अग्नि पीड़ितों की आस पर मंत्री, अधिकारियों ने फेरा पानी
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। पीड़ितो को तत्काल राहत की जरूरत है लेकिन सहायता न
मिलने से जीवन यापन में दिक्कत पड़ जाती है। पीड़ि़त सहायता मिलने की राह
देख रहे लेाग राख के ढेर में जिंदगी की तालाश कर रहे हैं। लोगों को
उम्मीद थी की आग लगने के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारी व मंत्री कुछ सहायता
जरूर देगंे लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ और सभी लोग आश्वसासन देकर चले गये।
सरकार की बदली अहेतू सहायता नीति अन्य पीड़ितों पर भारी पड़ रही है। विकास
खण्ड बनीकोडर अन्तर्गत ग्राम सनौली में मंगलवार को अचानक लगी आग से 30 घर
जल कर राख हो गये थे और करोड़ो की नकदी जेवरात आदि जल कर राख हो गये थे।
आग की प्रवलता का अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आग को काबू
पाने के लिये क्षेत्राधिकारी दिनेश चन्द्र तिवरी की अगूवाई में ती न
स्थानो से आयी अलग अलग फायर ब्रिगेड की टीमो को घण्टो मशक्कत करनी पड़ी
कुशल तो यह था। कि एक तालाब मे पानी मौजूद था। वरना पूरा गाव जलकर समसान
बन जाता अगर इसी तरह गाव के दूसरे तालाब में पानी होता तो शायद इतनी
तबाही नही होती इस समय गाव में एक तरफ आग का प्रकोप चल रहा है वही दूसरी
तालाब सूखे पडे है और प्रशासन अब तक इनमे पानी नही भरवा सका गाव में इस
समय आग लगने पर बूझाने के लिये पानी उपलब्ध नही हो पा रहा है घटना के बाद
सनौली गाव पहुचे कृषि राज्य मंत्री राजीव कुमार सिंह व उपजिलाधिकारी ने
गाव वालो को सहायता का अश्वसासन दिया था गाव वाले अश्वशासन के अनुरूप्
सहायता मिलने का इन्तजार कर रहे है इसके बाद देर शाम तक इन पीडितो तक
सहायता नही पहुची अन्य पीडितो के समक्ष रोटी कपडा और मकान की समस्या हो
गयी है जिसके शरीर पर जो कपडे बचे थे वही बचे हुए है बाकी सब आग की भेट
चढ गया है गाव के अमबर प्रसाद रावत का सब कुछ आग की भेट चढ गया है वह
घटना के बाद से ही फुट फुट कर रो रहे है और कहते है की पिछली साल को लगी
आग का घाव अभी पूरा नही हुआ था और फिर आग लग गयी अम्बर की औरत तो अपनी
बर्बादी को बर्दशत नही कर पा रही है और रह रह कर बेहोश हो जाती है गाव की
पूर्व प्रधान मंगला देवी कहती है कि लोगो के पास कुछ भी नही बचा है फिर
घटना के 24 घण्टो के बीत जाने के बाद भी कोई सहायता नही मिल सकी ह। गाव
के दिनेश की आखे रोते रोते लाल सूर्ख हो गयी है वह घटना के बाद से वह
अपनी बरबादी पर आसू बहा रहा है इस घटना में उसके 35 हजार रूप्ये और नगदी
जेवर रखे जल कर राख हो गये है घटना के बाद से कोई अधिकारी इन पीडितो का
हाल चाल लेने नही पहुचा है लोग राख के ढेर को खोद कर अपनी जिंदगी की तलाश
कर रहे है गाव में रह रहकर रोने चिल्लाने की आवाज आ रही है पडोसी गाव के
लोग उन्हे आश्वशासन व मदद देकर उनका दर्द कम करने में जूटे हुए है। लोगो
को उम्मीद थी की मंत्री जी के आने से सहायता तत्काल मिल जायेगी लेकिन
एंेसा नही हो सका इसका मलाल सभी को है सरकारी सहायता की स्थिति दूर से
पानी पिलाने जैसी है लेखपाल की रिपोर्ट आने के बाद सहायता देने के लिये
धनराशि देने की मांग की गयी है धनराशि आने के बाद उसे नगद य चेक से नही
दिया जाये गा बल्कि उसे सीधे पीडित के खाते में भेजा जायेगा यहा पर बताते
चले कि घर के अन्य समानो के साथ बैक कीे पासबुके भी जल गयी है अगर पैसा
उनके बैक के खाते में जाता भी है तो वह पासबुक के अभाव मे वह निकाल नही
पायेगे इस बीच वह कैसी जिंदगी जियेगे इसका किसी को अभाव नही है लोग खूले
आसमान में जीवन जिने के लिये मजबूर है तहसीलदार संजय सिंह कहते है कि
धनराशि की मांग की गयी है जैसे ही धनराशि मिल जायेगी वैसे ही पीडितो को
बाट दी जायेगी।

