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लखनऊ की पहली महिला SSP नहीं बन सकीं मंजिल सैनी, ट्रांसफर रद्द

लखनऊ।  सोमवार को लखनऊ को अपनी पहली महिला एसएसपी मिलने ही वाली थी लेकिन आदेश जारी होने के 3 घंटे बाद ही तबादला रोक दिया गया। अखिलेश सरकार ने एसएसपी राजेश पांडे को डीजीपी ऑफिस में भेजते हुए उनकी जगह इटावा की एसएसपी मंजिल सैनी को लखनऊ का एसएसपी बनाने का फैसला लिया था। आजादी के बाद यह पहला मौका था जब किसी महिला पुलिस अधिकारी को शहर का एसएसपी बनाया गया था। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बाकायदा ट्वीट करके मंजिल सैनी को एसएसपी लखनऊ बनाए जाने की जानकारी दी था।
मंजिल सैनी को राजधानी की कमान सौंपने को लेकर सोमवार रात करीब चार घंटे तक ऊहापोह की स्थिति बनी रही। मंजिल को राजधानी की पहली महिला एसएसपी नियुक्त होने की बधाइयां भी मिलने लगीं थी लेकिन रात पौने 11 बजे शासन स्तर से मंजिल का तबादला रोक दिया गया। प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पण्डा ने मंजिल सैनी का तबादला रोके जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि लखनऊ के एसएसपी राजेश कुमार पांडेय हटाकर डीजीपी मुख्यालय अटैच कर दिए गए हैं। लखनऊ में नए एसएसपी की तैनाती मंगलवार को होने की संभावना है। गाजियाबाद के एसएसपी धर्मेन्द्र यादव को भी अभी नई तैनाती नहीं मिली है। चर्चा यह भी है कि धर्मेन्द्र यादव को लखनऊ या फिर गौतमबुद्धनगर का एसएसपी बनाया जा सकता है।
दरअसल, गौतमबुद्धनगर में इस समय पंचायत चुनाव चल रहे हैं। साथ ही वहां तैनात एसएसपी किरण एस सीबीआई में एसपी बना दिए गए हैं। हालांकि उन्हें पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद ही रिलीव किया जाएगा। ऐसे में गौतमबुद्धनगर में एसएसपी की तैनाती पंचायत चुनाव के बाद ही हो सकेगी।
19 सितंबर 1975 को दिल्ली में जन्मी मंजिल सैनी ने शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से की। इसके बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनामिक्स से मंजिल ने न सिर्फ मास्टर डिग्री हासिल की बल्कि गोल्ड मेडल भी हासिल किया। वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी मंजिल सैनी इसके पहले इटावा, मुजफ्फरनगर, बंदायू, मथुरा समेत आधा दर्जन से ज्यादा जनपदों में बतौर पुलिस कप्तान तैनात रहीं। इटावा में वह बीते एक साल से बतौर एसएसपी तैनात थी।
मंजिल ट्रेनिंग पूरी करने के महज छह माह के अंदर ही मुरादाबाद में तैनाती के दौरान गुडगांव के 2008 के बहुचर्चित किडनी रैकेट का भंडाफोड़ किया जिसके चलते वो सुर्खियों में आईं। कुछ समय पहले सैफई में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके कामकाज की जमकर तारीफ की थी। जिसके बाद शासन स्तर पर मंजिल सैनी के एसएसपी लखनऊ बनाए जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था। साल 2013 में जब मुजफ्फरनगर में दंगे हुए थे उससे पहले मंजिल की पोस्टिंग वहां हुई थी। उन्होंने केंद्रीय नियुक्ति के लिए भी अप्लाई किया था लेकिन राज्य सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी।

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