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अमरनाथ बर्फानी लंगर के राष्ट्रीय अध्यक्ष का भव्य स्वागत

बाराबंकी। वर्ष 2004 से श्री अमरनाथ यात्रियों व वहां के लंगर व उसके
सेवादारों की सुरक्षा व्यवस्था जेके राज्य की पुलिस को दे दी गयी है।
जिसके बाद से अमरनाथ यात्रियों को तमाम कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा है।
सही यह है कि इस पवित्र यात्रा की सुरक्षा का भार सेना व अर्द्धसैनिक
बलों के हवाले पूर्ण रूप से कर देना चाहिए। उक्त बात सुल्तानपुर जाते समय
हैदरगढ़ में बाबा बर्फानी के भक्तों के द्वारा रोके गये श्री अमरनाथ
बर्फानी लंगर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय ठाकुर ने कही। इस मौके पर
उनका हैदरगढ़ में भव्य स्वागत किया गया।
हर-हर महादेव व जय बाबा बर्फानी के जयघोषों के बीच अमरनाथ बर्फानी लंगर
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का यहां पर आज लगभग 11 बजे काफिला पहुंचा।
भव्य स्वागत के उपरान्त स्थानीय पीडब्लूडी निरीक्षण भवन में राष्ट्रीय
अध्यक्ष श्री ठाकुर ने पत्रकार वार्ता में बेबाकी से अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि हमारे संगठन में 122 लंगर संगठन सदस्य हैं। जबकि अमरनाथ
यात्रा के दौरान छोटे बड़े मिलाकर सैकड़ों लंगर भक्तों के द्वारा लगाये
जाते हैं। उन्होंने कहा कि असलियत तो यह है कि गलत नीतियों को जन्म देकर
अमरनाथ यात्रा को प्रभावित करने के संर्कीण प्रयास किये जाते हैं।
उन्होंने कहा कि आप विचार करें कि 2012 में अमरनाथ श्राइन बोर्ड के
मुताबिक साढ़े 6 लाख पंजीकृत तीर्थ यात्रियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन
किये थे। जबकि अगर अपंजीकृत भक्तांे को जोड़ लिया जाये तो यह संख्या आठ
लाख से ऊपर थी लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि वर्ष 2015 में बोर्ड के
मुताबिक साढ़े तीन लाख शिवभक्तों ने ही बाबा बर्फानी के दरबार में माथा
टेका। विजय ठाकुर ने कहा कि 2004 से जम्मू काश्मीर की स्टेट पुलिस को इस
यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था का भार दे दिया गया और इसी के बाद सुरक्षा के
नाम पर दुर्व्यवहार शुरू हो गया। वर्ष 2014 में नौ लंगरों को तोड़ा गया,
125 गैस सिलेण्डर लूटे गये लेकिन न तो जम्मू काश्मीर सरकार ने कोई तवज्जो
दी और न ही अपने आपको हिन्दुत्व का अलमबरदार मानने वाली केन्द्र की मोदी
सरकार ने इसकी शुधि ली। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा सेना सुरक्षा बल
के हवाले की जानी चाहिए।
अमरनाथ बर्फानी लंगर संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री राजन गुप्ता ने कहा कि
वर्तमान में लंगर में काम करने वाले सेवादारों के पुलिस वेरीफिकेशन के
नियम को लाद दिया गया है जो कि पूर्णतया अव्यवहारिक है। हमारे संगठन ने
इस मामले को जम्मू काश्मीर के उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह तक पहुंचाया है।
हम इसे व्यवहारिक बनाने की बात पर अडिग हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू
काश्मीर की सरकार को न तो पहले अमरनाथ यात्रा व यात्रियों से हमदर्दी थी
और न ही यह आज नजर आती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बाते
करना अलग बात है और हिन्दुत्व के हिसाब से काम करना अलग बात है। इस दौरान
सबलो के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व दिल्ली से विधायक महेन्द्र गोयल ने भी
अपनी बात रखी। सुल्तानपुर एक निजी कार्यक्रम में जा रहे राष्ट्रीय
अध्यक्ष का श्री बर्फानेश्वर महादेव सेवा समिति के प्रधान कैलाश शर्मा व
संगठन के सचिव तथा सामाजिक कार्यकर्ता केके द्विवेदी राजू भैया की अगुवाई
में उनका भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर स्थानीय प्रमुख शिवभक्त
रामचन्द्र साहू ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप
से सुरेन्द्र यादव, नीरज, सुशील मिश्रा, भरतलाल सिंह, गनेश अग्रवाल,
राजीव द्विवेदी, राजेन्द्र प्रसाद, साहबदीन यादव, संजू कुमार, रामू
द्विवेदी, सिब्बू सैनी, मल्हू गुप्ता, विकास पाण्डेय, दिनेश सिंह, मुन्ना
सिंह, पियुष मिश्रा, हरीश गुप्ता, दिनेश कश्यप, श्रीराम वैश्य, प्रदीप
तिवारी, सुरेन्द्र यादव सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
अस्तित्व मिटने की कगार पर पहुंची ’शराही झील’
रामसनेहीघाट बाराबंकी। कभी प्रदेश ही नही देश भर में प्रवासी विदेशी
पंक्षियों के लिए मशहूर शराही झील का अस्तित्व मिटने की कगार पर पहुंच
चुका है। करीब ढ़ाई सौ वीघे में फैली इस झील में अब नाम मात्र की झील रह
गई है। काफी हिस्से में कई लोगो ने अपने अपने खेत बना लिये है लेकिन
प्रशासन इस ओर से पूरी तरह से अन्जान है। मालूम हो कि तहसील रामसनेहीघाट
टिकैतनगर मार्ग पर शराही गांव के निकट करीब 250 कच्चे बीघे के क्षेत्रफल
में यह झील फैली हुई थी, इसी झील में सराही गांव का 11.890 बन स्थानो से
यहां पर शिकारी आते थे। जानकारी के अनुसार साई वेरिया से साईवेरिया,
सारस, लार्ज, कारमोरेट, काटन, टाल, पेल, कार्ल, भाईजिल ब्लेक, इनग्रेट,
पेन्किल, स्टारकूट आदि पक्षी अक्टूबर माह में यहां आते थे तथा रूक कर
प्रवास के उपरान्त अंडे देते थे तथा छःमाह बाद मार्च माह में साईवेरिया
वापस चले जाते थे। लेकिन मौजूदा समय में झील नाम मात्र की ही रह गई है
लगातार झील के क्षेत्र फल में कमी आने से प्रवासी पक्षियो का भी यहां पर
आना बंद हो गया है। झील चार पांच वर्ष से कुछ ज्यादा ही प्रभावित हुई है
तथा सूखती जा रही झील से वातावरण भी प्रभावित हुआ है जहां कभी ढाई सौ
बीघे में फैली झील अब दस बीघे में झील का पानी नजर नही आ रहा है नहर पास
होने के बाद भी झील सूखती जा रही है। आस पास के लोग झील के क्षेत्र फल को
अपने कब्जे में लेकर उसमें अनाज पैदा कर रहे है। बनगांवा का जितना भी
क्षेत्रफल झील में आता था उसमें हमेशा पानी भरा रहता था लेकिन अब पानी का
नामो निसान नही दिखाई देता है। लोगो द्वारा झील पर अवैध तरीके से कब्जा
कर लेने से शराही झील का अस्तित्व खतरे में नजर आने लगा है अगर जल्द ही
इस झील पर प्रशासनिक अधिकारियों ने ध्यान नही दिया तो वह दिन दूर नही जब
इस झील का नामो निशान मिट जायेगा। यही नही कुछ लोगो द्वारा सरकारी भूमि
पर कब्जा करने की नीयत सी बन गई है चाहे वह तालाब हो या फिर बंजर,
खलिहान, चारागाह लोग स्थानीय प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते
सरकारी जमीन पर अपना कब्जा जमाये हुए है कभ्ी कभार जब कोई विवाद की स्थित
पैदा होती है तो हल्का लेखपाल व तहसील प्रशासन मौके पर पहुंच कर अपने
कर्तब्यों की इतिश्री कर लेता है लेकिन कोई ठोस कार्यवाही सरकारी भूमि पर
कब्जा करने वालो न होने से उनके हौसले बुलद रहते है यही कारण है कि लोग
सरकारी बंदर घुडकियों को नही डरते है।

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