भारतीय महिलाअओं ने फिर मनवाया लोहा, रचा इतिहास
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नई दिल्ली: यह नारा सशक्तिकरण की जीती-जागती मिसाल है। इन भारतीय महिलाओं ने एक बार फिर साबित कर दिखाया कि ऐसा कोई काम नहीं जो वो सफलतापूर्वक नहीं कर सकतीं। मामला भारतीय नौसेना का जहाज ‘आईएनएस महादेई’ से जुड़ा है। यह जहाज मंगलवार को मॉरीशस पहुंचा, जिसमें इतिहास में पहली बार चालक दल में सिर्फ महिलाएं शामिल हैं।
आईएनएसवी महादेई दोपहर एक बजे मॉरीशस के पोर्ट लुई पहुंचा तो हर चेहरे पर कामयाबी की खुशी साफ झलक रही थीं। नौसेना का प्रसिद्ध नौकायन पोत महादेई गोवा से 24 मई 2016 को महिला चालक दल के सदस्यों के साथ पहली बार ऐतिहासिक खुले सागर की यात्रा पर रवाना हुआ था।
नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी महादेई की पहली महिला कप्तान हैं। इस पोत के चालक दल में लेफ्टिनेंट पी स्वाति, लेफ्टिनेंट प्रतिभा जामवाल, लेफ्टिनेंट विजया देवी, सब-लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता और लेफ्टिनेंट ऐश्वर्या शामिल हैं।
यह जहाज 2100 नॉटिकल मील की समुद्री यात्रा कर दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रहार को झेलते हुए 20 दिनों में गंतव्य तक पहुंचा। इस समुद्री यात्रा का समय इस तरह तय किया गया था कि वह 2017 में विश्व भ्रमण के कार्यक्रम के मद्देनजर स्थितियों से अच्छे ढंग से परिचित हो जाए।
इस यात्रा से प्रशिक्षण के उद्देश्यों को पूरा किया गया। इस कठोर यात्रा के माध्यम से इन नौसैनिकों को उनके सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण के धरातल पर खरा उतरने का एक अवसर भी मिला।
आईएनएसवी महादेई दोपहर एक बजे मॉरीशस के पोर्ट लुई पहुंचा तो हर चेहरे पर कामयाबी की खुशी साफ झलक रही थीं। नौसेना का प्रसिद्ध नौकायन पोत महादेई गोवा से 24 मई 2016 को महिला चालक दल के सदस्यों के साथ पहली बार ऐतिहासिक खुले सागर की यात्रा पर रवाना हुआ था।
नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी महादेई की पहली महिला कप्तान हैं। इस पोत के चालक दल में लेफ्टिनेंट पी स्वाति, लेफ्टिनेंट प्रतिभा जामवाल, लेफ्टिनेंट विजया देवी, सब-लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता और लेफ्टिनेंट ऐश्वर्या शामिल हैं।
यह जहाज 2100 नॉटिकल मील की समुद्री यात्रा कर दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रहार को झेलते हुए 20 दिनों में गंतव्य तक पहुंचा। इस समुद्री यात्रा का समय इस तरह तय किया गया था कि वह 2017 में विश्व भ्रमण के कार्यक्रम के मद्देनजर स्थितियों से अच्छे ढंग से परिचित हो जाए।
इस यात्रा से प्रशिक्षण के उद्देश्यों को पूरा किया गया। इस कठोर यात्रा के माध्यम से इन नौसैनिकों को उनके सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण के धरातल पर खरा उतरने का एक अवसर भी मिला।

