मनायी गयी मंुंशी प्रेम चन्द की 137 वीं जयंती
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/137.html
बाराबंकी। जन पक्षधरता के उद्दाम साहित्यकार मुंशी प्रेम चन्द की 137वी
जयन्ती, जनेस्मा पीजी कालेज में समारोह पूर्वक मनाई गयी। हिन्दी विभाग
द्वारा आयोजित गोष्ठी प्रेम चन्द और हमारा समय की अध्यक्षता करते हुए डा.
भगवान वत्स ने कहा कि प्रेम चन्द जहॉ तक गये आज भी समाज वही खडा है। डा.
वत्स ने यह भी कहा कि आलोचक समालोचक उन्नति के लिए जरूरी तत्व है किन्तु
यह पठन पाठन की जरूरतो तक ही रहे तो अच्छा है क्योकि प्रभावादी पाठकता ही
समाज निर्माण की शक्ति रखता है। समालोचक राह प्रशस्त करती है और
प्रभाववादी पाठकता शक्ति प्रदायक है। गोष्ठी के मुख्य वक्ता डा. राजेश
मल्ल ने कहा कि उपन्यास परम्परा के स्थापित मानको से हटकर प्रेम चन्द ने
सर्व प्रथम किसान के नाम कर दे देते है। यही उनकी दृष्टि है यही उनकी
उुबोदमता है। डा. मल्ल ने कहा कि जन सरोकारों से सीधे जुडे होने कारण
प्रेम चन्द आज भी उतना ही प्रांसगिक है जितना वह अपने समय में थे। गोष्ठी
को विश्सिष्ठ वक्ता डा. विनय दास ने कहा कि प्रेम चन्द में बहुत आगे जाकर
देखने की अदभुत क्षमता थी और प्रेम चन्द ने आम जन की दुसहाताओं व शोषण को
साहित्य का विषय बनाया है जबकि समकालीन साहित्यकार कही अलग ही मस्त थे।
गोष्ठी को प्रदीप सारंग, डा. विनय कुश्सवाहा, डा. दिनेश शुक्ला, डा. राम
सुरेश वर्मा, डा. बलराम वर्मा, डा. वीर बहादुर ने भी सम्बोधित किया।
गोष्ठी में रत्नेश कुमार, अजय सिंह गुरूजी, अनीता, मयंक वर्मा, प्रंतिमा
वर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
जयन्ती, जनेस्मा पीजी कालेज में समारोह पूर्वक मनाई गयी। हिन्दी विभाग
द्वारा आयोजित गोष्ठी प्रेम चन्द और हमारा समय की अध्यक्षता करते हुए डा.
भगवान वत्स ने कहा कि प्रेम चन्द जहॉ तक गये आज भी समाज वही खडा है। डा.
वत्स ने यह भी कहा कि आलोचक समालोचक उन्नति के लिए जरूरी तत्व है किन्तु
यह पठन पाठन की जरूरतो तक ही रहे तो अच्छा है क्योकि प्रभावादी पाठकता ही
समाज निर्माण की शक्ति रखता है। समालोचक राह प्रशस्त करती है और
प्रभाववादी पाठकता शक्ति प्रदायक है। गोष्ठी के मुख्य वक्ता डा. राजेश
मल्ल ने कहा कि उपन्यास परम्परा के स्थापित मानको से हटकर प्रेम चन्द ने
सर्व प्रथम किसान के नाम कर दे देते है। यही उनकी दृष्टि है यही उनकी
उुबोदमता है। डा. मल्ल ने कहा कि जन सरोकारों से सीधे जुडे होने कारण
प्रेम चन्द आज भी उतना ही प्रांसगिक है जितना वह अपने समय में थे। गोष्ठी
को विश्सिष्ठ वक्ता डा. विनय दास ने कहा कि प्रेम चन्द में बहुत आगे जाकर
देखने की अदभुत क्षमता थी और प्रेम चन्द ने आम जन की दुसहाताओं व शोषण को
साहित्य का विषय बनाया है जबकि समकालीन साहित्यकार कही अलग ही मस्त थे।
गोष्ठी को प्रदीप सारंग, डा. विनय कुश्सवाहा, डा. दिनेश शुक्ला, डा. राम
सुरेश वर्मा, डा. बलराम वर्मा, डा. वीर बहादुर ने भी सम्बोधित किया।
गोष्ठी में रत्नेश कुमार, अजय सिंह गुरूजी, अनीता, मयंक वर्मा, प्रंतिमा
वर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

