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जौनपुर के साहित्यकार के पुत्र लंदन में किये गये सम्मानित

जौनपुर। हिन्दी भवन संचालन समिति के अध्यक्ष एवं साहित्यकार अजय कुमार के सुपुत्र अपल सिंह को लंदन में अवार्ड आफ ऐक्सीलेंस प्रदान किया गया। यूके की संस्था गिल्ड आफ टेलीविजन कैमरामैन का यह प्रतिष्ठित सम्मान कैमरा क्षेत्र में दिये जाने वाले सबसे बड़े अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारों में एक है। अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के सिनेमैटोग्राफर अपल सिंह को वर्ष 2016 हेतु अवार्ड आफ ऐक्सीलेंस का सम्मान 2015 में बनी डाक्यूमेन्ट्रीय इंडियाज फ्रंटीयर रेलवेज-द लास्ट ट्रेन टू नेपाल के लिये प्रदान किया गया। इस पुरस्कार के लिये दुनिया भर से आधा दर्जन डाक्यूमेन्ट्री फिल्मों को शार्ट लिस्ट किया गया था। यह डाक्यूमेन्ट्री बीबीसी फोर के लिये बनी थी। बीबीसी ने यह डाक्यूमेन्ट्री भारत के सीमावर्ती कस्बे जयनगर (बिहार) व नेपाल के जनकपुर के बीच चलने वाले ट्रेन पर बनायी है। इसमें अपल सिंह ने मुख्य कैमरामैन की भूमिका निभायी है। अपल अब तक डाक्यूमेन्ट्री के क्षेत्र में 40 से अधिक देशों में काम कर चुके हैं। वे बीबीसी, डिस्कवरी, नेशनल ज्योग्राफिक चैनल, एबीसी जैसे संस्थानों के साथ लगातार काम कर रहे हैं। दालॉस्ट ट्रेन टू नेपाल में दिखायी गयी ट्रेन दोनों देशों की सीमा पर रहने वाले लोगों की लाइफ लाइन थी। वर्ष 1932 में अंग्रेजों द्वारा चलायी गयी यह ट्रेन 2014 में घाटे के चलते बन्द हो गयी। आजादी के बाद मुख्य रूप से मण्डी व्यापारी व आम लोग इसका उपयोग करते थे। जयनगर (बिहार) व जनकपुर (नेपाल) के बीच चलने वाली इस ट्रेन को चलाने के लिये नेपाल सरकार ने पैसा देना पहले ही बन्द कर दिया था लेकिन इस दुर्गम मार्ग पर विकल्प के अभाव में व्यापारियों द्वारा की जा रही फण्डिंग पर यह ट्रेन वर्षों चली। किराये और माल भाड़े से इस ट्रेन का डीजल, रख-रखाव का खर्च, रेलकर्मियों के वेतन आदि की व्यवस्था होती थी। खास बात यह भी है कि यह नेपाल जैसे देश की पहली और आखिरी ट्रेन थी।

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