मूर्ख प्रदीप, फिदा व बृजेश को फूल-मालाओं से किया गया सम्मानित
https://husainijnp.blogspot.com/2016/04/blog-post_99.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। अभी तक लोगो को फूल मालाओं से नवाजे़ जाने की बाते सुनी और
देखी होगी लेकिन शुक्रवार को एक समाजसेवी को जूते से नवाज़ा गया। अवसर था
पहली अप्रैल मूर्ख दिवस पर जनेस्मा में आयोजित मूर्खाधिराज चयन एवं चयन
सम्मान समारेह का मुर्खाधिराज चयन एवं सम्मान समारोह में लोगों को अपने
व्याखयान से साबित करना था कि उनके अन्दर मूर्ख होने के कितने गुण है। इस
समारोह में डा. फिदा हुसैन ने अपने को मर्ख साबित करने के कई तर्क तों
प्रस्तुत किये लेकिन श्रोताओं के सामने टिक नही पाये।
साहित्यकार अजय
सिंह गुरू ने अपने सम्बोधन मे अब तक अपने द्वारा किये साहित्य सर्जन को
मुर्खाे कर परिकल्पना पर आधारित बताते हुए कहा कि वह बाबा बैजनाथ और
मृगेश की परम्परा को अपनी मूर्खाता पूर्ण कृत्यों से जिन्दा किये है।
मुर्खाधिराज अलंकरण हेतु अधिवक्ता हुमायुॅ नईम ने अपनी दावेदारी प्रस्तुत
करते हुए बताया कि मेरे रिश्तेदार, पडोसी टीचर सभी यहॉ तक कि बीबी भी
हमें महा बेकूफ कहते हैं। जनेस्मा पीजी कालेज के चीफ प्राक्टर डा. राजेश
मल्ल की पहल पर आयोजित इस समारोह में अध्यक्ष डा. भगवान वत्स ने उपस्थित
न होकर सभी को मूर्ख बनाया। इसी क्रम में समाज सेवी प्रदीप सारंग ने
मूर्खिस्तान के प्रथम राष्ट्रपति सरदार बेन्त सिंह की परम्परा के निर्वहन
में अपना जूता अपने सिर पर रखकर दावेदारी प्रस्तुत की। जूरी मेम्बर एड.
बृजेश दीक्षित व डा. श्याम सुन्दर की डबल बेंच ने प्रदीप सांरग को
मूर्खाता पूर्ण विद्वता हेतु मूर्खाधिराज चयनित किया और पुनः उन्ही के
जूते से नवाज़ा गया इस अवसर पर वीरेन्द्र वर्मा, अशोक सैनी, चमन वर्मा,
उदान्नद, सुरेश श्रीवास्तव, अब्इुल खालिक़, गोविन्द वर्मा, अमिर अली,
शत्रोहन लाल वर्मा, मो. अतहर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
बाराबंकी। अभी तक लोगो को फूल मालाओं से नवाजे़ जाने की बाते सुनी और
देखी होगी लेकिन शुक्रवार को एक समाजसेवी को जूते से नवाज़ा गया। अवसर था
पहली अप्रैल मूर्ख दिवस पर जनेस्मा में आयोजित मूर्खाधिराज चयन एवं चयन
सम्मान समारेह का मुर्खाधिराज चयन एवं सम्मान समारोह में लोगों को अपने
व्याखयान से साबित करना था कि उनके अन्दर मूर्ख होने के कितने गुण है। इस
समारोह में डा. फिदा हुसैन ने अपने को मर्ख साबित करने के कई तर्क तों
प्रस्तुत किये लेकिन श्रोताओं के सामने टिक नही पाये।
साहित्यकार अजय
सिंह गुरू ने अपने सम्बोधन मे अब तक अपने द्वारा किये साहित्य सर्जन को
मुर्खाे कर परिकल्पना पर आधारित बताते हुए कहा कि वह बाबा बैजनाथ और
मृगेश की परम्परा को अपनी मूर्खाता पूर्ण कृत्यों से जिन्दा किये है।
मुर्खाधिराज अलंकरण हेतु अधिवक्ता हुमायुॅ नईम ने अपनी दावेदारी प्रस्तुत
करते हुए बताया कि मेरे रिश्तेदार, पडोसी टीचर सभी यहॉ तक कि बीबी भी
हमें महा बेकूफ कहते हैं। जनेस्मा पीजी कालेज के चीफ प्राक्टर डा. राजेश
मल्ल की पहल पर आयोजित इस समारोह में अध्यक्ष डा. भगवान वत्स ने उपस्थित
न होकर सभी को मूर्ख बनाया। इसी क्रम में समाज सेवी प्रदीप सारंग ने
मूर्खिस्तान के प्रथम राष्ट्रपति सरदार बेन्त सिंह की परम्परा के निर्वहन
में अपना जूता अपने सिर पर रखकर दावेदारी प्रस्तुत की। जूरी मेम्बर एड.
बृजेश दीक्षित व डा. श्याम सुन्दर की डबल बेंच ने प्रदीप सांरग को
मूर्खाता पूर्ण विद्वता हेतु मूर्खाधिराज चयनित किया और पुनः उन्ही के
जूते से नवाज़ा गया इस अवसर पर वीरेन्द्र वर्मा, अशोक सैनी, चमन वर्मा,
उदान्नद, सुरेश श्रीवास्तव, अब्इुल खालिक़, गोविन्द वर्मा, अमिर अली,
शत्रोहन लाल वर्मा, मो. अतहर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
