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सामाजिक बदलाव में रुकावट जाति प्रथा: राजनाथ

अजमी रिज़वी

बाराबंकी। सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक एवं संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डा भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयन्ती पर प्रत्येक माह की 14 तारीख को आयोजित होने वाले कार्यक्रम के तीसरे माह ’’जाति तोड़ो’’ विषयक पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद युवा सामाजिक कार्यकर्ता मनीष कुमार ने कहा कि समाज में आज भी जाति प्रथा देखने को मिलती है, जो सामाजिक बदलाव में रूकावट है। हमें सबसे पहले समाज की अहम कड़ी नौनिहालों को नैतिकता और सभ्य आचरण का पाठ पढ़ाना होगा। यहीं से समाज में ंपरिर्वतन की जिज्ञासा, प्रेरणा के रूप में आमजन तक पहुॅंचेगी। तभी हमारा देश जाति विहीन समाज बनेगा। उन्होने बताया कि प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को जातिगत आधार पर आज भी शिक्षा और खान-पान दिया जाता है। जिससे नयी पीढ़ी तो जातिवाद से ग्रसित हो ही रही है, साथ ही सामाजिक गैरबराबरी को समाप्त करने में समाज के लोग भी पीछे हट रहे है। ऐसे में हमें स्वयं ही खुद को जातिवादी मानसिकता से अलग हटकर नए समाज का सृजन करना होगा। समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने कहा कि जनपद में सबसे पहले देश आजाद होने के बाद महन्त जगन्नाथ बक्स दास ने सार्वजनिक रूप से जातिवाद का विरोध किया। उन्होने मुस्लिम परिवारों एवं अन्य परिवारों के यहां सार्वजनिक रूप से खाना खाते थे। धीरे-धीरे लोगों के व्यवहार में परिर्वतन हुआ और शिक्षित समाज ने जातिवाद को कहीं पीछे छोड़ दिया। श्री शर्मा ने कहा कि डा. अम्बेडकर ने काफी समय बाद धर्म परिर्वतन किया लेकिन वह अपने संस्कार और आचरण को परिवर्तित नहीं कर पाए। आज हमें हजारों सालों की रूढ़ियों को समाप्त करने की आवश्यकता आन पड़ी है। डा अम्बेडकर की 125वीं जयंती वर्ष पर हमें संकल्प लेना होगा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से 125 ऐसे लोग तैयार करें जो छुआ-छूत और जाति-पाति को पूरी तरह से समाप्त के लिए प्रतिबद्ध हो। उन्होने कहा कि ‘‘माना सरकार नहीं अपनी पर देश तो अपना है, लाखों-लाखों लोगों की आंखों में, देश बदलने का सपना है।‘‘ गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी अशोक शुक्ला ने कहा कि डा. अम्बेडकर सामाजिक परिर्वतन के प्रतीक के रूप में हमेशा याद किए जाऐंगे। उनके विचार और दर्शन सामाजिक समरसता प्रतिबिम्ब है। डा. अम्बेडकर के विचार तभी सार्थक होंगे जब जाति तोडों का मुद्दा जन-जन में नई क्रान्ति पैदा करेगा। गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता हुमायूं नईम खान ने किया। गोष्ठी में प्रमुख रूप से जिला बार एसोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित, मृत्युंजय शर्मा, विनय कमार सिंह, अनुपम सिंह राठौर, आसिफ हुसैन, विजय पाल गौतम, पाटेश्वरी प्रसाद, सत्यवान वर्मा, संतोष शुक्ला, रत्नेश कुमार, एहतिशाम खान, आदित्य यादव, मनीष कुमार सिंह, कपिल सिंह यादव सहित कई लोग मौजूद रहे।

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