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कांग्रेस का काला अध्याय है आपातकाल: राजनाथ

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। आपातकाल की दास्ता आज भी जेहन में आते ही कई घटनाओं की याद को
दोहराती है। जिस घटना ने देश में लोकतंत्र को अपने आगोश में कैद कर लिया
था। आपातकाल के विरोध में जयप्रकाश नारायण, मधुलिमये, राजनारायण, जार्ज
फर्नांडिस सरीखे नेताओं के साथ लाखों लोगों को जेलों में बंदी बनाया गया
और कुछ को तो नज़रबन्द भी रखा गया। भारतीय लोकतंत्र का यह काला अध्याय
हमेशा एक काला दिवस के रूप में याद किया जाएगा। उक्त विचार गांधी भवन में
गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा इमरजेन्सी डे को लोकतंत्र रक्षक दिवस
के रूप में मनाते हुए समाजवादी चिन्तक एवं लोकतंत्र रक्षक सेनानी राजनाथ
शर्मा ने व्यक्त किए। श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार की तानाशाही
नेतृत्व के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने भारत में
आपातकाल की घोषणा की। श्रीमती गांधी के इस निर्णय ने देश में कोहराम मचा
दिया। लोगों को बेबजह बंदी बनाया गया और उन पर गम्भीर आरोप लगाते हुए
जेलों में यातनाएं दी गयी। श्री शर्मा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग
की है कि विकास खण्ड मसौली के ग्राम बिरौली निवासी पं शिव कैलाश को भी
लोकतंत्र रक्षक सेनानी का सम्मान दिया जाए। उन्हें भी डीआईआर और मीसा के
तहत जेल में बंदी बनाया गया था। वरिष्ठ सपा नेता हुमायूं नईम खान ने कहा
कि समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने उप्र के आपातकाल
सत्याग्रहियों को सम्मान देते हुए लोकतंत्र रक्षक सेनानी का दर्जा और
पेंशन सहित कई अहम सुविधाएं दी। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे उप्र वित्त
विकास निगम के निदेशक इजहार हुसैन ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री
इन्दिरा गांधी की गलत नीतियों के कारण देश में आपातकाल जैसे हालात पैदा
हुए। इन हालातों को समाजवादियों ने बदल कर पुनः लोकतंत्र को बहाल कराया।
इस मौके पर प्रमुख रूप से समाजसेवी अशोक शुक्ला, विनय कुमार सिंह
’गुड्डू’, मृत्युंजय शर्मा, पाटेश्वरी प्रसाद, मनीष कुमार, सूरज शर्मा,
अजय कुमार सिंह, सुरेश जायसवाल, विजय कुमार, ललित अवस्थी, विश्वनाथ सोनी,
मनोज पाठक सहित कई लोग मौजूद रहे।

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