कर्बला का ग़म हर दर्दमन्दों के लिए मरहम है-मौलाना रज़ा
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बाराबंकी। कर्बला का ग़म हर दर्दमन्दों के लिए मरहम है, ये बात कर्बला
सिविल लाइन मे आयोजित मरहूम सै. मो. अली आब्दी पुत्र सै. मौ. हसनैन आब्दी
की तीजें की मजलिस मे मौलाना मो. रज़ा जैदपुरी ने कही, मौलाना ने आगे कहा
कि खालिक से मखलूक के मुलाकात का नाम मौत है। अगर इंसान मौत को याद रखे
तो बुराईयों से दूर रहेगा। मजलिस के अन्त मे जनाबे अली अकबर के दर्दनाक
मसायब पढ़े जिसे सुनकर मोमनीन रो पडे़। मजलिस से पूर्व डा. रज़ा मौरानवी ने
पढ़ा- सभी हुसैन है इस कर्बला के मखतल मे, मैं एक सर हूॅ बहत्तर पे रख
दिया गया हूॅ। ज़ामिन फतेहपुरी ने पढ़ा- यज़ीद जंग से पहले ही जंग हार गया,
ये कारनामये हुर कैसा कामयाब हुआ। सईद जैदपुरी ने भी नज़रानये अकीदत पेश
करते हुए पढ़ा- जब भी समझेगा ज़माना मरतबा शब्बीर का, सजदये कल्ब हो नक्शे
पा शब्बीर का। मजलिस के अन्त मे मौलाना ने मरहूम के वालदैन व अकारिब को
शब्रे ज़मील अता करने के लिए परवर दिगार से दुआ की, सभी ने आमीन कही।
