शासनादेश की उड़ रही धज्जिंया, मानकविहीन विद्यालय
https://husainijnp.blogspot.com/2016/04/blog-post_391.html
बाराबंकी। यदि शासनादेश के मुताबिक अगर मान्यता के मानको पर
विचार किया जाय तो हाईस्कूल की मान्यता के 48 वर्ग मीटर के दो कक्ष
बालिका विद्यालयो 36 वर्ग मीटर के शिक्षण कक्ष होना आवश्यक है। पूर्व
माध्यमिक विद्यालय के लिए तीस वर्ग मीटर का एक वैकल्पिक विषय कक्ष सहित
12 मीटर के दो प्रशासकीय कक्ष भी होने अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त 54
मीटर माप के विज्ञान व गृह विज्ञान की प्रयोगशालाए 48 वर्ग मीटर का
पुस्तकालय कक्ष तथा नागरीय क्षेत्र में एक हजार वर्ग मीटर ग्रामीण
क्षेत्रो में चार हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल भी होना चाहिए। इण्टरमीडिएट
की मान्यता के लिए 48 वर्ग मीटर के दो कक्ष बालिका के 36 वर्ग मीटर,
नृत्यकला के लिए 30 वर्ग मीटर के कक्ष सहित 54 वर्ग मीटर मे प्रयोगशाला व
54 वर्ग मीटर मे ही कम्प्यूटर कक्ष भी होना चाहिए परन्तु लगभग सत्तर
प्रतिशत स्कूल इन शर्ताे को कागजो पर भले ही पूरा कर रहे हो परन्तु हकीकत
कुछ और ही है। छप्पर रखकर प्लास्टिक की दो चार कुर्सियां खरीद कर सडक के
किनारे सहित गवंई गावों मे विद्यालय संचालित हो रहे है। आश्चर्य तो इस
बात का होता है कि दशको मे संचालित इन विद्यालयो के खिलाफ शिक्षा विभाग
आखिर मौन क्यो है ?
विचार किया जाय तो हाईस्कूल की मान्यता के 48 वर्ग मीटर के दो कक्ष
बालिका विद्यालयो 36 वर्ग मीटर के शिक्षण कक्ष होना आवश्यक है। पूर्व
माध्यमिक विद्यालय के लिए तीस वर्ग मीटर का एक वैकल्पिक विषय कक्ष सहित
12 मीटर के दो प्रशासकीय कक्ष भी होने अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त 54
मीटर माप के विज्ञान व गृह विज्ञान की प्रयोगशालाए 48 वर्ग मीटर का
पुस्तकालय कक्ष तथा नागरीय क्षेत्र में एक हजार वर्ग मीटर ग्रामीण
क्षेत्रो में चार हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल भी होना चाहिए। इण्टरमीडिएट
की मान्यता के लिए 48 वर्ग मीटर के दो कक्ष बालिका के 36 वर्ग मीटर,
नृत्यकला के लिए 30 वर्ग मीटर के कक्ष सहित 54 वर्ग मीटर मे प्रयोगशाला व
54 वर्ग मीटर मे ही कम्प्यूटर कक्ष भी होना चाहिए परन्तु लगभग सत्तर
प्रतिशत स्कूल इन शर्ताे को कागजो पर भले ही पूरा कर रहे हो परन्तु हकीकत
कुछ और ही है। छप्पर रखकर प्लास्टिक की दो चार कुर्सियां खरीद कर सडक के
किनारे सहित गवंई गावों मे विद्यालय संचालित हो रहे है। आश्चर्य तो इस
बात का होता है कि दशको मे संचालित इन विद्यालयो के खिलाफ शिक्षा विभाग
आखिर मौन क्यो है ?

