सतीश के समर्थन में उतरे जनपद के पत्रकार
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बाराबंकी। बीते बुधवार को शहर कोतवाली में पत्रकार सतीश कश्यप पर खाकी के
द्वारा किये गये हमले के विरोध में आज पत्रकारों ने जिला पंचायत के
सभागार में एकजुट होकर जमकर आक्रोश व्यक्त किया। कलमकारों ने एक स्वर में
कहा कि शहर कोतवाल व चौकी इंचार्ज पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें हटाया जाये
तथा पीड़ित पत्रकार को सुरक्षा दी जाये इसके न होने तक वे कतई चुप नहीं
बैठेंगे। पत्रकारों ने इस पर भी आक्रोश जताया कि घटना का वीडियो होने के
बावजूद भी मामले को जांच के फंदे में फंसाकर पत्रकारिता जगत का अपमान
किया गया। इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुड़े पत्रकार सतीश कश्यप पर कोतवाली
में पुलिस कर्मियों के द्वारा हुआ हमला स्थानीय पत्रकार बर्दाश्त नहीं कर
पा रहे हैं। इसके विरोध की ज्वाला लगातार बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में आज
जनपद के समस्त पत्रकारों ने व्यापक एकजुटता दिखाते हुए जिला पंचायत
सभागार में आगे के संघर्ष के लिए गहन चर्चा की। इस दौरान यह तय किया गया
कि श्री कश्यप पर हमला करने वाले चौकी इंचार्ज व शहर कोतवाल तथा अन्य
सिपाहियों को मुकदमा दर्ज कर उन्हें हटाया जाये। यही नहीं पीड़ित पत्रकार
व उसके परिजनों को सुरक्षा दी जाये क्योंकि उसका विरोधी अतुल यादव
अपराधिक प्रवृत्ति कुनबे से है। खास बात यह है कि उसके घर की महिलाओं ने
भी पुलिस के सामने पत्रकारों को जान से मार डालने की धमकी दी और गालियां
भी दी। पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि जब तक कोतवाल बीपी यादव व चौकी
इंचार्ज शिवनाथ यादव को हटाया नहीं जाता उन पर मुकदमा नहीं दर्ज होता तब
तक हम चुप नहीं बैठेंगे। इसके लिए चाहे जो संघर्ष करना पड़े पत्रकार जगत
के लोग एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। इस दौरान पत्रकारों ने यह भी कहा कि हम
सभी अब पुलिस कप्तान के द्वारा की जाने वाली प्रेस वार्ता का भी बहिष्कार
जारी रखेंगे। जैसे पत्रकार को पुलिस वालों ने मारा तो जिला प्रशासन ने
जांच की बात कही वैसे ही अब हम भी सरकारी प्रेस नोटों की पड़ताल करेंगे।
पत्रकारों की हंगामी बैठक में आज कलमकारों का गुस्सा इतना ज्यादा था कि
जिला प्रशासन के सहित सत्ता पक्ष के नेताओं पर भी जमकर निशाना साधा गया।
इस दौरान यह भी संकल्न्प लिया गया कि जब तक दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ
कार्यवाही नहीं होगी तब तक संघर्ष विराम भी नहीं होगा। इसके अतिरिक्त
लोनीकटरा व सफदरगंज, कोठी, फतेहपुर थाना क्षेत्रों में हुए पत्रकार
उत्पीड़िनों पर भी चर्चा करके उनकी निन्दा की गई। इस दौरान आज वरिष्ठ
पत्रकार अखिलेश ठाकुर, सतीश श्रीवास्तव, रमेश वर्मा, महंत बीपी दास,
तारिक खान, केके द्विवेदी राजू भैया, मो. अतहर, परवेज अहमद, दीपक मिश्रा,
चन्द्रकांत मौर्या, कामरान अल्वी, संजय वर्मा, आसिफ हुसैन, दीपक निर्भय,
सरफराज अहमद आदि पत्रकारों ने अपने विचार व्यक्त किये। इस दौरान एक
प्रतिनिधि मण्डल का गठन भी किया गया। पत्रकारों की बैठक में रेहान
मुस्तफा, प्रदीप सारंग, अनिल त्रिपाठी, मो. आमिर, मनीष ठाकुर, पाटेश्वरी
प्रसाद, संतोष शुक्ला, सुमंगल दीप त्रिवेदी, कपिल सिंह, आदित्य यादव,
आनंद वर्मा, श्रुतिमान शुक्ला, शुऐब अहमद सहित सैकड़ों पत्रकार उपस्थित
थे।
द्वारा किये गये हमले के विरोध में आज पत्रकारों ने जिला पंचायत के
सभागार में एकजुट होकर जमकर आक्रोश व्यक्त किया। कलमकारों ने एक स्वर में
कहा कि शहर कोतवाल व चौकी इंचार्ज पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें हटाया जाये
तथा पीड़ित पत्रकार को सुरक्षा दी जाये इसके न होने तक वे कतई चुप नहीं
बैठेंगे। पत्रकारों ने इस पर भी आक्रोश जताया कि घटना का वीडियो होने के
बावजूद भी मामले को जांच के फंदे में फंसाकर पत्रकारिता जगत का अपमान
किया गया। इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुड़े पत्रकार सतीश कश्यप पर कोतवाली
में पुलिस कर्मियों के द्वारा हुआ हमला स्थानीय पत्रकार बर्दाश्त नहीं कर
पा रहे हैं। इसके विरोध की ज्वाला लगातार बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में आज
जनपद के समस्त पत्रकारों ने व्यापक एकजुटता दिखाते हुए जिला पंचायत
सभागार में आगे के संघर्ष के लिए गहन चर्चा की। इस दौरान यह तय किया गया
कि श्री कश्यप पर हमला करने वाले चौकी इंचार्ज व शहर कोतवाल तथा अन्य
सिपाहियों को मुकदमा दर्ज कर उन्हें हटाया जाये। यही नहीं पीड़ित पत्रकार
व उसके परिजनों को सुरक्षा दी जाये क्योंकि उसका विरोधी अतुल यादव
अपराधिक प्रवृत्ति कुनबे से है। खास बात यह है कि उसके घर की महिलाओं ने
भी पुलिस के सामने पत्रकारों को जान से मार डालने की धमकी दी और गालियां
भी दी। पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि जब तक कोतवाल बीपी यादव व चौकी
इंचार्ज शिवनाथ यादव को हटाया नहीं जाता उन पर मुकदमा नहीं दर्ज होता तब
तक हम चुप नहीं बैठेंगे। इसके लिए चाहे जो संघर्ष करना पड़े पत्रकार जगत
के लोग एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। इस दौरान पत्रकारों ने यह भी कहा कि हम
सभी अब पुलिस कप्तान के द्वारा की जाने वाली प्रेस वार्ता का भी बहिष्कार
जारी रखेंगे। जैसे पत्रकार को पुलिस वालों ने मारा तो जिला प्रशासन ने
जांच की बात कही वैसे ही अब हम भी सरकारी प्रेस नोटों की पड़ताल करेंगे।
पत्रकारों की हंगामी बैठक में आज कलमकारों का गुस्सा इतना ज्यादा था कि
जिला प्रशासन के सहित सत्ता पक्ष के नेताओं पर भी जमकर निशाना साधा गया।
इस दौरान यह भी संकल्न्प लिया गया कि जब तक दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ
कार्यवाही नहीं होगी तब तक संघर्ष विराम भी नहीं होगा। इसके अतिरिक्त
लोनीकटरा व सफदरगंज, कोठी, फतेहपुर थाना क्षेत्रों में हुए पत्रकार
उत्पीड़िनों पर भी चर्चा करके उनकी निन्दा की गई। इस दौरान आज वरिष्ठ
पत्रकार अखिलेश ठाकुर, सतीश श्रीवास्तव, रमेश वर्मा, महंत बीपी दास,
तारिक खान, केके द्विवेदी राजू भैया, मो. अतहर, परवेज अहमद, दीपक मिश्रा,
चन्द्रकांत मौर्या, कामरान अल्वी, संजय वर्मा, आसिफ हुसैन, दीपक निर्भय,
सरफराज अहमद आदि पत्रकारों ने अपने विचार व्यक्त किये। इस दौरान एक
प्रतिनिधि मण्डल का गठन भी किया गया। पत्रकारों की बैठक में रेहान
मुस्तफा, प्रदीप सारंग, अनिल त्रिपाठी, मो. आमिर, मनीष ठाकुर, पाटेश्वरी
प्रसाद, संतोष शुक्ला, सुमंगल दीप त्रिवेदी, कपिल सिंह, आदित्य यादव,
आनंद वर्मा, श्रुतिमान शुक्ला, शुऐब अहमद सहित सैकड़ों पत्रकार उपस्थित
थे।
