गांधी भवन में समाजवादी चिंतक मुधलिमये को दी गयी श्रद्धांजलि
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। गांधी भवन में जनसमता समिति द्वारा देश के महान समाजवादी नेता,
चिंतक, स्वतंत्रता सेनानी और गोवा मुक्ति संग्राम के महानायक स्व.
मधुलिमये की 95वीं जयंती पर आयोजित ’’सार्वजनिक जीवन में नैतिकता’’ विषयक
संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल
हुए नई दिल्ली के मैक्स हास्पिटल के वरिष्ठ सर्जन डा. अखिलेश यादव ने
विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज में सार्वजनिक जीवन में नैतिकता का
अभाव हो गया है। वर्तमान समाज में न तो समाजवाद को जीवन का आधार मानकर
जीने वाले लोग बचे हैं और न ही आने वाली पीढियां समाजवादी दर्शन से कुछ
सीखना चाहती हैं। ऐसे में समाजवादी दर्शन का जो स्वरूप प्रस्तुत किया जा
रहा है, उससे समाजवाद के पुरोधाओं के विचारों को बहुत हानि पहुंच रही है।
जो देश व समाज के लिए घातक है। श्री यादव ने वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली
द्वारा भेजे गए श्रद्धांजलि पत्र को पढ़कर सुनाया। उन्होनें कहा कि जिस
प्रकार मधुलिमये ने अपना जीवन समाज को समर्पित करके जिया। ठीक उसी प्रकार
हमें अपने जीवन में बदलाव लाते हुए मधुलिमये के विचारों का अनुसरण करना
चाहिए। यह विचार एक पौध के रूप में पुनः रोपित करना होगा, जिससे समाजवाद
को बढावा मिलेगा।
इससे पहले संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि डा. अखिलेश यादव, कार्यक्रम
अध्यक्ष सरदार जगजीत सिंह, संयोजक राजनाथ शर्मा ने स्व. मधुलिमये के
चित्र पर मार्ल्यापण करके किया। इस दौरान डा. अखिलेश यादव को समिति की ओर
से अंगवस्त्र प्रदान कर उनका अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने बताया कि मेरी 50 के दशक में
मधु जी से पहली मुलाकात हुई। उस समय मेरे पिता स्व गोकुल प्रसाद शर्मा ने
मेरे गांव नसीपुर में तीन दिवसीय समाजवादी प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया
था। तब मेरी मुलाकात मधुलिमये, राजनारायण, मामा बालेश्वर दयाल सहित कई
बड़े समाजवादियों नेताओं से हुई। पहली मुलाकात से लेकर उनके जीवन काल के
अन्तिम दिनों तक मुझे उनका सानिध्य प्राप्त रहा। मधुजी उदार व्यक्तित्व,
विनम्र स्वभाव के स्पष्टवादी व्यक्ति थे। जिन्होने नैतिकता को अपने जीवन
का आधार बनाया। वह एक ऐसे समाजवादी थे जिनके नाम न तो कोई बैंक खाता है,
और न ही कोई चल अचल सम्पत्ति।
गोष्ठी की अध्यक्षता वयोवृद्ध समाजवादी नेता सरदार जगजीत सिंह तथा
संचालन सपा नेता हुमायंू नईम खान ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से विनय
कुमार सिंह, मृत्युन्जय शर्मा, अशोक शुक्ला, सईद अंसारी, मूसा खान अशांत,
शिवा शर्मा, सुमंगल दीप त्रिवेदी, मो. अतहर, राजकुमार पाण्डेय, पाटेश्वरी
प्रसाद, फराज अहमद खां, विनोद भारती, विजय कुमार सिंह, अनुपम सिंह राठौर,
बबलू खान, विशाल मिश्रा, अजय सिंह, शमीम वारसी, उपेन्द्र सिंह रावत,
अब्दुल रहमान, ललित अवस्थी, विजय श्रीवास्तव, सितवत अली, कलाझर यादव,
अमित चौधरी, सूरज शर्मा, रोशन कश्यप, पवन प्रजापति, फहीम सिद्दीकी,
वर्द्धमान जैन, नीरज दुबे, मनोज पाठक, श्रीनिवास त्रिपाठी, भागीरथ गौतम,
प्रवेश मिश्रा सहित कई लोग मौजूद रहे।
वि.स. अध्यक्ष के न आने पर जारी हुआ निन्दा प्रस्ताव
बाराबंकी। मुख्य अतिथि के रूप में समय निर्धारित करने के बावजूद विचार
गोष्ठी में उपस्थित न होने पर विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय के
विरोध में संयोजक राजनाथ शर्मा ने निन्दा प्रस्ताव रखा। जिसका उपस्थित
लोगों ने पुरजोर सर्मथन किया। साथ ही कड़ी आलोचना भी की। श्री शर्मा ने
प्रस्ताव के माध्यम से सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से यह मांग की है कि
पुरोधा स्व. मधुलिमये के चरित्र, आचरण, संघर्ष एवं व्यक्तित्व का अपमान
करने वाले विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय सार्वजनिक रूप से खेद
व्यक्त करें।
