राम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के लिये 30 जुलाई को बैठक
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/30.html
बाराबंकी। उज्जैन धर्म संसद में श्रीराम जन्म भूमि मंदिर निर्माण की
घोषित तिथि 8 नवम्बर से सिंह द्वार से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना
तैयार करने हेतु 30 जुलाई को देश की राजधानी दिल्ली में श्रीराम जन्मभूमि
मंदिर निर्माण न्यास की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक होना सुनिश्चित की
गयी है जिसमें समस्त जगतगुरू शंकराचार्य, पीठाधीश्वर, महामंण्डलेश्वर
सहित मुस्लिम धर्म गुरूओं को सहमति हेतु आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रीय
कार्य समिति की यह बैठक न्याय के राष्ट्रीय अध्यक्ष महन्त जन्मेजयशरण
महाराज द्वारा आहूत की गयी है। यह जानकारी न्यास के उ.प्र. के अध्यक्ष
रंजीत बहादुर श्रीवास्तव ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।
श्री श्रीवास्तव ने बैठक के मूल मसौदों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रथम
मंदिर निर्माण में अब तक हुए विलम्ब के कारणों पर चर्च होगी जिसमें देश
में उठाये जा रहे तीन बिन्दु प्रमुख रूप से शामिल होंगें। प्रथम-मंदिर
निर्माण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद और फैसले के अनुसार दूसरा-आपसी
समझौता तीसरा केन्द्र सरकार कानून बनाये। हलांकि उज्जैन धर्म संसद इन
तीनों तर्को पर चर्चा के बाद नकार चुकी है। किन्तु फिर भी इसपर अन्तिम
मोहर दिल्ली में लगाना शेष है। श्री श्रीवास्तव ने बताय कि बैठक में
संविधान के अनुच्छेद 51क की उपधारा ‘च’ के निर्देशों के पालन पर जोर दिया
जायेगा। जिसमें स्पष्ट लिखा है कि- हमारे हमारे यहां ऐतिहासिक महत्व के
और पुरातत्व मूल्य के अनेक स्मारक देश के विभिन्न भागों में बिखरे हैं।
इनमें हैं किले, महल, मंदिर आदि। साथ ही भूमि को कई महान धर्मों की
जन्मस्थली होने का भी गौरव प्राप्त है। इनके हिन्दू, बौद्ध, सिख और जैन
धर्म प्रमुख है। हमारे अतीत ने हमें शान्ति, प्रेम, अहिंसा और सत्य का
मार्ग दिखाया है। देश के नागरिक होने के नाते यह हम सब का कर्तव्य बनता
है कि हम इस धरोहर के परिरक्षण के लिए किाम करें तथा इसके सांस्कृतिक
मूल्यों का सम्मान करते हुए प्रेम और समरसता के साथ रहें।
घोषित तिथि 8 नवम्बर से सिंह द्वार से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना
तैयार करने हेतु 30 जुलाई को देश की राजधानी दिल्ली में श्रीराम जन्मभूमि
मंदिर निर्माण न्यास की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक होना सुनिश्चित की
गयी है जिसमें समस्त जगतगुरू शंकराचार्य, पीठाधीश्वर, महामंण्डलेश्वर
सहित मुस्लिम धर्म गुरूओं को सहमति हेतु आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रीय
कार्य समिति की यह बैठक न्याय के राष्ट्रीय अध्यक्ष महन्त जन्मेजयशरण
महाराज द्वारा आहूत की गयी है। यह जानकारी न्यास के उ.प्र. के अध्यक्ष
रंजीत बहादुर श्रीवास्तव ने अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।
श्री श्रीवास्तव ने बैठक के मूल मसौदों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रथम
मंदिर निर्माण में अब तक हुए विलम्ब के कारणों पर चर्च होगी जिसमें देश
में उठाये जा रहे तीन बिन्दु प्रमुख रूप से शामिल होंगें। प्रथम-मंदिर
निर्माण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद और फैसले के अनुसार दूसरा-आपसी
समझौता तीसरा केन्द्र सरकार कानून बनाये। हलांकि उज्जैन धर्म संसद इन
तीनों तर्को पर चर्चा के बाद नकार चुकी है। किन्तु फिर भी इसपर अन्तिम
मोहर दिल्ली में लगाना शेष है। श्री श्रीवास्तव ने बताय कि बैठक में
संविधान के अनुच्छेद 51क की उपधारा ‘च’ के निर्देशों के पालन पर जोर दिया
जायेगा। जिसमें स्पष्ट लिखा है कि- हमारे हमारे यहां ऐतिहासिक महत्व के
और पुरातत्व मूल्य के अनेक स्मारक देश के विभिन्न भागों में बिखरे हैं।
इनमें हैं किले, महल, मंदिर आदि। साथ ही भूमि को कई महान धर्मों की
जन्मस्थली होने का भी गौरव प्राप्त है। इनके हिन्दू, बौद्ध, सिख और जैन
धर्म प्रमुख है। हमारे अतीत ने हमें शान्ति, प्रेम, अहिंसा और सत्य का
मार्ग दिखाया है। देश के नागरिक होने के नाते यह हम सब का कर्तव्य बनता
है कि हम इस धरोहर के परिरक्षण के लिए किाम करें तथा इसके सांस्कृतिक
मूल्यों का सम्मान करते हुए प्रेम और समरसता के साथ रहें।

