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महिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला

बाराबंकी। जिला अस्पताल में दवा व्यवस्था ध्वस्त, डाक्टर हुए दूसरे काम में व्यस्त, मरीज को नही रेस्ट। जिला अस्पताल की व्यवस्था  दिन ब दिन ध्वस्त होती जा रही हैं। पहले पैथोलॉजी में जांच बंद हुई और करीब डेढ़ माह से 35 जीवन रक्षक दवांए खत्म हो गयी है। गंभीर बीमारी वाले मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की पर्ची दी जाती है। फरसूमाइड, एसीक्लोफ्ेनिक, पैरासीटामॉल सीरप, रेंटेडिन टेबलेट, ओमप्राजोल कैप्सूल समेत करीब 35 जीवन रक्षक दवाएं ऐसी है। जो अस्पताल में नही है। जिला अस्पताल में एंटीबायोटिक दवाओं के नाम पर मरीजों को महज सेप्ट्रान टेबलेट दी जा रही है। इसके अलावा अस्पताल प्रशासन के पास कोई और एंटीबायोटिक दवा नही है। इससे भी ज्यादा महिला चिकित्सालय की व्यवस्था ध्वस्त है। वहां पर बच्चे के जन्म से पहले कास्टाल तेल दिया जाता है। लेकिन अस्पताल में न होने के कारण कोई आवश्यकता नही समझते। डाक्टर मरीज से कहते है कि दवा लिखकर नही देंगे लाना हो तो ले आओ। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही जच्चा-बच्चा को झेलना पड़ता है।

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