मुख्यमंत्री को राज्यसभा सांसद ने भेजा पत्र
https://husainijnp.blogspot.com/2016/06/blog-post_202.html
बाराबंकी। सपा, भाजपा, बसपा गरीब, मजलूम, श्रमिक, किसान विरोधी राजनैतिक
दल हैं। इनका आवाम की समस्याओं से कोई लेना देना नही हैं। समाज के सभी
वर्ग के लोग जनपद में ही रोजगार पायें और कही पलायन न करें। उक्त अनुरोध
राज्यसभा सांसद डॉ.पीएल पुनिया ने प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री को पत्र
लिखकर किया हैं। मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में सांसद श्री पुनिया ने
लिखा हैं कि संज्ञान में आया है कि राज्य कताई मिल की बाराबंकी यूनिट में
प्रबंधतंत्र द्वारा पिछले सालों से वी.आर.एस. प्रक्रिया चलाकर मिल के
श्रमिकों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिये मजबूर किया जा रहा हैं और
उसी के चलते प्रबंधतंत्र की मनमानी के कारण 270 श्रमिकों द्वारा पूर्व
में वी.आर.एस. लिया जा चुका हैं और अब बाकी के बचे 370 श्रमिकों,
कर्मचारियों जो वर्षों से मिल चलाने के लिये आंदोलनरत् हैं उनको
वी.आर.एस. देकर प्रबंधतंत्र सूतमिल बंद करने की तैयारी में हैं जो जनपद
के श्रमिकों तथा बुनकरों के प्रति अन्याय हैं। मुख्यमंत्री को प्रेषित
पत्र में सांसद ने लिखा हैं कि बाराबंकी जनपद बुनकर बाहुल्य जनपद हैं और
उनकी जीविका का साधन ही सूत तैयार करके बेचना हैं। जिसके लिये यह सूतमिल
उनके लिये खुदा का नायाब तोहफा थी लेकिन समय समय पर यहां के तैनात
अधिकारियों ने एक सोची समझी साजिश के तहत् श्रमिकों, बुनकरों के हितों की
चिंता न करके जहां अपनी हैसियत और हवेलियां बनायी वहीं सूतमिल को कंगाली
के कगार पर पहुंचाकर आज बंदी के हालत में लाकर खड़ा कर दिया। सिर्फ
बाराबंकी सूतमिल ही नही पिछले दशकों की सरकारों ने राज्य सरकार की
औद्योगिक इकाई बाराबंकी शुगर मिल अफसरशाही की भेंट चढ़कर बंद हो गयी और
बाद में बुढ़वल शुगर मिल भी सुनियोजित साजिश के तहत् बंद कर दी गयी और
बाराबंकी शुगर मिल की बेशकीमती जमीनों को राज्य सरकार ने अपने चहेतों को
नीलाम कर दिया। जब यह मिलें बंद करने की साजिश प्रबंधतंत्र व सरकार
द्वारा की जा रही थी तब कांग्रेस श्रमिक संगठन इंटक के नेताओं व श्रमिकों
द्वारा आंदोलन करके अपने अपने परिवार के हितों की रक्षा की मांग समय समय
पर की गयी। उस समय सपा, बसपा, भाजपा जो पिछले 27 वर्षों से प्रदेश की
सत्ता पर काबिज हैं इनके नेताओं ने श्रमिको व उनके परिवार को विश्वास
दिलाया था कि सूतमिल बंद नही होगी और अगर हम सत्ता में आये तो बुढ़वल शुगर
मिल की चिमनी से एक बार फिर धुंआ निकलेंगा। मगर अफसोस कि सत्ता तो मिल
गयी लेकिन श्रमिको के अरमानों पर पानी फेरते हुए बुढ़वल शुगर मिल तो बंद
हो गयी और अब सूतमिल की बंदी का ऐलान भी प्रबंधतंत्र द्वारा किया जा चुका
हैं।
दल हैं। इनका आवाम की समस्याओं से कोई लेना देना नही हैं। समाज के सभी
वर्ग के लोग जनपद में ही रोजगार पायें और कही पलायन न करें। उक्त अनुरोध
राज्यसभा सांसद डॉ.पीएल पुनिया ने प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री को पत्र
लिखकर किया हैं। मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में सांसद श्री पुनिया ने
लिखा हैं कि संज्ञान में आया है कि राज्य कताई मिल की बाराबंकी यूनिट में
प्रबंधतंत्र द्वारा पिछले सालों से वी.आर.एस. प्रक्रिया चलाकर मिल के
श्रमिकों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिये मजबूर किया जा रहा हैं और
उसी के चलते प्रबंधतंत्र की मनमानी के कारण 270 श्रमिकों द्वारा पूर्व
में वी.आर.एस. लिया जा चुका हैं और अब बाकी के बचे 370 श्रमिकों,
कर्मचारियों जो वर्षों से मिल चलाने के लिये आंदोलनरत् हैं उनको
वी.आर.एस. देकर प्रबंधतंत्र सूतमिल बंद करने की तैयारी में हैं जो जनपद
के श्रमिकों तथा बुनकरों के प्रति अन्याय हैं। मुख्यमंत्री को प्रेषित
पत्र में सांसद ने लिखा हैं कि बाराबंकी जनपद बुनकर बाहुल्य जनपद हैं और
उनकी जीविका का साधन ही सूत तैयार करके बेचना हैं। जिसके लिये यह सूतमिल
उनके लिये खुदा का नायाब तोहफा थी लेकिन समय समय पर यहां के तैनात
अधिकारियों ने एक सोची समझी साजिश के तहत् श्रमिकों, बुनकरों के हितों की
चिंता न करके जहां अपनी हैसियत और हवेलियां बनायी वहीं सूतमिल को कंगाली
के कगार पर पहुंचाकर आज बंदी के हालत में लाकर खड़ा कर दिया। सिर्फ
बाराबंकी सूतमिल ही नही पिछले दशकों की सरकारों ने राज्य सरकार की
औद्योगिक इकाई बाराबंकी शुगर मिल अफसरशाही की भेंट चढ़कर बंद हो गयी और
बाद में बुढ़वल शुगर मिल भी सुनियोजित साजिश के तहत् बंद कर दी गयी और
बाराबंकी शुगर मिल की बेशकीमती जमीनों को राज्य सरकार ने अपने चहेतों को
नीलाम कर दिया। जब यह मिलें बंद करने की साजिश प्रबंधतंत्र व सरकार
द्वारा की जा रही थी तब कांग्रेस श्रमिक संगठन इंटक के नेताओं व श्रमिकों
द्वारा आंदोलन करके अपने अपने परिवार के हितों की रक्षा की मांग समय समय
पर की गयी। उस समय सपा, बसपा, भाजपा जो पिछले 27 वर्षों से प्रदेश की
सत्ता पर काबिज हैं इनके नेताओं ने श्रमिको व उनके परिवार को विश्वास
दिलाया था कि सूतमिल बंद नही होगी और अगर हम सत्ता में आये तो बुढ़वल शुगर
मिल की चिमनी से एक बार फिर धुंआ निकलेंगा। मगर अफसोस कि सत्ता तो मिल
गयी लेकिन श्रमिको के अरमानों पर पानी फेरते हुए बुढ़वल शुगर मिल तो बंद
हो गयी और अब सूतमिल की बंदी का ऐलान भी प्रबंधतंत्र द्वारा किया जा चुका
हैं।

