पत्रकार के ऊपर हुए हमले की कांग्रेस सांसद ने की कड़ी निन्दा
https://husainijnp.blogspot.com/2016/06/blog-post_414.html
बाराबंकी। लोकतंत्र की दुहाई देने वाली प्रदेश की सपा की सरकार में पुलिस
बेलगाम हो गयी हैं, थानों पर खाकी का तांडव जारी हैं। इस सरकार में समाज
को सच्चाई का आईना दिखाने वाला कलमकार सुरक्षित नही हैं। सत्ता के मद में
चूर पुलिस सरेआम कोतवाली में पत्रकार पर जानलेवा हमला करके अपमानित कर
रही हैं। पुलिस जिसके ऊपर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी हैं अगर वही
भक्षक बन जायें तो आवाम का भगवान मालिक हैं। स्थानीय कोतवाली में पुलिस
द्वारा पत्रकार पर जानलेवा हमला जघन्य अपराध हैं। न्यायहित में प्रशासन
मारपीट, जानलेवा हमला, पत्रकार उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज कराकर दोषियों के
खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित करें। उक्त प्रतिक्रिया राज्यसभा सदस्य डॉ.
पीएल पुनिया ने स्थानीय कोतवाली में इलेक्ट्रॉनिक चैनल के पत्रकार सतीश
कश्यप के ऊपर कोतवाली परिसर में हुए सुनियोजित हमले पर व्यक्त करते हुए
कहा कि सपा की सरकार में पुलिसिया आतंक चरम पर हैं और इनकी सरकार की
पुलिस जहां आवाम पर आतंक का डंडा चला रही हैं। वहीं सरकार के दबंग, खनन
माफियाओं और पुलिस के गुंडाराज के चलते पत्रकारों पर कही सत्ताधारी दल के
नेता मंत्री हमलें करवा रहे हैं तो कही थानों की पुलिस की दरिदंगी उनकी
जान ले रही हैं। कोतवाली नगर की घटना उसी घटना की एक कड़ी हैं। श्री
पुनिया ने घटना की कड़े शब्दों में निन्दा करते हुए कहा कि सपा सरकार के
पिछले 1 वर्ष का कार्यकाल पत्रकारों के लिये मुसीबत से भरा गुजरा हैं
जिसमें उन पर जानलेवा हमले हुए हैं, उनकी जानें गयी हैं उनके परिवारजनों
को प्रताड़ित किया गया हैं। झूठे मुकदमों में फसांया गया हैं और इन सभी
घटना में सीधे तौर पर सपा सरकार की तानाशाह पुलिस शामिल हैं। चाहे 8 जून
2015 को जनपद शाहजहांपुर में सोशल मीडिया पत्रकार जोगेन्द्र ने सरकार के
मंत्री स्थानीय पुलिस की साजिश का शिकार होकर लखनऊ के सिविल अस्पताल में
अपना दम तोड़ा हो या 11 जून 2015 को कानपुर के पत्रकार दीपक मिश्र को
दबंगो ने गोली मारी हो या 6 जुलाई 2015 को थाना कोठी की पुलिस ने पत्रकार
संतोष द्विवेदी की माता स्व. नीतू द्विवेदी से दुराचार करने की कोशिश
करके पेट्रोल छिड़ककर जान ली हो, चाहे 31 जुलाई 2015 को जनपद कन्नौज की
छिबरामऊ तहसील में पत्रकार राजा चतुर्वेदी की गोली मारकर हत्या की गयी हो
या फिर लखनऊ के थाना सरोजनीनगर में पूछताछ के बहाने बुलाकर पत्रकार राजीव
चतुर्वेदी की तानाशाह पुलिस ने हत्या की हो। यह सारी घटनाऐं प्रदेश की
सपा की सरकार पर एक ऐसा बदनुमादाग हैं जो इनकी पुलिस और सरकार के मंसूबो
को आवाम के सामने रख रही हैं। श्री पुनिया ने कहा कि दिनांक 22 जून 2016
को कोतवाली नगर की पत्रकार सतीश कश्यप की पुलिस द्वारा जानलेवा हमला एक
सुनियोजित साजिश हैं यदि सतीश के साथ उनके साथी सरफराज वारसी न होते और
समय रहते अपने साथियांे को न सूचित करते तो यह खाकी जो मौत का तांडव
खेलती हैं किसी भी अंजाम तक जा सकती थी। कांग्रेस पार्टी उक्त घटना की
घोर निन्दा ही नही करती हैं। जिसके लिये स्थानीय कोतवाली इंस्पेक्टर
वी.पी.यादव व चौकी इंचार्ज शिवनाथ यादव व पुलिसजन सीधे तौर पर दोषी हैं
जिन्होंने कोतवाली बुलाकर विरोधी के सामने मारा हैं तो इसमें जांच योग्य
कोई बिन्दु नही बचता हैं। जिला प्रशासन तत्काल दोषियों के खिलाफ प्रथम
सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित करें।
बेलगाम हो गयी हैं, थानों पर खाकी का तांडव जारी हैं। इस सरकार में समाज
को सच्चाई का आईना दिखाने वाला कलमकार सुरक्षित नही हैं। सत्ता के मद में
चूर पुलिस सरेआम कोतवाली में पत्रकार पर जानलेवा हमला करके अपमानित कर
रही हैं। पुलिस जिसके ऊपर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी हैं अगर वही
भक्षक बन जायें तो आवाम का भगवान मालिक हैं। स्थानीय कोतवाली में पुलिस
द्वारा पत्रकार पर जानलेवा हमला जघन्य अपराध हैं। न्यायहित में प्रशासन
मारपीट, जानलेवा हमला, पत्रकार उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज कराकर दोषियों के
खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित करें। उक्त प्रतिक्रिया राज्यसभा सदस्य डॉ.
पीएल पुनिया ने स्थानीय कोतवाली में इलेक्ट्रॉनिक चैनल के पत्रकार सतीश
कश्यप के ऊपर कोतवाली परिसर में हुए सुनियोजित हमले पर व्यक्त करते हुए
कहा कि सपा की सरकार में पुलिसिया आतंक चरम पर हैं और इनकी सरकार की
पुलिस जहां आवाम पर आतंक का डंडा चला रही हैं। वहीं सरकार के दबंग, खनन
माफियाओं और पुलिस के गुंडाराज के चलते पत्रकारों पर कही सत्ताधारी दल के
नेता मंत्री हमलें करवा रहे हैं तो कही थानों की पुलिस की दरिदंगी उनकी
जान ले रही हैं। कोतवाली नगर की घटना उसी घटना की एक कड़ी हैं। श्री
पुनिया ने घटना की कड़े शब्दों में निन्दा करते हुए कहा कि सपा सरकार के
पिछले 1 वर्ष का कार्यकाल पत्रकारों के लिये मुसीबत से भरा गुजरा हैं
जिसमें उन पर जानलेवा हमले हुए हैं, उनकी जानें गयी हैं उनके परिवारजनों
को प्रताड़ित किया गया हैं। झूठे मुकदमों में फसांया गया हैं और इन सभी
घटना में सीधे तौर पर सपा सरकार की तानाशाह पुलिस शामिल हैं। चाहे 8 जून
2015 को जनपद शाहजहांपुर में सोशल मीडिया पत्रकार जोगेन्द्र ने सरकार के
मंत्री स्थानीय पुलिस की साजिश का शिकार होकर लखनऊ के सिविल अस्पताल में
अपना दम तोड़ा हो या 11 जून 2015 को कानपुर के पत्रकार दीपक मिश्र को
दबंगो ने गोली मारी हो या 6 जुलाई 2015 को थाना कोठी की पुलिस ने पत्रकार
संतोष द्विवेदी की माता स्व. नीतू द्विवेदी से दुराचार करने की कोशिश
करके पेट्रोल छिड़ककर जान ली हो, चाहे 31 जुलाई 2015 को जनपद कन्नौज की
छिबरामऊ तहसील में पत्रकार राजा चतुर्वेदी की गोली मारकर हत्या की गयी हो
या फिर लखनऊ के थाना सरोजनीनगर में पूछताछ के बहाने बुलाकर पत्रकार राजीव
चतुर्वेदी की तानाशाह पुलिस ने हत्या की हो। यह सारी घटनाऐं प्रदेश की
सपा की सरकार पर एक ऐसा बदनुमादाग हैं जो इनकी पुलिस और सरकार के मंसूबो
को आवाम के सामने रख रही हैं। श्री पुनिया ने कहा कि दिनांक 22 जून 2016
को कोतवाली नगर की पत्रकार सतीश कश्यप की पुलिस द्वारा जानलेवा हमला एक
सुनियोजित साजिश हैं यदि सतीश के साथ उनके साथी सरफराज वारसी न होते और
समय रहते अपने साथियांे को न सूचित करते तो यह खाकी जो मौत का तांडव
खेलती हैं किसी भी अंजाम तक जा सकती थी। कांग्रेस पार्टी उक्त घटना की
घोर निन्दा ही नही करती हैं। जिसके लिये स्थानीय कोतवाली इंस्पेक्टर
वी.पी.यादव व चौकी इंचार्ज शिवनाथ यादव व पुलिसजन सीधे तौर पर दोषी हैं
जिन्होंने कोतवाली बुलाकर विरोधी के सामने मारा हैं तो इसमें जांच योग्य
कोई बिन्दु नही बचता हैं। जिला प्रशासन तत्काल दोषियों के खिलाफ प्रथम
सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित करें।
