते हुए समाज को जागरुक करने का कार्य
किया जायेगा। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित ने कहा
कि डा. अम्बेडकर को सही श्रद्धांजलि यही होगी कि जो लोग आरक्षण लाभ ले
चुके हैं उनको अपने अन्य भाईयों के लिये आरक्षण का लाभ छोड़ना चाहिये
जिससे की समाज के अन्य लोगों को आरक्षण का लाभ मिल सके और पूरा समाज जल्द
से जल्द आरक्षण से लाभान्वित हो सके। भाजपा नेता देवेन्द्र प्रताप सिंह
‘ज्ञानू‘ ने कहा कि डा. अम्बेडकर ने भारतीयों को समानता का सिद्धांत
सिखाया। वह जातिवाद के खिलाफ थे। उन्होने जीवन भर संघर्ष करके जातिवाद
के खिलाफ लड़ाई लड़ी और लोगों को इस दाशता को जीवन से आजाद कराया। कांग्रेस
अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष विजय पाल गौतम ने कहा कि डा.
अम्बेडकर के बताये विचारों पर चलकर हमे समाज के लोगों को शिक्षित और
संगठित करना होगा। डा. अम्बेडकर का सपना आज भी अधूरा है। जबतक देश में
सामाजिक समरसता और समानता नही आयेगी तबतक समाज एकजुट नही होगा। सभा का
संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता हुमायूं नईम खां ने किया। इस मौके पर मुख्य रुप
से रामशंकर गौतम, समाजसेवी फराज अहमद खान, समाजसेवी अशोक शुक्ला, विजय
कुमार सिंह मुन्ना, विनय कुमार सिंह गुड्डू, मृत्युंजय शर्मा, अनुपम सिंह
राठौर, पाटेश्वरी प्रसाद, विश्वनाथ सोनी, विशाल मिश्रा, राघवेन्द्र
मिश्रा, एआर अम्बेडकर, विनोद भारती, सर्वेश सिंह, सूरज शर्मा सहित सैकड़ो
लोग मौजूद रहे।
बाराबंकी। डा. अम्बेडकर ने भारतीय समाज में छुआछूत और गैर बराबरी के
खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करके दलितों के सम्मान की रक्षा की। उनकी
इस क्रांतिकारी कार्यशैली ने समाज को एक नई दिशा दी। जो आज सामाजिक
परिवर्तन का अहम अंग बन गया है। उक्त विचार भारतीय संविधान के संस्थापक
एवं भारत रत्न डा. भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयंती की पूर्व संध्या पर
गांधी जयंती समारोह ट्रस्ट द्वारा गांधी भवन में आयोजित व्याख्यान माला
एवं श्रद्धांजलि सभा में समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने व्यक्त किया।
श्री शर्मा ने बताया कि डा. अम्बेडकर की 125 वीं जयंती को गांधी जयंती
समारोह ट्रस्ट पूरे वर्ष भर प्रत्येक माह की 14 तारीख को गोष्ठियों का
आयोजन किया जायेगा। जिसके माध्यम से युवा पीढ़ी को सामाजिक परिवर्तन के
जननायकों के विचारों से रुबरु कराते हुए समाज को जागरुक करने का कार्य
किया जायेगा। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित ने कहा
कि डा. अम्बेडकर को सही श्रद्धांजलि यही होगी कि जो लोग आरक्षण लाभ ले
चुके हैं उनको अपने अन्य भाईयों के लिये आरक्षण का लाभ छोड़ना चाहिये
जिससे की समाज के अन्य लोगों को आरक्षण का लाभ मिल सके और पूरा समाज जल्द
से जल्द आरक्षण से लाभान्वित हो सके। भाजपा नेता देवेन्द्र प्रताप सिंह
‘ज्ञानू‘ ने कहा कि डा. अम्बेडकर ने भारतीयों को समानता का सिद्धांत
सिखाया। वह जातिवाद के खिलाफ थे। उन्होने जीवन भर संघर्ष करके जातिवाद
के खिलाफ लड़ाई लड़ी और लोगों को इस दाशता को जीवन से आजाद कराया। कांग्रेस
अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष विजय पाल गौतम ने कहा कि डा.
अम्बेडकर के बताये विचारों पर चलकर हमे समाज के लोगों को शिक्षित और
संगठित करना होगा। डा. अम्बेडकर का सपना आज भी अधूरा है। जबतक देश में
सामाजिक समरसता और समानता नही आयेगी तबतक समाज एकजुट नही होगा। सभा का
संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता हुमायूं नईम खां ने किया। इस मौके पर मुख्य रुप
से रामशंकर गौतम, समाजसेवी फराज अहमद खान, समाजसेवी अशोक शुक्ला, विजय
कुमार सिंह मुन्ना, विनय कुमार सिंह गुड्डू, मृत्युंजय शर्मा, अनुपम सिंह
राठौर, पाटेश्वरी प्रसाद, विश्वनाथ सोनी, विशाल मिश्रा, राघवेन्द्र
मिश्रा, एआर अम्बेडकर, विनोद भारती, सर्वेश सिंह, सूरज शर्मा सहित सैकड़ो
लोग मौजूद रहे।
