पूर्वांचल में 'क्यूम्लोमेम्बस' बादल मचा रहा तबाही, ले चुका है 33 लोगों की जान
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पूर्वांचल के आसमान में क्यूम्लोमेम्बस नामक बादल तबाही मचा रहा है। पिछले दो दिन के भीतर 33 लोगों की जान इसी बादल की सतह के बीच से हुए इलेक्ट्रिक डिस्चार्ज की वजह से गई हैं। मानसून के सक्रिय होने पर यह बादल बरसते भी हैं लेकिन इनकी सतहों के बीच जब विभवांतर (वोल्टेज डिफरेंस) ज्यादा बढ़ जाता है तब तबाही की वजह भी बन जाते हैं। यह कहना है बीएचयू के मौसम विशेषज्ञ डॉ. राजीव भाटला का।
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वाराणसी समेत आसपास के जिलों में बिजली गिरने से 33 लोगों और तमाम मवेशियों की मौतों ने लोगों को दहला दिया है। भौतिक विज्ञान के जानकारों का कहना है कि आकाश से गिरने वाली यह बिजली बेहद खतरनाक होती है। इसमें दस लाख बोल्ट से अधिक का करेंट होता है। इसकी चपेट में आने वाले की मौत तय है। डॉ. भाटला कहते हैं कि ऐसी स्थिति देश-दुनिया के किसी भी हिस्से में आ सकती है।
बीएचयू के भू-भौतिकी विभाग के प्रो. एसएन पांडेय बताते हैं कि बादलों में तेज हवाएं जब आपस में टकराती हैं तो इससे घर्षण होता है और इसी घर्षण से बिजली पैदा होती है। बिजली हमेशा कोई न कोई माध्यम (कंडक्टर) ढूंढती है। ऐसे में जब बिजली आकाश से पृथ्वी पर पहुंचती हैं तो इससे भारी नुकसान होता है।
प्रो. पांडेय कहते हैं कि आकाशीय बिजली के गिरने के पीछे किसी खास क्षेत्र की कोई भूमिका नहीं है लेकिन पहाड़ी इलाकों में ऐसा देखने-सुनने को ज्यादा मिलता है। एहतियात के तौर पर लोगों को बिजली कड़कने के वक्त घर के अंदर ही रहना चाहिए क्योंकि वहां पर बिजली गिरने का खतरा कम रहता है। इस दौरान बिजली से चलने वाली चीजों से भी दूर रहना चाहिए।

