परिषदीय विद्यालयों में बदहाली को देख विफर रहे अभिभावक
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बाराबंकी। जहां एक ओर नया शिक्षा सत्र एक अप्रैल से शुरू
होने के बाद भी कई परिषदीय विद्यालयों की साफ सफाई तक अभी तक नही कराई जा
सकी है। वही शासन को धता बताते हुए शिक्षा सत्र शुरू होने से पूर्व ही
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रो मे शिक्षा को व्यवसाय का रूप देने वालो ने
अपनी निजी ख्वाहिशो को पूरा करने के लिए अपना-अपना मकड़ जाल बिछाना शुरू
कर दिया जाता है। इसके लिए शिक्षा को व्यवसाय का रूप देने वालो के द्वारा
विद्यालयो में दाखिले के लिए छात्र छात्राओ के घरो मे चक्कर लगाकर बच्चो
के अभिभावको को लुभावने लालच देकर अपने मकडजाल में फसाना शुरू कर दिया
गया है। मालूम हो कि सरकार द्वारा भले ही नये सत्र की शुरूआत इस बार एक
अपै्रल से की गई है लेकिन मिशनरी व माटेंसरी स्कूल मार्च मे ही सत्र
समाप्त कर दाखिलो पर जोर देने लगते है। इसका कारोबार करने वाले लोग नगर
सहित ग्रामीण क्षेत्रो मे बाजार में दुकानो की भांति अपना ंजाल फैलाए हुए
है। विद्यालयो के प्रबंधक अपनी टीम के साथ सुबह शाम गांवो में जाकर घर घर
दस्तक देकर अभिभावको से अपने बच्चो का दाखिला अपने निजी विद्यालयों में
कराने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दे रहे है। शिक्षा विभाग से जुडे
स्थानीय अधिकारियों कर्मचारियांे की खाऊ-कमाऊ नीति के चलते दर्जनो ऐसे
विद्यालय संचालित होने के बात चर्चा का विषय बन रही है जिनकी मान्यता
प्राइमरी तक की नही है और इण्टर कालेज का बोर्ड लगाकर छात्रो के भविष्य
के साथ खिलवाड करते हुए अभिभावको को गुमराह कर रहे है। यह लोग विज्ञापनो
से दीवाल पर लेखन कर बडी-बडी होर्डिग्स भी लगाकर उसमें तरह तरह के लाभो
को देने का प्रलोभन से आम जनता को तथा शासन-प्रशासन को गुमराह करने का
काम कर रहे है। अगर विभागीय अधिकारियो द्वारा सही तरीके से इन विद्यालयो
का अवलोकन किया जाय तो रामसनेहीघाट क्षेत्र में ही एक आध विद्यालय छोड
बाकी कोई भी विद्यालय शिक्षा विभाग के नियमो पर खरा नही उतरेगा।
रामसनेहीघाट क्षेत्र मे तो इन दिनो विद्यालयो खोलने की बाढ सी आ गयी है।
जिनमें ज्यादातर विद्यालयों में कोई भी अध्यापक स्नातक नही है। चर्चा है
कि शिक्षा विभाग के लिपिको से सांठ-गांठ कर मान्यता विहीन विद्यालय
नियम-कानून की धज्जियां उडा रहे है। तहसील मुख्यालय के एक किमी दूर में
कई विद्यालय ऐसे संचालित किये जा रहे है जो शिक्षा विभाग के मानको से
पूरी तरह से विमुख है। अगर देखा जाय तो पूरे क्षेत्र में संचालित हो रहे
विद्यालयों में मान्यता न होते हुए भी शिक्षा विभाग से साठ गाठ करके
बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड कर अपनी चिकनी चोपडी बातो में उनके
अभिभावको को फंसा कर अपने अपने विद्यालयों में दखिला कर रहे है। इसके
अलावा दरियाबाद बारिनबाग, टिकैतनगर, सिद्धौर, देवीगंज, बेलहा चौराहा,
कोटवासडक आदि कस्बो मे कुछ ऐसे विद्यालय है जिनकी मान्यताएं केवल
प्राईमरी या जूनियर की है। परन्तु उनके यहां हाईस्कूल या इण्टर की
कक्षाएं संचालित होने की चर्चाये हो रही है। सोचनीय तथ्य तो यह है कि
सरकार द्वारा शिक्षा का ग्राफ बढाने के लिए सरकारी विद्यालयों में तरह
तरह का लाभ दे रही है लेकिन स्थानीय कर्मचारियों व अध्यापको की शुस्त
कार्यप्रणाली के चलते सरकार कि मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है वही
शिक्षा माफियाओ द्वारा गांव गांव जाकर अभिभावको को गुमराह कर रहे है और
बेचारा अभिभावक शिक्षा माफियाओ के चंगुल में फंसकर अपनी गाढी कमाई को
लुटता हुआ देख रहा है। इस संबंध में खण्ड शिक्षाधिकारी सतीश कुमार
त्रिपाठी ने बताया कि बगैर मान्यता लिए ही व मानक विहीन संचालित होने
वालो विद्यालयों पर अभियान चलाकर कार्यवाही की जायेगी
होने के बाद भी कई परिषदीय विद्यालयों की साफ सफाई तक अभी तक नही कराई जा
सकी है। वही शासन को धता बताते हुए शिक्षा सत्र शुरू होने से पूर्व ही
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रो मे शिक्षा को व्यवसाय का रूप देने वालो ने
अपनी निजी ख्वाहिशो को पूरा करने के लिए अपना-अपना मकड़ जाल बिछाना शुरू
कर दिया जाता है। इसके लिए शिक्षा को व्यवसाय का रूप देने वालो के द्वारा
विद्यालयो में दाखिले के लिए छात्र छात्राओ के घरो मे चक्कर लगाकर बच्चो
के अभिभावको को लुभावने लालच देकर अपने मकडजाल में फसाना शुरू कर दिया
गया है। मालूम हो कि सरकार द्वारा भले ही नये सत्र की शुरूआत इस बार एक
अपै्रल से की गई है लेकिन मिशनरी व माटेंसरी स्कूल मार्च मे ही सत्र
समाप्त कर दाखिलो पर जोर देने लगते है। इसका कारोबार करने वाले लोग नगर
सहित ग्रामीण क्षेत्रो मे बाजार में दुकानो की भांति अपना ंजाल फैलाए हुए
है। विद्यालयो के प्रबंधक अपनी टीम के साथ सुबह शाम गांवो में जाकर घर घर
दस्तक देकर अभिभावको से अपने बच्चो का दाखिला अपने निजी विद्यालयों में
कराने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दे रहे है। शिक्षा विभाग से जुडे
स्थानीय अधिकारियों कर्मचारियांे की खाऊ-कमाऊ नीति के चलते दर्जनो ऐसे
विद्यालय संचालित होने के बात चर्चा का विषय बन रही है जिनकी मान्यता
प्राइमरी तक की नही है और इण्टर कालेज का बोर्ड लगाकर छात्रो के भविष्य
के साथ खिलवाड करते हुए अभिभावको को गुमराह कर रहे है। यह लोग विज्ञापनो
से दीवाल पर लेखन कर बडी-बडी होर्डिग्स भी लगाकर उसमें तरह तरह के लाभो
को देने का प्रलोभन से आम जनता को तथा शासन-प्रशासन को गुमराह करने का
काम कर रहे है। अगर विभागीय अधिकारियो द्वारा सही तरीके से इन विद्यालयो
का अवलोकन किया जाय तो रामसनेहीघाट क्षेत्र में ही एक आध विद्यालय छोड
बाकी कोई भी विद्यालय शिक्षा विभाग के नियमो पर खरा नही उतरेगा।
रामसनेहीघाट क्षेत्र मे तो इन दिनो विद्यालयो खोलने की बाढ सी आ गयी है।
जिनमें ज्यादातर विद्यालयों में कोई भी अध्यापक स्नातक नही है। चर्चा है
कि शिक्षा विभाग के लिपिको से सांठ-गांठ कर मान्यता विहीन विद्यालय
नियम-कानून की धज्जियां उडा रहे है। तहसील मुख्यालय के एक किमी दूर में
कई विद्यालय ऐसे संचालित किये जा रहे है जो शिक्षा विभाग के मानको से
पूरी तरह से विमुख है। अगर देखा जाय तो पूरे क्षेत्र में संचालित हो रहे
विद्यालयों में मान्यता न होते हुए भी शिक्षा विभाग से साठ गाठ करके
बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड कर अपनी चिकनी चोपडी बातो में उनके
अभिभावको को फंसा कर अपने अपने विद्यालयों में दखिला कर रहे है। इसके
अलावा दरियाबाद बारिनबाग, टिकैतनगर, सिद्धौर, देवीगंज, बेलहा चौराहा,
कोटवासडक आदि कस्बो मे कुछ ऐसे विद्यालय है जिनकी मान्यताएं केवल
प्राईमरी या जूनियर की है। परन्तु उनके यहां हाईस्कूल या इण्टर की
कक्षाएं संचालित होने की चर्चाये हो रही है। सोचनीय तथ्य तो यह है कि
सरकार द्वारा शिक्षा का ग्राफ बढाने के लिए सरकारी विद्यालयों में तरह
तरह का लाभ दे रही है लेकिन स्थानीय कर्मचारियों व अध्यापको की शुस्त
कार्यप्रणाली के चलते सरकार कि मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है वही
शिक्षा माफियाओ द्वारा गांव गांव जाकर अभिभावको को गुमराह कर रहे है और
बेचारा अभिभावक शिक्षा माफियाओ के चंगुल में फंसकर अपनी गाढी कमाई को
लुटता हुआ देख रहा है। इस संबंध में खण्ड शिक्षाधिकारी सतीश कुमार
त्रिपाठी ने बताया कि बगैर मान्यता लिए ही व मानक विहीन संचालित होने
वालो विद्यालयों पर अभियान चलाकर कार्यवाही की जायेगी

