....आजादी मगर लाल बत्तियों ने छीन ली
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बाराबंकी। समाजसेवी स्व. मेवालाल यादव की स्मृति में एक विराट कवि
सम्मेलन का आयोजन ग्राम डहरा महरौड़ में किया गया। कवि सम्मेलन की
अध्यक्षता गजलों के राजकुमार उमाशरण करूण तथा संचालन मधुसूदन बहराइच
द्वारा किया गया। कवि सम्मेलन का आगाज लखनऊ से पधारे कवि कमल की वाणी
वंदना से हुआ। हास्यव्यंग के कवि सुनील झंझटी ने राजनीति पर व्यंग करते
हुए पंक्तियां दीं - आजाद हो गये थे कभी, आप हम सभी, आजादी मगर लाल
बत्तियों ने छीन ली। लोकगीतकार सनत कुमार वर्मा अनाड़ी ने शिक्षा के
व्यवसायीकरण पर पंक्तियां करते हुए कहा कि - चलइहौ ठेके पर स्कूल, उतरिगा
शिक्षा केरा कूल। गीतकार देशराज सिंह मधुसूदन बहराइच ने श्रंगारिक रचनाएं
प्रस्तुत करते हुए कहा कि - प्यार की बात पर सोंचने लगते हो, नीर को रेत
सा सोखने लगते हो, जान निकले मेरी इतना सब्र करो, हाथ लगते ही पर नोचने
लगते हो। हास्य कवि अनिल श्रीवास्तव बब्लू ने हास्य व्यंग की कविताएं
प्रस्तुत करते हुए भ्रष्टाचार पर निम्न पंक्तियों से व्यंग कसा - अरे ओ
तांत्रिक, मुझसे मत उलझ, मुझे भ्रष्टाचार रूपी मसान कहते हैं, और यह
व्यक्ति जिस पर मैं सवार हूं, उसे हिन्दुस्तान कहते हैं। गीतकार सौरभ कमल
ने माटी का गीत प्रस्तुत करते हुए कहा - दुनिया मां है निराला हमार देश।
गजलकार उमाशंकर वर्मा करूण ने गजल की पंक्तियां दीं - न जाने कहां गये वो
दिन, बीत न पाता था पल भी वन पढ़न सृजन के बिन। इसके अतिरिक्त कवि सम्मेलन
में कवि विक्रम दीप दिवाकर, गौरीशंकर वर्मा गौरीश आदि स्थानीय कवियों ने
भी काव्यपाठ किया। इस अवसर पर कृष्ण कुमार यादव ग्राम प्रधान महरौड़,
गजराज सिंह यादव, शम्भूदयाल, मयाराम यादव सहित सैकड़ों की तादात में
श्रोतागण उपस्थित रहे।

