हुस्न, इश्क और अजमते इन्सानी के शायर थे फिराक़ गोरखपुरी
https://husainijnp.blogspot.com/2016/05/blog-post_679.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। फिराक़ गोरखपुरी बुनियादी तौर पर गज़ल के शायर थे और गजल असल मे
हुस्न व इश्क की शायरी है। इस लिहाज से फिराक भी हुस्न व इश्क के शायर
थे। उक्त विचार कौमी काउन्सिल बराय फरोग उर्दू जबान नई दिल्ली द्वारा
प्रयोजित एवं किरन महिला विकास समिति लखपेड़ाबाग कालोनी बाराबंकी द्वारा
आयोजित एक दिवसीय सेमिनार ’हुस्न, इश्क व अजमते इन्सानी का शायर फिराक
गोरखपुरी को सम्बोधित करते हुए लखनऊ से तसरीफ लाये मशहूर शायर मो. अनवार
लखनवी ने फयूचर ब्राइट एकेडमी स्कूल शान्तिपुरम में व्यक्त किया।
उन्होंने आगे कहा कि फिराक ने अपने शेर मे जहॉ मीर व गालिब को अपना हमनवॉ
बताया है। वही इसका इजहार किया है कि मीर व गालिब के जमाने मे जो हालाते
जिन्दी थे वो अब बदल चुके है। समाज ने एक नई करवट ली है। जिससे नए माशरे
का जन्म हुआ है। जो नये माशरो के तकाजे से मुख्तलिफ है। शहर के जाने माने
शायर व नाजिम शमीम बाराबंकवी ने कहा कि उनका हुस्न व इश्क आम हुस्न व
इश्क से कही ज्यादा बुलन्द व हुस्न व जमाल ने कायनात की रंगीनिया देखते
है और जब शायर इन बुलन्दियों तक पहुंच जाता है। तो उसके अशआर मे वह
शीरीनी और गहराई पैदा हो जाती है। जो हुस्न की दुनियावी और सतही निंगाह
से देखने वाले शायरों के यहॉ पैदा नही हो सकती। सेमिनार की अध्यक्षता
समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल व संचालन समीम बाराबंकी ने
किया अन्त मे समिति के सचिव किरन तिवारी ने आये हुए अतिथियों का आभार
प्रकट किया। सेमिनार मे शमीम बानो, फिरदौस जहॉ, शबाना शहबाज, इशरत जहॉ,
कुलदीप सिंह, मास्टर दिनेश सिंह, नूरसबा, मो. रेहान सहित बड़ी संख्या मे
छात्र-छात्राएॅ उपस्थित रहीं।
बाराबंकी। फिराक़ गोरखपुरी बुनियादी तौर पर गज़ल के शायर थे और गजल असल मे
हुस्न व इश्क की शायरी है। इस लिहाज से फिराक भी हुस्न व इश्क के शायर
थे। उक्त विचार कौमी काउन्सिल बराय फरोग उर्दू जबान नई दिल्ली द्वारा
प्रयोजित एवं किरन महिला विकास समिति लखपेड़ाबाग कालोनी बाराबंकी द्वारा
आयोजित एक दिवसीय सेमिनार ’हुस्न, इश्क व अजमते इन्सानी का शायर फिराक
गोरखपुरी को सम्बोधित करते हुए लखनऊ से तसरीफ लाये मशहूर शायर मो. अनवार
लखनवी ने फयूचर ब्राइट एकेडमी स्कूल शान्तिपुरम में व्यक्त किया।
उन्होंने आगे कहा कि फिराक ने अपने शेर मे जहॉ मीर व गालिब को अपना हमनवॉ
बताया है। वही इसका इजहार किया है कि मीर व गालिब के जमाने मे जो हालाते
जिन्दी थे वो अब बदल चुके है। समाज ने एक नई करवट ली है। जिससे नए माशरे
का जन्म हुआ है। जो नये माशरो के तकाजे से मुख्तलिफ है। शहर के जाने माने
शायर व नाजिम शमीम बाराबंकवी ने कहा कि उनका हुस्न व इश्क आम हुस्न व
इश्क से कही ज्यादा बुलन्द व हुस्न व जमाल ने कायनात की रंगीनिया देखते
है और जब शायर इन बुलन्दियों तक पहुंच जाता है। तो उसके अशआर मे वह
शीरीनी और गहराई पैदा हो जाती है। जो हुस्न की दुनियावी और सतही निंगाह
से देखने वाले शायरों के यहॉ पैदा नही हो सकती। सेमिनार की अध्यक्षता
समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल व संचालन समीम बाराबंकी ने
किया अन्त मे समिति के सचिव किरन तिवारी ने आये हुए अतिथियों का आभार
प्रकट किया। सेमिनार मे शमीम बानो, फिरदौस जहॉ, शबाना शहबाज, इशरत जहॉ,
कुलदीप सिंह, मास्टर दिनेश सिंह, नूरसबा, मो. रेहान सहित बड़ी संख्या मे
छात्र-छात्राएॅ उपस्थित रहीं।

