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विशेष : बच्चों का कुपोषण बढ़ा रहा है शिशु मृत्यु दर


अजमी रिज़वी
बाराबंकी। 7 अप्रैल को दुनिया भर में विश्व स्वास्थय दिवस मनाया जाता है.
स्वास्थय से जुडे तमाम आयामों में पोषण एक महत्त्वपूर्ण पक्ष होता है और
यदि हम बाल स्वास्थय की बात करें तो ये सीधे सीधे उनके न सिर्फ स्वास्थय
बल्कि जीने की क्षमता से जुड़ता हैं. ध्यान रखने की बात है कि जीवन से दूर
हो जाने वाले शिशुओं में एक बड़ी संख्या उनकी होती है जो कुपोषित होतें
हैं. अतः पोषण जीने की क्षमता बढाने व परोक्ष रूप से मृत्यु दर में भी एक
अहम् भूमिका निभाता है, इसी कारण इस बार विश्व स्वास्थय दिवस पर हम
बच्चों के स्वास्थय व पोषण से जुडी कुछ जरूरी पहलुओं पर बात करेंगे।
उत्तर प्रदेश के 52 जिलों में कुल 60 पोषण पुनर्वास केंद्र हैं जिनमें
आये सभी बच्चों को दिन में तीन बार आहार और चार बार दूध (बोर्नविटा मिला
कर) भी दिया जाता है इसके अतिरिक्त बच्चे की इच्छानुसार उसे खाने को दिया
जा सकता है। उपरोक्त परिस्थिति से यह जाहिर होता है कि बच्चों के जीवन
में स्वास्थ्य एवं पोषण में एक गहरा सम्बन्ध है, अच्छा पोषण ही एक अच्छे
स्वास्थ्य का आधार है तथा यह एक बच्चे का मौलिक अधिकार भी है। किसी बच्चे
में पोषण का आधार उसके जन्म से पूर्व ही आरम्भ हो जाता है अर्थात यदि माँ
यदि कुपोषण से ग्रसित है। बक्शी का तालाब ब्लाक के इन्दौराबाग तहसील से
आई 21 वर्षीय ज्योति बताती हैं कि उनका 4 वर्षीय बेटा प्रिन्स जन्म से ही
कमजोर था। वह बताती हैं कि 16 साल में ही उनकी शादी हो गई और 18 साल में
गर्भ ठहर गया, वह जुड़वाँ बच्चों की माँ बनने वाली थीं परन्तु खून की कमी
होने के कारण वह बहुत कमजोर थीं और गर्भ में ही एक गर्भस्थ शिशु की मौत
हो गई दूसरे को आपरेशन द्वारा बचा तो लिया गया। बलरामपुर अस्पताल बच्चों
के डॉक्टर व एनआरसी प्रभारी, डॉक्टर हिमांशु चतुर्वेदी के रूप में
कार्यरत हैं कहते हैं “हमारी एनआरसी में ज्यादातर बच्चों में कुपोषण की
पहचान ओपीडी के दौरान ही होती है। इस सन्दर्भ में सरकार ने कई योजनाएं
लागू की है जिनमें समेकित बाल विकास कार्यक्रम  एक महत्वपूर्ण कोशिश है
जिसके द्वारा माँ एवं उसका 6 वर्ष तक के बच्चों की सेहत में सुधार हुआ
है। इस कार्यक्रम के तहत गर्भवती माँ ,धात्री माँ एवं उसके बच्चों के लिए
स्वास्थय एवं पोषण के तहत पूरक आहार तथा स्कूल पूर्व शिक्षा दिए जाने का
प्रावधान है।
अन्य कार्यक्रम जिनसे बच्चों के कुपोषण की स्तिथि पर अनुकूल प्रभाव पड़ा
है उनमें मिड डे मील योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, जन वितरण प्रणाली,
किशोरी शक्ति योजना इत्यादि सम्मिलित हैं। उपरोक्त सभी कार्यक्रम तथा
योजनाओं की गुणवक्ता, प्रभाव तथा कवरेज को बढ़ाना ही एक चुनौती है।  बच्चे
के पोषण में निवेश एक सही निर्णय है अतःसरकार और परिवार दोनों स्तर पर
सकारात्मक और सक्रिय प्रयासों की आवश्कता है।

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