नंद के आनन्द भयो जै कन्हैया लाल...
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बाराबंकी। जब जब धरती पर दुष्टो का अत्याचार बढा है तब तब
भगवान ने किसी न किसी रूप मे अवतार लेकर धरती पर आना पडा है। चाहे वह राम
के रूप में हो या कृष्ण के रूप में। भगवान कृष्ण का जन्म होने के बाद नंद
के आनन्द भयो जै कन्हैया लाल के मधुर गीत पर कथा स्थल पर बैठे श्रोता
अपने आप को रोक नही सके और कथा स्थल पर जमकर झूमे। यह बाते तहसील क्षेत्र
के टडिया मजरे महुलारा में सूरदास घनश्याम मिश्र के यहां पर चल रही सात
दिवसीय श्रीमदभागवत कथा महापुराण के तीसरे दिन पूरे शुक्लान हथौंधा से
पधारे व्यास वक्ता पंडित शिवकैलाश शुक्ल ने कही। उन्होने भगवान कृष्ण के
जन्म की मनमोहक लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि जब कंस ने अपने चचेरी
बहन द्रोपदी का विवाह धूम धाम से वसुदेव जी के साथ किया लेकिन विवाह के
बाद जब उसे मालूम हो कि देवकी की आठवी संतान से उसकी मृत्यू होगी। तब कंस
ने देवकी की सभी संतानो को मारने का निर्णय ले लिया कंस ने देवकी की 6
संतानो का वध कर दिया लेकिन वह सातवी व आठवी संतान का वध नही कर सका।
भगवान कृष्ण का जन्म होते ही कथा स्थल पर मौजूद श्रोताओं ने आतिशबाजी कर
भगवान का जनमोत्सव मनाया। इस दौरान गांव सहित क्षेत्र के सैकडो श्रोता
मौजूद रहे।

