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भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया ब्लाक मुख्यालय

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। विकास खण्ड सिद्धौर में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के खातिर
विभागीय अधिकारी बिना जांच पड़ताल किये ही अपात्रों को लाभ देने के लिये
सारे नियम कानून दरकिनार कर दिये हैं। चाहे प्रधानमंत्री आवास योजना हो।
या फिर मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट लोहिया आवास हो। ब्लाक कर्मचारी
और ग्राम प्रधान की साठगांठ से सैकड़ो अपात्रों को इसका लाभ दे दिया गया
है। जबकि पात्र व्यक्ति का नाम सूची पर होने के बाद भी उसको अपात्र घोषित
कर दिया गया है। क्षेत्रीय ग्रामीणों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश
यादव को पत्र भेजकर इस गड़बड़ झाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, विकास खण्ड सिद्धौर कार्यालय में भ्रष्टाचार का जमकर
बोलबाला है। छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े कर्मचारी तक सुविधा शुल्क लेकर
नियम कानूनों को दरकिनार करके अपनी मनमानी करने पर उतारु हैं। विकासखण्ड
सिद्धौर की ग्राम पंचायत कोठी, सेमरांवा, मीरापुर, शेषपुर जाहिद अली,
कादिरपुर, जलालपुर, मेनहुआ, मिर्चिया, नसीरपुर सहित अधिकांश ग्राम
पंचायतों में सुविधा शुल्क लेकर प्रधान और ग्राम विकास अधिकारियों ने
मनमाने तरीके से अपात्रों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दे
दिये। ग्राम पंचायत कादिरपुर में जब प्रधान ने छः अपात्रों को आवास दिया
तो उसकी शिकायत ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से की और जब जांच हुई तो सही
पाया गया। आनन फानन में एडीओ पंचायत अनिल मिश्रा और ग्राम विकास अधिकारी
अखिलेश दूबे ने इन अपात्रों को नोटिस देकर अपनी इज्जत बचायी और यह कहा कि
जल्द से जल्द जो पैसा निकाला है उसको जमा करा दें। वरना थाने पर मुकदमा
दर्ज करवाकर कार्यवाही की जायेगी। ठीक इसी तरह ग्राम पंचायत मेनहुआ में
तो ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी ने सारे नियम कानून को ताक पर
रखकर अपात्रों को आवास दे दिये। पति के नाम आवास है तो पत्नी को आवास दे
दिया और अगर पत्नी के पास आवास तो पति को दे दिया। हद तो तब हो गयी जब एक
ही घर में तीन लोगों को आवास देकर उनको उत्कृत कर दिया। उदाहरण के तौर पर
जैनब पत्नी नौशाद को इस बार वर्ष 2016 में आवास मिला। जबकि नौशाद को पहले
से ही एक आवास दिया जा चुका है। इसी तरह सुखदेई पत्नी शत्रोहन को आवास
दिया गया। जबकि शत्रोहन को आवास मिल चुका है। सत्यवती पत्नी सत्य नारायण
को आवास दिया गया। जबकि इनके पति को पूर्व में आवास दिया जा चुका है।
शाकिर अली पुत्र गुलाम मोहम्मद का कानपुर में पक्का मकान बना हुआ है और
बड़े आदमी हैं। लेकिन बिना जांच कराये ही इनको भी आवास दिया गया। कमला
देवी पत्नी रघुराज, जयजयराम पुत्र खरचू, गुलाबा पत्नी राममिलन को भी आवास
पहले उनके पति को मिल चुके थे। लेकिन इस बार भी उनको आवास दिया गया है।
गौरतलब बात यह है कि गुलाबा पत्नी राममिलन के घर को अब तक तीन आवास दिये
जा चुके हैं। जबकि नियम यह है कि अगर मां को आवास दिया गया है तो बेटे को
आवास दिया जा सकता है। लेकिन पिता को नही। इस तरह के सैकड़ो मामले विकास
खण्ड सिद्धौर में देखे जा सकते हैं। लेकिन सब कुछ गलत होने के बावजूद भी
किसी भी विभागीय अधिकारी के ऊपर कोई भी कार्यवाही नही की जाती। कारण यह
है कि हर आवास के पीछे इन अधिकारियों को एक बंधा हुआ सुविधा शुल्क मिलता
है। जबकि ग्राम पंचायत मिर्चिया में लोहिया आवासों में भी जमकर गड़बड़ झाला
हुआ है। इस सम्बन्ध में जब खण्ड विकास अधिकारी नसीम अंसारी से जानकारी की
गयी तो उनका कहना था कि इस तरह की कोई बात मेरे सामने लिखित तौर पर नही
आयी है। अगर आयेगी तो जांच करवाकर कार्यवाही की जायेगी।

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