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21 रमज़ान का जुलूस आज

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.अ.व. के चचेरे भाई व दामाद शीयों के
पहले इमाम मुसलमानों के चौथे खलीफ़ा, सारी दुनिया को हुकूमत चलाने का
सलीका देने वाले की याद मे निकलेगा 21 रमज़ान को ताबूत। जगह-जगह हो रही
तीन दिनों से मज़लिसें हर तरफ या अली मौला हैदर मौला की सदाये गूंज रही
हैं शिया मुसलमान काले कपड़ों मे नज़र आ रहें है। सट्टी बाज़ार स्थित मरहूम
आरिफ़ रज़ा मजलिसी के अजाखाने मे हर साल की तरह इस साल भी यादें अली (अ.)
मे मजलिस आयोजित हुई। जिसे आली जनाब मौलाना सदफ़ जौनपुरी ने खि़ताब किया
मौलाना ने कहा अगर दुनिया से जुल्म को खत्म करना है तो अद्ल के लिए अली
के बताये रास्ते पर चलना होगा। अली की 4 साल की हुकुमत इस बात की गवह है
कि न कोई भूंखा, न कोई नंगा और न  कोई बेघर मिला। दुनिया मे जो कुछ भी है
अहलेबैत के सदके मे है। अल्लहा को पहचानना है तो दरे अहलेबैत पर आ जाओं,
यहीं तौहीद, तक़वा, दीन सब कुछ मिल जायेगा। अल्लाह ने पूरी कायनात को शै
(वस्तु) से बनाया लेकिन मो. व आले मो. को ला शै (बिना वस्तु) से बनाया।
मौलाना ने यह भी कहा कि मजलिसें जे़हनों को तामीर करती हैं। जो शै का
इल्म रखता है वही इमाम है । ख़ालिक वही है जो बिना किसी शै के कुछ भी बना
दे। मजलिस से पूर्व डॉ. रज़ा मौरान्वी ने पढ़ा- रश्मों की तरह गम को मनाने
वालों, शब्बीर के मकसद को भुलाने वालों। जैनब की रिदा छिनने से रोते
क्यूं हो, नामूस केा बेपर्दा घुमाने वालों। कलीम रिज़वी ने पढ़ा- शाह रौशन
ज़मीर तक आये घर से चलकर गदीर तक आये, हो जिसे भी जहां मे हक़ की तलाश, वह
जनाबे अमीर तक आये। वहीं कर्बला सिविल लाइन्स मे 19 रमज़ान से बराबर
मजलिसों का सिलसिला जारी है जिसे आली जनाब मौलाना राहत हुसैन साहब खिताब
फरमा रहें है। कम्पनी बाग मरहूम अतहर साहब के अजाखाने मे बनारस से आये
मौलाना आली जनाब सै. एहसान अहमद ने खिताब फरमाया 20 रमज़ान की मज़लिस
रामनगर बाग मे शाहिद मेहदी रिज़वी साहब के अज़ाखाने मे हुई। जिसे मौलाना
सै. एहसान अहमद साहब ने खिताब किया। 21 रमज़ान का ताबूत सुबह इमाम बाडा
पटरा मीर मासूम अली से बरामद होगा। जो अपने तैसुदा रास्ते पुलिस चौकी,
घंटाघर, धनोखर, बेगमगंज, कोतवाली होता हुआ कर्बदा पहुंचेगा। मोहल्ला
तकिया व सट्टी बाज़ार के ताबूत पुलिस चौकी पर शामिल होंगे। अस्करी हाल
लाइन पुरवा बेलहरा हाउस बेगमगंज के ताबूत अपने कदीमी रास्ते से बेगमगंज
मे जुलूस मे शामिल होकर कर्बला पहुंचेगे जहां ताबूत बढ़ाया जायेगा। मजलिस
से पूर्व सरवर अली रिज़वी ने पढ़ा- जिसे मजलूम से निस्बत वो अहले दर्द बनता
है, अली के इश्क मे पलता है तो वो मर्द बनता है, अली का इष्क सिखलाता नही
इंसा को रूबाही, अली के बुग्ज़ मे इन्सान दहशत गर्द बनता है। अलग-अलग
जगहों पर रज़ा मेहदी, अयान अब्बास, सबीह अहमद आब्दी, हैदर आब्दी, मोनिस

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