अपनी वीरता के लिये जाने जाते हैं महाराणा प्रताप: आरपी
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बाराबंकी। पूरे जिले में आज महाराणा प्रताप की जयंती धूमधाम से मनायी
गयी। कई स्थानों पर गोष्ठी का आयोजन किया गया और उनके जीवन के बारे में
चर्चा की गयी। जबकि जीतनगर स्थित हिन्दू जागरण मंच की बंकी नगर इकाई
द्वारा राजपूताना सम्राट महाराणा प्रताप की 477वीं जयंती के अवसर पर
विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए
नगर महासचिव आरपी सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप राजपूत कालीन इतिहास का
ऐसा विशिष्ट नाम है। जो न केवल अपनी वीरता, शौर्य एवं उत्कृष्ट जिजीविषा
के लिए जाने जाते हैं। अपितु वह राष्ट्रीयता का जीवन्त प्रतिमान बन चुके
हैं। महाराणा प्रताप मेवाड़ के सिसोदिया वंश के होने के कारण जीवन पर्यन्त
अपने पूर्वजों की भांति मुगल सत्ता एवं उसकी साम्राज्यवादी नीति का विरोध
करते रहे। राणा सांगा पर प्रकाश डालते हुए नगर अध्यक्ष कृपाशंकर तिवारी
ने कहा कि मुगलों से विरोध का सिलसिला राणा सांगा के साथ प्रारम्भ हुआ जो
कि महाराणा प्रताप के समय चरम पर पहुँच गया था। राणा प्रताप एवं अकबर के
मध्य टकराहट का प्रमुख कारण बाज बहादुर था जो अकबर का शत्रु था जिसे राणा
सांगा ने शरण दे रखी थी। वालीबाल संघ के प्रदेशीय संयुक्त सचिव रामपाल
सिंह ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उदय सिंह की मृत्यु के पश्चात्
उनका पुत्र प्रताप सिंह गद्दी पर बैठा। गद्दी पर बैठते ही अपने पिता के
अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए शपथ लिया कि जब तक अपनी राजधानी और किले
को मुगलों की अधीनता से मुक्त नहीं करा लंेगे तब तक न तो थाली में रोटी
खायेंगे और न ही बिस्तर पर सोयेंगे। युद्ध के दौरान राणा प्रताप को
विभिन्न स्थानों पर छिपकर रहना पड़ा परन्तु राणा ने अपना संघर्ष जारी रखा।
मेवाड़ एवं राणा प्रताप का मुगलों से युद्ध राजस्थान के इतिहास की ही नहीं
अपितु भारत के इतिहास की गाथा है। इस अवसर पर राघवेन्द्र प्रताप सिंह,
मोलई सिंह, लल्लन सिंह, गंगाशरण सिंह, संदीप सिंह, सौरभ सिंह, अतुल सिंह,
विनय सिंह, गणेश शंकर सोनी, कमलाकान्त पाण्डेय, आशुतोष दीक्षित, राधा
सिंह, राजकुमारी सिंह, मीना सिंह, रोली सिंह, प्रतिमा सिंह आदि उपस्थित
थे।

