लेखक जगदीश का देहावसान, शोक की लहर
https://husainijnp.blogspot.com/2016/06/blog-post_568.html
बाराबंकी। नगर के मोहल्ला सत्यप्रेमीनगर निवासी 80 वर्षीय सेवानिवृत्ति
ई0 जगदीश शरण श्रीवास्तव का बीमारी के कारण आज बुधवार को प्रातः 10 बजे
निधन हो गया। बहुत कम लोग जानते थे कि जगदीश शरण हिन्दू धर्म, इसाई धर्म
तथा इस्लाम धर्म के ग्रन्थों का पूर्ण रूप से ज्ञान रखते थे। इन्होंने
अपने घर में एक अच्छी खासी ग्रन्थों की लाइब्रेरी बना रखी थी। सन् 1800
ई. की भी पुस्तकोंको संजो कर रखा था। उन्होंने कई किताबे भी लिखी थीं।
नगर पालिका के चेयरमैन रंजीत बहादुर श्रीवास्तव जो खुद लेखक है वह जगदीश
शरण श्रीवास्तव को अपना ग्रन्थ गुरू मानते थे। किसी भी धर्म के सम्बन्ध
में कठिन से कठिन जानकारी अपने गुरू से ही पूछते थें उनका मानना है कि
जनपद में ही नही बल्कि पूरे प्रदेश में धर्म, ज्ञान के मामले में उनसे
योग्य कोई दूसरा नहीं था। नगर के कमरियाबाग स्थित शमशानघाट पर श्री
श्रीवास्तव का अन्तिम संस्कार किया गया। उनके बड़े पुत्र प्रवीण
श्रीवास्तव (पप्पू) ने मुखाग्नि दी। उनके अन्तिम यात्रा में सत्यप्रेमी
नगर निवासियों के अलावा नगर के गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।
ई0 जगदीश शरण श्रीवास्तव का बीमारी के कारण आज बुधवार को प्रातः 10 बजे
निधन हो गया। बहुत कम लोग जानते थे कि जगदीश शरण हिन्दू धर्म, इसाई धर्म
तथा इस्लाम धर्म के ग्रन्थों का पूर्ण रूप से ज्ञान रखते थे। इन्होंने
अपने घर में एक अच्छी खासी ग्रन्थों की लाइब्रेरी बना रखी थी। सन् 1800
ई. की भी पुस्तकोंको संजो कर रखा था। उन्होंने कई किताबे भी लिखी थीं।
नगर पालिका के चेयरमैन रंजीत बहादुर श्रीवास्तव जो खुद लेखक है वह जगदीश
शरण श्रीवास्तव को अपना ग्रन्थ गुरू मानते थे। किसी भी धर्म के सम्बन्ध
में कठिन से कठिन जानकारी अपने गुरू से ही पूछते थें उनका मानना है कि
जनपद में ही नही बल्कि पूरे प्रदेश में धर्म, ज्ञान के मामले में उनसे
योग्य कोई दूसरा नहीं था। नगर के कमरियाबाग स्थित शमशानघाट पर श्री
श्रीवास्तव का अन्तिम संस्कार किया गया। उनके बड़े पुत्र प्रवीण
श्रीवास्तव (पप्पू) ने मुखाग्नि दी। उनके अन्तिम यात्रा में सत्यप्रेमी
नगर निवासियों के अलावा नगर के गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

