संघर्षशील जनता के लिये प्रेरणा दायक मुद्राराक्षस की स्मृति: डा. अजय
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। मुद्राराक्षस एक ऐसे सहित्यकार थे। जिन्होने आचरण और लेखनी से धारा के विपरीत वंचितों के लिए कुछ करने के लिए सदैव सक्रिय रहे। उनकी स्मृति हमेशा संघर्षशील जनता के लिए प्रेरणा दायक बनी रहेगी। उक्त विचार डा. अजय कुमार राय प्राचार्य जनेस्मा ने हिन्दी विभाग द्वारा मुद्राराक्षस के स्मृति में आयोजित महाविद्यालय परिसर में श्रद्धांजलि सभा में व्यक्त किया। डा. राय ने महाविद्यालय में महत्वपूर्ण चिंतको विचाराकों साहित्यकारों की स्मृतियों को छात्र/छात्राओं तक पहंुचाने के लिए निरंतर प्रयन्तशील रहने का संकल्प किया। सभा के अध्यक्ष प्रसिद्ध साहित्यकार तथा भाषाविद् डा. भगवान बक्श ने कहा कि मुद्राराक्षस जी स्वयं साहित्य के एक तेजस्वी पात्र बने रहे। उनका सम्पूर्ण साहित्य लेखन का केन्द्र असहमति का मूलस्वर है। इस अवसर पर हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं चीफ प्राक्टर डा. राजेश कुमार ने कहा किं मुद्रा जी ऐसे विरल साहित्यकार थे। जो साहित्य रचना और वैचारिक विमर्श के साथ-साथ निरंतर जन संघर्षो में अगली कतार में खड़े रहें। डा. मल्ल ने कहा किं वर्गतंरण के साथ-साथ जातिअन्तरण के एक मात्र उदाहरण है। अजय सिंह गुरू जी ने उन्हें समसमायिक समस्याओं पर तैनिंक दृष्टि रखने वाला रचनाकार बताया। इस अवसर पर डा. विनय प्रकाश कुशवाहा, डा. बलराम वर्मा, डा. अमरीश अम्बर, प्रदीप सारंग, बाबूलाल वर्मा ने अपने श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह का संचालन डा. अनीता सिंह ऐशोसिएट प्रोफेसर हिन्दी विभाग जनेस्मा ने किया। समारोह में डा. राम सुरेश, डा. पुष्पेन्द्र कुमार सहयोगी आरबी डिग्री कालेज के प्रवक्ता अनीता वर्मा, रामसेवक महाविद्यालय, चन्दौली कुमारी रंजना यादव, स्नेहलता, सांई पीजी कालेज फतेहपुर के डा. वीर बहादुर एवं रेनू चौहान, मैयका वर्मा, मो. अतहर सहित बड़ी संख्या में छात्र पत्रकार एवं वृद्धिजीवी उपस्थित थे।
बाराबंकी। मुद्राराक्षस एक ऐसे सहित्यकार थे। जिन्होने आचरण और लेखनी से धारा के विपरीत वंचितों के लिए कुछ करने के लिए सदैव सक्रिय रहे। उनकी स्मृति हमेशा संघर्षशील जनता के लिए प्रेरणा दायक बनी रहेगी। उक्त विचार डा. अजय कुमार राय प्राचार्य जनेस्मा ने हिन्दी विभाग द्वारा मुद्राराक्षस के स्मृति में आयोजित महाविद्यालय परिसर में श्रद्धांजलि सभा में व्यक्त किया। डा. राय ने महाविद्यालय में महत्वपूर्ण चिंतको विचाराकों साहित्यकारों की स्मृतियों को छात्र/छात्राओं तक पहंुचाने के लिए निरंतर प्रयन्तशील रहने का संकल्प किया। सभा के अध्यक्ष प्रसिद्ध साहित्यकार तथा भाषाविद् डा. भगवान बक्श ने कहा कि मुद्राराक्षस जी स्वयं साहित्य के एक तेजस्वी पात्र बने रहे। उनका सम्पूर्ण साहित्य लेखन का केन्द्र असहमति का मूलस्वर है। इस अवसर पर हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं चीफ प्राक्टर डा. राजेश कुमार ने कहा किं मुद्रा जी ऐसे विरल साहित्यकार थे। जो साहित्य रचना और वैचारिक विमर्श के साथ-साथ निरंतर जन संघर्षो में अगली कतार में खड़े रहें। डा. मल्ल ने कहा किं वर्गतंरण के साथ-साथ जातिअन्तरण के एक मात्र उदाहरण है। अजय सिंह गुरू जी ने उन्हें समसमायिक समस्याओं पर तैनिंक दृष्टि रखने वाला रचनाकार बताया। इस अवसर पर डा. विनय प्रकाश कुशवाहा, डा. बलराम वर्मा, डा. अमरीश अम्बर, प्रदीप सारंग, बाबूलाल वर्मा ने अपने श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह का संचालन डा. अनीता सिंह ऐशोसिएट प्रोफेसर हिन्दी विभाग जनेस्मा ने किया। समारोह में डा. राम सुरेश, डा. पुष्पेन्द्र कुमार सहयोगी आरबी डिग्री कालेज के प्रवक्ता अनीता वर्मा, रामसेवक महाविद्यालय, चन्दौली कुमारी रंजना यादव, स्नेहलता, सांई पीजी कालेज फतेहपुर के डा. वीर बहादुर एवं रेनू चौहान, मैयका वर्मा, मो. अतहर सहित बड़ी संख्या में छात्र पत्रकार एवं वृद्धिजीवी उपस्थित थे।

