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पुराने तालाबो पर अतिक्रमण, नये तालाबों में नही रुक पा रहा पानी

बाराबंकी। जल संचयन का मुख्य श्रोत स
मझे जाने वाले पुराने तालाब, पोखरों पर अतिक्रमण का बोल बाला है। किसी समय हर गांव की आबादी के अंदर कई तालाब मौजूद होते थे।  जिसमें हमेशा पानी भरा रहता था। परंतु विकास के दौड़ में चल रहे समाज ने इन तालाबो को पाटकर आसियाना बना लिया है। जिससे पानी का ठहराव नही हो पाता है और बारिश का पानी नाली, नालों, नदियांे के सहारे बह जाता है। सरकार ने प्रत्येक गांवो में लाखो-करोड़ो रुपये खर्च कर नये तालाब तो जरुर खुदवाये परन्तु तालाब के चारो ओर मेड़बंदी (खाई) होने के कारण बारिश का बाहरी पानी नही आ पाता है। और तालाब में ही गिरे पानी पर निर्भर रहते है। जिसका ही कारण है कि बारिश खत्म होते ही नये तालाबो में धूल उड़ने लगती है और गांवो का पानी बहकर बरबाद हो जाता है। 

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