अल्लाह ने दुनिया में पैगाम देने के लिये नबियों का सहारा लिया: मौलाना कौसर
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बाराबंकी। हर चीज का मालिक, कुल जहान का चलाने वाला एक ही है, जिसे कोई
अल्लाह कहता है कोई ईश्वर कहता है और कोई गॉड कहता है, जब से दुनिया बनी
शुरू से उसका दस्तूर है कि वह अपने तमाम कामो मे किसी न किसी को जरिया
बनाता है। यह बाते हजरतपुर बदोसराय स्थित बड़ी हवेली के इमामबाड़े मे
वरिष्ट काग्रेसी नेता जुल्फी मियॉ की वालिदा मरहूमा की बरसी की इसाले
सवाब की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सैय्यद कौसर रजा रिज़वी हजरतपुरी
ने कही, उन्होने आगे कहा कि लेकिन इसका ये मतलब नही कि वह जरिये का
मोहताज है बल्कि जो जरिया बन रहा है उसके लिये यह शरफ है कि अल्लाह ने
अपना काम उससे लिया जैसे अम्बिया जो इस दुनिया मे इलाही पैगाम देने के
लिये और लोगो की मदद करने के लिये इस दुनिया मे आये और उन्होने अपनी पूरी
जिन्दगी खुदा की इताअत मे और उसका पैगाम पहुचाने मे और उसकी मखलूक के
फायदे के लिये जिन्दगी गुजारी, यह नबियो का सिलसिला बहुत तवील है 1 लाख
24 हजार नबी गुजरे जिनके अलग अलग दर्जे और दर्जाे के हिसाब से उनकी
जिम्मेदारी है, इनमे सबसे बड़ा रूतबा हमारे आखिरी नबी स.व. को हासिल है
जिन्होने 63 साल की जिन्दगी मे वह काम किये जो दूसरे न कर सके,यह न होते
तो सारे नबियो की कारगुजारिया ज़ाया हो जाती हमारे नबी स.व. ने सारे नबियो
के पैगाम को बचा लिया आखिरी नबी स.व. के बाद यही काम इमाम ने किया और
कयामत तक के लिये मज़हबे इन्सानियत यानी इसलाम को बचा लिया जो सारे नबियो
की नबूवतो को बचाये उसे मोहम्मदे मुस्तफा स.व. कहते है और जो कर्बला मे
एक दिन मे तमाम नबियो की खिजमात को बचा ले उसे सैय्यदुस शोहदा इमाम हुसैन
कहते है, मौलाना ने आखिर मे जनाबे सकीना के मसाएब बयान किये, इससे पहले
मजलिस की शुरूआत तिलावते कलामे पाक से हुई, जिसके बाद शायरे अहलेबैत अफसर
किन्तूरी, तौसीफ हजरतपुरी, कुमैल किन्तूरी, और अली मूसा हजरतपुरी ने अपने
अपने कलाम पेश किये, मजलिस के दौरान तहजीब असकरी, अकील मियॉ, निहाल मियॉ,
असद, मीसम, शन्नू खॉ, रियाज खॉ, रईस खान, मौलवी शुएब अंसारी, जमाल खान,
शफीक राईन, कैलाश दिवेदी, राम नारायण सिंह, सहित बड़ी तादात मे लोग मौजूद
थे। प्रोग्राम के खत्म होने पर जुल्फी मियॉ ने आये हुए सभी लोगो का
शुक्रिया अदा किया।

