अधिवक्तओं से अभद्र व्यवहार पर दूसरे दिन भी कार्य बहिष्कार जारी
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हैदरगढ़, बाराबंकी। उपनिबन्धक कार्यालय हैदरगढ़ से बकाया वसूली को लेकर हुए
विवाद में राजस्व अमीन सर्वेश कुमार व समर बहादुर सहित अन्य आरोपियों पर
कार्यवाही न होने और क्षेत्राधिकारी हैदरगढ़ द्वारा अधिवक्तओं से अभद्र
व्यवहार करने के कारण एवं एक पक्षीय कार्यवाही किये जाने से नाराज
अधिवक्ताओं द्वारा दूसरे दिन भी कार्य बहिष्कार जारी रहा। मालूम हो कि कल
दोपहर बकाये दार तेज बहादुर निवासी दांदूपुर उपनिबंधक कार्यालय हैदरगढ़
में अपने बैनामा की रजिस्ट्री करा रहा था, इतने में राजस्व अमीन सर्वेश
कुमार व समर बहादुर अपने अन्य साथियों के साथ आये और जबरन किसान तेज
बहादुर को बकाया वसूली के लिए खींच कर ले जाने लगें तब वहां मौजूद
अधिवक्तओं ने इसका विरोध किया तो सर्वेश कुमार (अमीन) द्वारा जाबेजा गाली
दी गयी और हाथापाई पर उतर आये इस बावत अमीन संघ द्वारा अरविन्द बाजपेई
एडवोकेट पर मुकदमा भी पंजीकृत कराया गया। जब अधिवक्ताजन इसकी शिकायत
क्षेत्राधिकारी हैदरगढ़ के समक्ष गये तो क्षेत्राधिकारी द्वारा अधिवक्ताओं
से अभद्र व्यवहार किया गया। आरोपियों खिलाफ एफ0ंआई0आर0 दर्ज करने से साफ
मना कर दिया गया और वहां से खदेड़ दिया गया था। हैदरगढ़ तहसीलबार एसोशिएसन
के अध्यक्ष अचल कुमार मिश्रा, सुनील कुमार द्विवेदी, महामंत्री राम
प्रसाद तिवारी, प्रशासन मंत्री मोहम्मद अली खान एडवोकेट, राजेश कुमार
तिवारी, अब्बास हुसैन, आलोक तिवारी, ओम प्रकाश चौहान, रामधन तिवारी,
मंशाराम द्विवेदी, जीत बहादुर सहित भारी संख्या में आज अधिवक्ताओं ने
तहसील दिवस हैदरगढ़ में जाकर इसकी शिकायत की साथ में यह भी चेतावनी दी कि
जब तक उपनिबन्धक कार्यालय में मारपीट करने वाले अमीन सर्वेश कुमार व समर
बहादुर पर जब तक कोई ठोस कार्यवाई नही की जायेगी तब तक कार्य बहिष्कार
जारी रहेगा। वहीं अभद्रता करने वाले क्षेत्राधिकारी हैदरगढ़ का जब तक
स्थानान्तरण न हो जाये तब तक अधिवक्ताजन न्यायिक कार्य बहिष्कार जारी
रखेगें। अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहां कि स्थानीय
अधिकारियों द्वारा अमीन के पक्ष में एक पक्षीय कार्यवाही की गयी है। वहीं
दूसरी ओर अमीन व अधिवक्ताओं के बीच हुए विवाद में एक नया मोड़ ले लिया है।
अधिवक्ताजन अभी तक अपनी बात पर अडिग है। सुबह से ही भारी संख्या में
अधिवक्ताओं ने जमकर नारे बाजी की। दूसरे दिन भी मामला तनातनी पर है। एक
पक्षीय कार्यवाही किये जाने से अधिवक्ताओं में जबदस्त रोष व्याप्त है।

