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बनीकोडर सीएचसी में पेयजल की संकट को लेकर मरीज व तीमारदारों में आक्रोश

 बाराबंकी। सरकार के लाख कोशिशों के बाद भी क्षेत्र के मरीजो को जहां बनीकोडर में चिकित्सीय सुबिधाओं का समुचित लाभ नही मिल पा रहा है। वहीं यहां पर पेयजल संकट की भारी समस्या है जिससे मरीजो को शुद्व जल पीने के लिए नही मिल पा रहा है। जहां यहां पर लगे नल खराब है तो वही यहां पर लगा शीतल जल देने के लिए फ्रीजर शो पीस बना हुआ है। सीएचसी बनीकोडर में करीब एक दर्जन चिकित्सको की तैनाती होने के बाद भी मंगलवार को मात्र दो चिकित्सकों के सहारे यहां पर आने वाली मरीजो का उपचार किया गया वही बुधवार को भी आधा दर्जन से भी अधिक चिकित्सक अस्पतला से नदारत रहे। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनीकोडर इस समय बदहाली का शिकार होता जा रहा है यहां पर सरकार की ओर से करीब 1 दर्जन चिकित्सकों की तैनाती भारी भरकम वेतन देकर की गई है। लेकिन डाक्टरो की मनमानी यहां पर पूरी तहर से कायम है अधिकारियों का खौफ यहां पर तैनात चिकित्सकों पर से हट गया है। यहां पर तैनात डाक्टरो का अस्पताल न तो आने का समय तय है और न ही जाने का चिकित्सको की लापरवाही के चलते मरीजो को मजबूरी में झोला छाप डाक्टरो की शरण में जाना पड रहा है। अगर देखा जाय तो यहां पर करीब 1 दर्जन चिकित्सकों की तैनाती है। लेकिन ज्यादातर चिकित्सक अस्पताल से गायब रहते है। मंगलवार को अस्पताल की स्थित काफी खराब थी और मात्र दो चिकित्सको के सहारे ही यह अस्पताल चलता रहा। सबसे ज्यादा समस्या यहां पर आने वाली महिला मरीजो को होती है यहां पर महिलाओं के उपचार के लिए डां नगमा, डा. रूपाली, डा. अंकिता की तैनाती की गई है जहां डा. रूपाली इस समय अस्पताल नही आ रही है वही डा. नगमा की कार्यशैली महिला मरीजो पर भारी पड रही महिला मरीज डा. अंकिता से अपना उपचार करा रही है लेकिन वह भी मंगलवार को अस्पताल से गायब रही जिससे महिलाओं को झोलाछाप की शरण में जाना पडा। मंगलवार के जैसा नजारा बुधवार को एक बार फिर देखने को मिला बुधवार को अस्पताल डा. नगमा, डा. रूपाली, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की डा. वंदना डा. आसिफ, नेत्र सहायक अनिल भारती, डा. जायस करौली जहां अस्पताल से नदारत रहे वही डा. मनोज आर्या करीब 11 बजे व डा. अंकिता करीब साढे नौ बजे अस्पताल पहुंचे। महिलाओं के उपचार में महिला डा. नगमा द्वारा की जाने वाली लापरवाही व अभद्र व्यवहार की चर्चा आम बात हो गई है। मंगलवार को सीएचसी बनीकोडर का हाल जाना तो मुफ्त में एक रूपये के पर्चे पर मुख्यमत्री द्वारा उपचार मुहैया कराने का देखा गया सपना तार तार होता दिखा। सीएचसी बनीकोडर में तैनात महिला डा. नगमा की मनमानी थमने का नाम नही ले रही है देर से आना व जल्दी जाना इनकी फितरत में सुमार है साथ ही इनके द्वारा मरीजों से अभद्र व्यहार की चर्चा आये दिन चर्चा का विषय बनी रहती है। यहां पर महिला मरीजों के उपचार के लिए पहले यहां पर महिला सर्जन आशा आर्या तैनात थी थोडे समय बाद उनका स्थानान्तरण कर दिया गया तब महिलाओं के उपचार की जिम्मेदारी डा. अंकिता सिंह व डा. नगमा आ गई लेकिन यहां पर तैनात डा. नगमा पूरी तरह से मनमानी पर उतारू होकर सरकार के निर्देशो की खिल्ली उडा रही है। अक्सर अस्पताल में देर से आना और जल्द चले जाना इनकी नीयत बन गई है तथा मरीजो के उपचार में लापरवाही व अभद्र व्यवहार की चर्चा आम बात हो गई है। बुधवार को एक बार फिर देखने को मिला बुधवार को अस्पताल डा. नगमा, डा. रूपाली, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की डा. वंदना डा. आसिफ, नेत्र सहायक अनिल भारती, डा. जायस करौली जहां अस्पताल से नदारत रहे वही डा. मनोज आर्या करीब 11 बजे व डा. अंकिता करीब साढे नौ बजे अस्पताल पहुंचे। सीएचसी बनीकोडर में जहां स्वास्थ्य सेवाये चिकित्सको की मनमानी के चलते बदहाली का शिकार है तो वही यहां पर मरीजो के लिए पेय जल संकट एक मुशीबत से कम नही है। यहां पर तीन हैंड पम्प लगे है लेकिन किसी भी नल का पानी पीने योग्य नही है अस्पताल के मेन गेट पर लगा इंडिया मार्का हैंड पम्प लम्बे समय से खराब है काफी समय तक उसे चलाने के बाद उससे जो पानी निलकता है वह पीने योग्य नही है अन्य नल भी अपनी कहानी दूर से ही बताते नजर आते है। यहां पर सरकारी ओर से अस्पतताल आने वाले मरीजों को शुद्व शीतल पेय जल उपलब्ध कराने के लिए एक फ्रीजर मशीन की व्यवस्था की गई थी जो आज अपना अस्तित्व खो चुकी है। इसके बारे में सूत्र बताते है। कि इनमें लगा मोटर व इस्टेप्लाइजर को एक अस्पताल का ही कर्मी खोल कर अपने घर ले गया जिससे यह पूरी तरह से निष्प्रयोज शाबित हो रही है। अधीक्षक एसबी सिंह का कहना है जबसे उन्होने यहां का कार्य भार सम्भाला है यह इसी हालात में थी इसे अतिशीघ्र ठीक करा दिया जायेगा।

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