अप्रैल माह के अंत तक नहरो में आ जायेगा पानी
https://husainijnp.blogspot.com/2016/04/blog-post_661.html
बाराबंकी। अधिशाषी अभियंता सिचाई दीपेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में पानी की जरुरत है। वर्तमान समय में चल रही नहर बंदी के चलते किसान परेशान है तथा अप्रैल माह के अंत तक सभी नहरो में पानी छोड़ दिया जायेगा।
अपनो पर करम, गैरों पर सितम कर रहे प्रधान
राशन कार्ड सूची में हो रही घपले बाजी, ग्रामीण आक्रोशित
सिरौलीगौसपुर, बाराबंकी। ब्लाक सिरौलीगौसपुर के कई गांवों में राशन कार्डाें की सूची में नाम घटाने बढ़ाने का खेल जारी है। सूची पुनरीक्षण का कोई ज्ञात शासनादेश वर्तमान में नही है फिर भी नये चुने गये प्रधानोें व कोटेदारों के चहेते परिवारों को लाभान्वित करने के लिए नये कार्ड बनवाना जरूरी महसूस किया जा रहा है। आखिर माननीयों के विपक्ष में वोट करने वाले परिवार सुविधा पाते रहें और चहेते परिवार लाभ प्राप्त न कर सके यह कैसे हजम हो सकता है। वहीं अगर कोटेदार प्रधान जी का विपक्षी है तो वो भी सिर्फ अपने चहेते लोगों को ही लाभ देना चाह रहा है। पात्रता अपात्रता के इस खेल में माननीयों को संतुष्ट करने में ब्लाक और तहसील प्रशासन के कर्मचारी भी कोई कोर कसर छोड़ने में पीछे नही रह सकते हैं। शासनादेश, उच्चाधिकारियों का आदेश, मानवाधिकार सब को ठेंगा दिखाते हुए मात्र एक प्रार्थना पत्र, शिकायती पत्र के आधार पर सूची से नाम हटाने और बढ़ाने का खेल खेला जा रहा है। कहने को तो खाद्य सुरक्षा अधिनियम अपै्रल माह से लागू हो चुका है। कुछ शातिर कोटेदारों ने प्रधान एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के गठजोड़ से मार्च में ही कानून लागू कर दिया मनमानी परिभाषा गढ़ी और लाखों रुपये का राशन डकार गये । कोटेदारांे ने 10 वर्ष तक के बच्चों का राशन ये कह कर नही दे रहे हैं कि इनका राशन नही आया है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत पात्र गृहस्थी के चयन का मानक कोई भी हो इन माननीयों की मनमानी रोक पाने का दम न तो प्रशासन में है और नही सरकार में योजना कितनी भी अच्छी और जनहित में क्यों न हो राजनीति का दुष्प्रभाव पड़े बिना लागू हो नही सकती है। विकास खण्ड सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के तमाम ऐसे गांव हैं जहां इस तरह का खेल खेला गया जहां पर तमाम पात्र लोगों को अपात्र बना करके उनकी रोटी का निवाला अमीरों की झोली में डाल दिया गया है। यदि इस गोरखधन्धे की जांच बरीकी से की जाये तो तमाम कमियां खुल कर सामने आयेंगी।
अपनो पर करम, गैरों पर सितम कर रहे प्रधान
राशन कार्ड सूची में हो रही घपले बाजी, ग्रामीण आक्रोशित
सिरौलीगौसपुर, बाराबंकी। ब्लाक सिरौलीगौसपुर के कई गांवों में राशन कार्डाें की सूची में नाम घटाने बढ़ाने का खेल जारी है। सूची पुनरीक्षण का कोई ज्ञात शासनादेश वर्तमान में नही है फिर भी नये चुने गये प्रधानोें व कोटेदारों के चहेते परिवारों को लाभान्वित करने के लिए नये कार्ड बनवाना जरूरी महसूस किया जा रहा है। आखिर माननीयों के विपक्ष में वोट करने वाले परिवार सुविधा पाते रहें और चहेते परिवार लाभ प्राप्त न कर सके यह कैसे हजम हो सकता है। वहीं अगर कोटेदार प्रधान जी का विपक्षी है तो वो भी सिर्फ अपने चहेते लोगों को ही लाभ देना चाह रहा है। पात्रता अपात्रता के इस खेल में माननीयों को संतुष्ट करने में ब्लाक और तहसील प्रशासन के कर्मचारी भी कोई कोर कसर छोड़ने में पीछे नही रह सकते हैं। शासनादेश, उच्चाधिकारियों का आदेश, मानवाधिकार सब को ठेंगा दिखाते हुए मात्र एक प्रार्थना पत्र, शिकायती पत्र के आधार पर सूची से नाम हटाने और बढ़ाने का खेल खेला जा रहा है। कहने को तो खाद्य सुरक्षा अधिनियम अपै्रल माह से लागू हो चुका है। कुछ शातिर कोटेदारों ने प्रधान एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के गठजोड़ से मार्च में ही कानून लागू कर दिया मनमानी परिभाषा गढ़ी और लाखों रुपये का राशन डकार गये । कोटेदारांे ने 10 वर्ष तक के बच्चों का राशन ये कह कर नही दे रहे हैं कि इनका राशन नही आया है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत पात्र गृहस्थी के चयन का मानक कोई भी हो इन माननीयों की मनमानी रोक पाने का दम न तो प्रशासन में है और नही सरकार में योजना कितनी भी अच्छी और जनहित में क्यों न हो राजनीति का दुष्प्रभाव पड़े बिना लागू हो नही सकती है। विकास खण्ड सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के तमाम ऐसे गांव हैं जहां इस तरह का खेल खेला गया जहां पर तमाम पात्र लोगों को अपात्र बना करके उनकी रोटी का निवाला अमीरों की झोली में डाल दिया गया है। यदि इस गोरखधन्धे की जांच बरीकी से की जाये तो तमाम कमियां खुल कर सामने आयेंगी।

