आग बुझाने के लिए उत्तराखंड ने यूपी से मांगे 500 फायरकर्मी
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उत्तराखंड के जंगलों में आग की घटनाओं पर काबू पाने में मैन पावर की कमी आ रही है। वन विभाग ने यूपी से पांच सौ फायरकर्मी मांगे हैं। साथ ही वनाग्नि की स्थिति की मॉनीटरिंग के लिए केंद्र से हेलीकॉप्टर मांगा जा रहा है।
अगर वनाग्नि पर काबू न पाया गया तो चारधाम यात्रा में दिक्कत आ सकती है। कई स्थानों पर यात्रा रूट के दोनों तरफ आग की घटनाएं हो रही हैं जिससे हर तरफ धुआं भरा हुआ है। महानिदेशक वन एवं पर्यावरण (फायर) डा. एसएस नेगी ने शनिवार को वनाग्नि की स्थिति पर मंथन सभागार में वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की।
इसके बाद पत्रकारों को बताया कि वन विभाग अपने सीमित संसाधनों में संतोषजनक उपाय कर रहा है। यहां मैन पावर की बहुत कमी है। पहाड़ों पर ग्राउंड फायर है। इसे मैनुअली ही बुझाया जा सकता है। यहां पानी की कमी है और फायर ब्रिगेड भी नहीं भेजी जा सकती।
महानिदेशक नेगी ने बताया कि वनाग्नि के मामले में यह असामान्य वर्ष है जिसमें आग की घटनाएं अधिक होती हैं। यह चक्र हर तीन-चार साल में आता है। वर्ष 2012 में भी घटनाएं अधिक हुई थीं। पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़ आदि जिलों को उन्होंने अधिक संवेदनशील बताया। महानिदेशक ने कहा कि वन विभाग प्रस्ताव बनाकर भेजे केंद्र से व्यवस्था कराई जाएगी।
प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड राजेंद्र कुमार ने बताया कि वन पंचायतों को वनाग्नि रोकने के लिए साथ लिया जा रहा है। क्षेत्रीय युवाओं को संविदा पर भर्ती किया जाएगा। अभी पांच हजार कर्मचारी वनाग्नि रोकने में लगे हैं। इनमें साढ़े तीन हजार संविदा पर हैं।
अगर वनाग्नि पर काबू न पाया गया तो चारधाम यात्रा में दिक्कत आ सकती है। कई स्थानों पर यात्रा रूट के दोनों तरफ आग की घटनाएं हो रही हैं जिससे हर तरफ धुआं भरा हुआ है। महानिदेशक वन एवं पर्यावरण (फायर) डा. एसएस नेगी ने शनिवार को वनाग्नि की स्थिति पर मंथन सभागार में वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की।
इसके बाद पत्रकारों को बताया कि वन विभाग अपने सीमित संसाधनों में संतोषजनक उपाय कर रहा है। यहां मैन पावर की बहुत कमी है। पहाड़ों पर ग्राउंड फायर है। इसे मैनुअली ही बुझाया जा सकता है। यहां पानी की कमी है और फायर ब्रिगेड भी नहीं भेजी जा सकती।
महानिदेशक नेगी ने बताया कि वनाग्नि के मामले में यह असामान्य वर्ष है जिसमें आग की घटनाएं अधिक होती हैं। यह चक्र हर तीन-चार साल में आता है। वर्ष 2012 में भी घटनाएं अधिक हुई थीं। पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़ आदि जिलों को उन्होंने अधिक संवेदनशील बताया। महानिदेशक ने कहा कि वन विभाग प्रस्ताव बनाकर भेजे केंद्र से व्यवस्था कराई जाएगी।
प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड राजेंद्र कुमार ने बताया कि वन पंचायतों को वनाग्नि रोकने के लिए साथ लिया जा रहा है। क्षेत्रीय युवाओं को संविदा पर भर्ती किया जाएगा। अभी पांच हजार कर्मचारी वनाग्नि रोकने में लगे हैं। इनमें साढ़े तीन हजार संविदा पर हैं।

