पैगम्बर पूरी कायनात के लिये रहबर बनकर आये: मौलाना फजल
https://husainijnp.blogspot.com/2016/04/blog-post_11.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। पैगम्बरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सिर्फ मुसलमानों के लिये ही नही
बल्कि सारे कायनात के लिये रहबर बनकर आये नबी अकरम के तालिमात को अपनाकर
ही शांति एवं भाईचारा कायम किया जा सकता है। उक्त बातें कस्बा बड़ागांव
में स्थित मदरसा इस्लामियां दारुल फला के सालाना जलसे को खिताब करते हुए
मौलाना फजल-उर-रहमान इटावी ने कहा कि नबी अकरम का जो मुकाम है वह इतना
बुलन्द है कि उनके नाम लिये बगैर अजान मुक्कमल नही है। इसी तरह सबसे बड़ी
इबादत नमाज में जब तक रसूल अल्लाह पर दुरुद-सलाम न पढ़ ली तब तक नमाज
मुक्कम नही होती है।
मौलाना फजल उर रहमान ने खिताब फरमाते हुए कहा कि नबी
अकरम ने फरामाया है कि कयामत के दिन कोई भी हस्ती तुम्हारी सिफारिस नही
करेगा उस वक्त मै तुम्हारी सिफारिश अल्लाहा ताला से करुंगा परन्तु उन
लोगों की सिफारिश नही करुंगा जो शिक करते है। जमीयते अहले हदीश उ0प्र0 के
अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन मदनी ने नबी अकरम के साथी सहाबा की अजमत को
बयान करते हुए कहा कि कोई सहाबी नबी की कोई बात कहे तो उसमे तस्दीक की
जरुरत नही है। क्योंकि अल्लाहतआला ने अपने नबी की शरीयत को हिफाजत का
वायदा किया है। मस्जिद-ए-उमर बड़ागांव के खतीब व इमाम हाफिज मोहम्मद आसिफ
ने कहा कि उम्मत के अंदर एकता तभी मुमकिन है कि जब तक सब मिलकर नबी अकरम
की पैरवी करने लग जाये रसूल के आलवा किसी अन्य की पैरवी करने से मुसलमान
गुमराह हो जाता है और दरारे पड़ जाती है। पैगम्बर ए इस्लाम हजरत मुहम्मद
की एक हदीश है कि हिदायत का रास्ता कुरान व हदीश है। जलसे में मदरसे के
मो. इमरान, मो आकिब, मो. लईक द्वसास कुरान शरीफ हिफ्त कराने पर दस्तार
बंदी की गयी जिसमें मौलाना शहाबुद्दीन ने बच्चों पगड़ी बांधकर मुबारक बाद
दी। जलसे की निजामत हाफिज शकील ने की। इस मौके पर जमीयते अहले हदीश बड़ा
गांव के सदर हाफिज शाकिर अली, हाफिज जमील अहमद, मो. अनस कुरैशी, मो आसिफ
खान, मो. आरिफ खान, मो. नफीस खान, मो. अनीस खां सहित जलसे में भारी
संख्या में लोग मौजूद थे।
बाराबंकी। पैगम्बरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सिर्फ मुसलमानों के लिये ही नही
बल्कि सारे कायनात के लिये रहबर बनकर आये नबी अकरम के तालिमात को अपनाकर
ही शांति एवं भाईचारा कायम किया जा सकता है। उक्त बातें कस्बा बड़ागांव
में स्थित मदरसा इस्लामियां दारुल फला के सालाना जलसे को खिताब करते हुए
मौलाना फजल-उर-रहमान इटावी ने कहा कि नबी अकरम का जो मुकाम है वह इतना
बुलन्द है कि उनके नाम लिये बगैर अजान मुक्कमल नही है। इसी तरह सबसे बड़ी
इबादत नमाज में जब तक रसूल अल्लाह पर दुरुद-सलाम न पढ़ ली तब तक नमाज
मुक्कम नही होती है।
मौलाना फजल उर रहमान ने खिताब फरमाते हुए कहा कि नबी
अकरम ने फरामाया है कि कयामत के दिन कोई भी हस्ती तुम्हारी सिफारिस नही
करेगा उस वक्त मै तुम्हारी सिफारिश अल्लाहा ताला से करुंगा परन्तु उन
लोगों की सिफारिश नही करुंगा जो शिक करते है। जमीयते अहले हदीश उ0प्र0 के
अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन मदनी ने नबी अकरम के साथी सहाबा की अजमत को
बयान करते हुए कहा कि कोई सहाबी नबी की कोई बात कहे तो उसमे तस्दीक की
जरुरत नही है। क्योंकि अल्लाहतआला ने अपने नबी की शरीयत को हिफाजत का
वायदा किया है। मस्जिद-ए-उमर बड़ागांव के खतीब व इमाम हाफिज मोहम्मद आसिफ
ने कहा कि उम्मत के अंदर एकता तभी मुमकिन है कि जब तक सब मिलकर नबी अकरम
की पैरवी करने लग जाये रसूल के आलवा किसी अन्य की पैरवी करने से मुसलमान
गुमराह हो जाता है और दरारे पड़ जाती है। पैगम्बर ए इस्लाम हजरत मुहम्मद
की एक हदीश है कि हिदायत का रास्ता कुरान व हदीश है। जलसे में मदरसे के
मो. इमरान, मो आकिब, मो. लईक द्वसास कुरान शरीफ हिफ्त कराने पर दस्तार
बंदी की गयी जिसमें मौलाना शहाबुद्दीन ने बच्चों पगड़ी बांधकर मुबारक बाद
दी। जलसे की निजामत हाफिज शकील ने की। इस मौके पर जमीयते अहले हदीश बड़ा
गांव के सदर हाफिज शाकिर अली, हाफिज जमील अहमद, मो. अनस कुरैशी, मो आसिफ
खान, मो. आरिफ खान, मो. नफीस खान, मो. अनीस खां सहित जलसे में भारी
संख्या में लोग मौजूद थे।
