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सिर दर्द बन गयी है मेंथा की खेती

सिरौलीगौसपुर, बाराबंकी। कभी किसानो के लिए बरदान कही जाने वाली मेंथा की
फसल किसानो के लिए भस्मासर बनी हुई है। मानक के अनुरूप पिपरमंेट टंकियो
का निर्माण न किये जाने के चलते पिपरमेंट टंकियो के फटने से लोग
प्रतिवर्ष काल के गाल में समा जाते है। इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
इसका उत्तर शायद किसी के पास नही है। मेंथा की फसल किसानों की नकदी आमदनी
का जरिया है । किसानों ने आर्थिक लाभ लेने के लालच मे अपने खेतों मे करीब
तीन माह पूर्व मेंथा के पौधा की रोपाई कर दिया था अब किसानो ने मेंथा कि
फसल की कटाई पेराई का कार्य शुरू कर दिया है मानक के अनुरूप पिपर मेंट
टंकियों का निर्माण न किये जाने  के चलते आये दिन टंकियों के फटने से
असमय ही किसानो की मौत हो रही है। प्रशासन सब कुछ जानते समझते हुए
तमाशबीन बना हुआ है। आखिर इस गोरख धंधे के पीछे दोषी कौन है टंकी
निर्माता या घाटे की खेती करने वाला किसान था प्रशासन इसका उत्तर शायद
किसी के पास नही है बताते चले कि विगत 6 जून 2016 को ग्राम खजुरिहा
निवासी सुभम पुत्र प्रवेश कुमार 17 वर्षीय गांव के हरीनारायण बाजपेई की
पिपर मेंट टंकी पर मेंथा की पेराई कर रहा था टंकी के नीचे इंधन की झोकाई
कर ही रहा था कि दो घंटे के बाद एका एक विस्फोट हुआ टंकी का ऊपरी हिस्सा
उड गया वही सुभम बुरी तरह से झुलस गया परिजन उसे गम्भीर हालत में शिविल
अस्पताल लखनऊ ले गये जहां पर उसने दम तोड दिया इस प्रकार से जनपद में
पिपर मेंट टंकियो के फटने से किसानो की मौत होने के समाचार समाचार पत्रों
में प्रकाशित होते रहते है। परन्तु कोई भी विभागीय कार्यवाही टंकी
निर्माताओं पर नही कि जाती है। ऐसा क्यों यह खेल आखिर कब तक चलता रहेगा
इसके सम्बन्ध में किसान मैकूलाल बताते है कि अब मेंथा कि फसल किसानो के
लिए भस्मासुर से कम नही है मानक के अनुरूप मेंथा टंकियो का निर्माण न
किये जाने के चलते आये दिन जनपद मे पिपरमेंट टंकियो के फटने से किसानो की
मौत होती रहती है टंकी निर्माताओं पर कार्यवाही के नामपर कुछ भी असर नही
पडता है। प्रशासन मूक दर्शक बना रहता है।

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