भारतीय वायुसेना के इतिहास में जुड़ेगा सुनहरा पन्ना, अब महिलाएं उड़ाएंगी फाइटर प्लेन
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महिलाएं इस देश की इतिहास में एक और सुनहरा पन्ना जोड़ने जा रही हैं। शनिवार को 20 से थोड़ी ज्यादा उम्र की तीन महिलाएं फाइटर पायलट के तौर पर वायुसेना में शामिल हो रही हैं। इंडियन एयरफोर्स की ये पहली महिला पायलट होंगी, जो लड़ाकू विमान उड़ाएंगी।
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वायुसेना में नया इतिहास रचने जा रही हैं फ्लाइंग कैडेट्स भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह लंबे वक्त से अपने इस सपने कोे पूरा करने का इंतजार क र रही हैं। तीनों ने पहले स्टेज की ट्रेनिंग के तहत करीब 150 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी कर ली है। अब वे अगले 6 महीने तक ब्रिटेन में बने हॉक एडवांस फाइटर जेट जैसे विमानों को उड़ाएंगीं और फिर स्कवैड्रन में तैनात कर दी जाएंगीं। भावना कंठ बिहार के बेगूसराय की रहने वाली हैं जबकि अवनी चतुर्वेदी मध्य प्रदेश और मोहना सिंह राजस्थान से हैं।
तीनों फ्लाइंग कैडेट इस वक्त स्टेज-2 की ट्रेनिंग से गुजर रही हैं और इसके तहत उन्हें हैदराबाद के हकीमपेट एयर फोर्स स्टेशन में किरन जेट उड़ाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके बाद उन्हें एडवांस जेट ट्रेनर उड़ाने को दिया जाएगा। एक साल तक हॉक विमानों को 145 घंटे उड़ाने के बाद ही इन जांबाज महिलाओं को सुपरसोनिक फाइटर प्लेन उड़ाने को दिया जाएगा।
मोहना सिंह के पिता और दादा दोनों वायुसेना में हैं। दादा तो अभी भी फ्लाइट गनर के तौर पर एविएशन रिसर्च सेंटर को अपनी सेवा दे रहे हैं। दरअसल इन्हीं दोनों मोहना की आंखों को फाइटर पायलट बनने के सपने दिखाए। तीनों कैडेट ने अपनी ट्रेनिंग के अनुभवों को साझा किया और कहा कि उन्होंने तकलीफों को झेल लिया।
ट्रेनिंग के दौरान इन्होंने न केवल कामयाब फ्लाइंग और एक्सीडेंट के बीच का अंतर समझा बल्कि मौत को करीब से देखा। अवनी चतुर्वेदी ने बताया कि दूसरी उड़ान के कुछ देर पहले उन्हें टेकऑफ कैंसल करनी पड़ी थी क्योंकि फर्स्ट मार्कर के पास जैसे ही उन्होंने टेकऑफ के लिए रोलिंग शुरू की कैनोपी वॉर्निंग सुनाई पड़ी। शुरुआत में वॉर्निंग उन्हें कन्फ्यूज्ड कर देती थी। पर कई घंटों की ट्रेनिंग से अब ऐसा नहीं होता।
फ्लाइंग कैडेट मोहना सिंह को पहली ही फ्लाइंग में खराब मौसम से जूझना पड़ा था। पहली नाइट फ्लाइंग में वह आसमान में तारों और जमीन पर लाइट के बीच में अंतर नहीं कर पा रही थीं। इसके कारण उतनी ऊंचाई पर एयरक्त्रसफ्ट मेंटन करना मुश्किल हो गया था। इस दौरान मैंने सीखा कि अपने सिर को बिना वजह मूव न करो और फिर मैंने कंट्रोल पूरा कर फ्लाइट को रिकवर किया।
बता दें कि वायुसेना में करीब 1500 महिलाएं हैं जो अलग-अलग विभागों में काम कर रही हैं। 1991 से ही महिलाएं हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ा रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा जाता था। शनिवार को एक नई शुरुआत होगी, जब महिलाएं फाइटर प्लेन भी उड़ाएंगी।
कोई रियायत नहीं
एयरफोर्स चीफ अरुप साहा पहले ही कह चुके हैं कि इन पायलट्स को महिला होने पर कोई रियायत नहीं मिलेगी। उन्हें फोर्स की जरूरत के हिसाब से तैनात किया जाएगा। 2017 में वे पूरी तरह से फाइटर पायलट बन जाएंगी।
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वायुसेना में नया इतिहास रचने जा रही हैं फ्लाइंग कैडेट्स भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह लंबे वक्त से अपने इस सपने कोे पूरा करने का इंतजार क र रही हैं। तीनों ने पहले स्टेज की ट्रेनिंग के तहत करीब 150 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी कर ली है। अब वे अगले 6 महीने तक ब्रिटेन में बने हॉक एडवांस फाइटर जेट जैसे विमानों को उड़ाएंगीं और फिर स्कवैड्रन में तैनात कर दी जाएंगीं। भावना कंठ बिहार के बेगूसराय की रहने वाली हैं जबकि अवनी चतुर्वेदी मध्य प्रदेश और मोहना सिंह राजस्थान से हैं।
तीनों फ्लाइंग कैडेट इस वक्त स्टेज-2 की ट्रेनिंग से गुजर रही हैं और इसके तहत उन्हें हैदराबाद के हकीमपेट एयर फोर्स स्टेशन में किरन जेट उड़ाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके बाद उन्हें एडवांस जेट ट्रेनर उड़ाने को दिया जाएगा। एक साल तक हॉक विमानों को 145 घंटे उड़ाने के बाद ही इन जांबाज महिलाओं को सुपरसोनिक फाइटर प्लेन उड़ाने को दिया जाएगा।
मोहना सिंह के पिता और दादा दोनों वायुसेना में हैं। दादा तो अभी भी फ्लाइट गनर के तौर पर एविएशन रिसर्च सेंटर को अपनी सेवा दे रहे हैं। दरअसल इन्हीं दोनों मोहना की आंखों को फाइटर पायलट बनने के सपने दिखाए। तीनों कैडेट ने अपनी ट्रेनिंग के अनुभवों को साझा किया और कहा कि उन्होंने तकलीफों को झेल लिया।
ट्रेनिंग के दौरान इन्होंने न केवल कामयाब फ्लाइंग और एक्सीडेंट के बीच का अंतर समझा बल्कि मौत को करीब से देखा। अवनी चतुर्वेदी ने बताया कि दूसरी उड़ान के कुछ देर पहले उन्हें टेकऑफ कैंसल करनी पड़ी थी क्योंकि फर्स्ट मार्कर के पास जैसे ही उन्होंने टेकऑफ के लिए रोलिंग शुरू की कैनोपी वॉर्निंग सुनाई पड़ी। शुरुआत में वॉर्निंग उन्हें कन्फ्यूज्ड कर देती थी। पर कई घंटों की ट्रेनिंग से अब ऐसा नहीं होता।
फ्लाइंग कैडेट मोहना सिंह को पहली ही फ्लाइंग में खराब मौसम से जूझना पड़ा था। पहली नाइट फ्लाइंग में वह आसमान में तारों और जमीन पर लाइट के बीच में अंतर नहीं कर पा रही थीं। इसके कारण उतनी ऊंचाई पर एयरक्त्रसफ्ट मेंटन करना मुश्किल हो गया था। इस दौरान मैंने सीखा कि अपने सिर को बिना वजह मूव न करो और फिर मैंने कंट्रोल पूरा कर फ्लाइट को रिकवर किया।
बता दें कि वायुसेना में करीब 1500 महिलाएं हैं जो अलग-अलग विभागों में काम कर रही हैं। 1991 से ही महिलाएं हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ा रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा जाता था। शनिवार को एक नई शुरुआत होगी, जब महिलाएं फाइटर प्लेन भी उड़ाएंगी।
कोई रियायत नहीं
एयरफोर्स चीफ अरुप साहा पहले ही कह चुके हैं कि इन पायलट्स को महिला होने पर कोई रियायत नहीं मिलेगी। उन्हें फोर्स की जरूरत के हिसाब से तैनात किया जाएगा। 2017 में वे पूरी तरह से फाइटर पायलट बन जाएंगी।

