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पनामा पेपर्स में सामने आया करीना, करिश्मा और सैफ का नाम


दुनिया भर में फैले आर्थिक भ्रष्टाचार का खुलासा कर रहे पनामा पेपर्स में कई ऐसे नाम सामने आए हैं जो चौंकाने वाले हैं। इस बार इसकी सूची में अभिनेता सैफ अली खान, करीना कपूर और करिश्मा कपूर का नाम शामिल है। बता दें कि पनामा की ला फर्म मोसेक फोंसेका के दस्तावेज लीक होने के बाद भारत समेत दुनिया भर के मुल्कों में हंगामा मच गया है। मौजूदा खुलासे के मुताबिक 2010  में इंडियन प्रीमियर लीग में टीम खरीदने के लिए सैफ अली खान, करिश्मा कपूर और करीना कपूर सहित वीडियोकॉन कंपनी के वेणुगोपाल धूत और पुणे स्थित पंचशील ग्रुप शामिल था।

आईपीएल में पुणे टीम की फ्रैंचाइजी पाने के लिए सैफ-करीना सहित 10 लोगों की अलग-अलग हिस्सेदारी थी। इन सभी  ने मिल कर संघ बनाया था। इस संघ ने समझौते का मेमरैन्डम (एमओयू) हस्ताक्षर कर के पी विजन स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई। मोसेक फोंसेका से मिले एमओयू के अनुसार संघ में 15 प्रतिशत की हिस्सेदारी आब्डरट लिमटेड की थी। यह कंपनी ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड में पंजीकृत थी। इस मामले में वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत ने कहा कि वो केवल अपनी हिस्सेदारी का जवाब दे सकते हैं, बाकी लोगों के बारे में उन्हें नहीं पता है। वहीं सैफ और करीना की ओर से इस पर जवाब नहीं आया है।

वहीं दूसरी ओर उद्योग जगत से भी कुछ नए नाम इस खुलासे के क्रम में सामने आए हैं। इसमें भारतीय सतीश के. मोदी, राहुल अरुण प्रसाद पटेल, प्रसन्‍ना वी घोटगे और वमन कुमार, अशोक मल्‍होत्रा, भंडारी अशोक रामदयालचंद और जॉर्ज मैथ्‍यू का नाम शामिल है। मोसेक फोंसेका से लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार सतीश के. मोदी जहां मोदी ग्‍लोबल इंटरप्राइजेज के चेयरमैन और केके मोदी के छोटे भार्इ हैं वहीं अरुण प्रसाद पटेल गुजरात  के अहमदाबाद स्थित सिंटेक्‍स लिमिटेड के तीन मैनेजिंग डायरेक्टर में से एक हैं। अपना नाम इस खुलासे में आने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि यह कंपनी अब उनकी है भी या नहीं।

प्रसन्‍ना वी घोटगे और वमन कुमार जो पीवीजी ग्रुप कर्नाटक के बेल्‍लारी में 3000 ट्रकों के जरिए लौह अयस्‍क का परिवहन करते थे और वमन लौह अयस्‍क के विशेषज्ञ हैं। इससे पहले इन दोनों एवं एक अन्य पर 30 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी का आरोप लगा था जिसे 2013 में कर्नाटक की एक अदालत ने खारिज कर दिया था। अशोक मल्‍होत्रा जो फिलहा कैंसर से जूझ रहे हैं उनका कहना है कि इ एण्ड पी ऑनलुकर्स कंपनी केवल दो महीने ही चली थी।

भंडारी अशोक रामदयालचंद के बारे में फोंसेका के दस्तावजे बताते हैं कि वो 2005 में पंजीकृत की गई एक कंपनी के डायरेक्टर थे। जार्ज मैथ्यू का इस मामले में कहना है कि वो एनआरआई हैं और उन पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियम लागू नहीं होते। लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार 2011 के आसपास उनके नाम से ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड में काफी कंपनियां खोली गई। उपर्युक्त नामों में से सभी की कंपनियां टैक्स हैवेन कंट्री ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड में ही खोली और पंजीकृत कराई गई हैं।

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