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’किसान और राष्ट्रवाद’ विषयक पर गोष्ठी आयोजित

बाराबंकी। किसान देश का वास्तविक मालिक है और सच्चा राष्ट्रवादी उसी को
कहा जाना चाहिए। जो हुकुमते किसानों की हित की बात करे वहीं देश भक्त
कहलाने के लायक है और जो उनके लिए कुचक रचे वो देश द्रोही है। अखिल
भारतीय किसान सभा द्वारा रविवार को गांधी भवन में ‘किसान और राष्ट्रवाद’
विषयक गोष्ठी पर अपने सम्बोधन में उक्त विचार सुप्रसिद्ध मजदूर नेता
रामकृष्ण ने रखे। उन्होने कहा कि इस देश की विडम्बना यह है कि अल्पसख्यक
पंूजीपति बहुसंख्यक जनमानस का शोषण दोहन करके राज कर रहे है। सरकार चाहे
कांग्रेस की हो या भाजपा की हो नीतियां उद्योगपतियों को लाभान्वित करने
तथा किसानों का दर्द बढाने के लिए बनायी जाती है। उन्होंने कहा कि कम्पनी
एक्ट व इन्कम टैक्स एक्ट में बदलाव की जरूरत है क्योंकि इनमें दोहरी
कानूनी व्यवस्था है। उ.प्र. अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व
एमएलसी गयासुद्दीन किदवई ने कहा कि आज देश में दो तरह के किसान पाये जाते
है एक वह जो खेतोें में अपना पसीना बहाकर दो वक्त की रोटी अपने परिवार के
लिए जुटाते है, दूसरे वो सरमाएदार जो अपने काले धन को सफेद करने के
उद्देश्य से काश्तकार बन रहे है। ऐसे लोगों के विरूद्ध जनता को जनआन्दोलन
चलाना चाहिए। रिहाई मंच के अध्यक्ष मो. शुऐब एडवोकेट ने सम्बोधित करते
हुए कहा कि आज देश में राष्ट्रवाद शब्द का दुर्प्रयोग किया जा रहा है।
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश कुमार दीक्षित ने कहा कि
आरएसएस ने बड़ी होशियारी से पूरे देश में नफरत का माहौल तैयार कर दिया है
और तथाकथित देश भक्ति व राष्ट्र प्रेम के नाम पर ऐसे-ऐसे मुद्दे उठाये जा
रहे हैं। गोष्ठी को सपा नेता हुमायू नईम खां, बृजमोहन वर्मा, रणधीर सिंह
सुमन, मौलाना व डा. तस्खीर उल हसन, ने सम्बोधित किया। इस मौके पर
पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, नीरज वर्मा, विनय कुमार सिंह, राम नरेश, गिरीश
चन्द्र, मो. कदीर, इमतियाज अली, अमर सिंह आदि उपस्थित थे।

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