सीएचसी सिद्धौर में मरीजांे से हो रही है अवैध वसूली
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/blog-post_344.html
बाराबंकी। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सिद्धौर में न तो समय से
डाक्टर आते हैं और न ही वहां पर कार्यरत कर्मचारी मरीज जो आते हैं। उनके
साथ भी बदसलूकी तो की ही जाती है। इतना ही नही दवा देने और इंजेक्शन
लगाने के नाम पर अवैध वसूली भी की जा रही है। जो मरीज पैसा नही देता है।
उसको बैरंग वापस लौटा दिया जाता है। क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रदेश के
स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर लापरवाह कर्मचारियों और डाक्टरों के
विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है। प्रदेश सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने
सत्ता संभालने के बाद यह घोषणा कर दी थी कि सरकारी अस्पतालों में दवाएं
मुफ्त मिलेंगी और बड़े अस्पतालों में निःशुल्क चेकअप किया जायेगा। लेकिन
प्रदेश मुखिया की घोषणा सिर्फ कागजों पर ही सीमित रह गयी। हकीकत में तो
अधिकांश अस्पतालों में न ही दवाएं हैं और न ही डाक्टर। अगर कहीं पर
डाक्टर हैं तो वहां पर पता चलता है कि मरीजों को दवाएं नही दी जा रही
हैं। डाक्टर पर्चा लिखते हैं। लेकिन यह जरुर कहते हैं कि कृपया बाहर के
मेडिकल स्टोर से दवाई खरीद लें। कहीं-कहीं पर तो मरीज घण्टो इंतजार करते
हैं लेकिन डाक्टर के दर्शन दुर्लभ होते हैं। सबसे ज्यादा दयनीय हालत
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सिद्धौर की है। यहां पर कहने को तीन डाक्टर
कार्यरत है। लेकिन उनमें से अधिकांश डाक्टर अस्पताल से नदारद रहते हैं।
इन डाक्टरों का न तो आने के समय है और न ही जाने का। सिर्फ संविदा पर आये
डा. अजय रावत मरीजों को देखने के लिये पहुंच जाते हैं। मरीजों को देखने
के बाद जब डाक्टर दवा का पर्चा बनाकर देते हैं और कहते हैं कि सामने से
दवाई ले लो तो दवा स्टोर में तैनात फार्मेसिस्ट यह कहते हैं कि यहां पर
दवाई नही है। जब मरीज सुविधा शुल्का देता है तो उसको दवाएं उपलब्ध करा दी
जाती हैं। कुत्ता काटने का इंजेक्शन लगवाना हो तो 50 रुपये सुविधा शुल्क
दे दीजिए इंजेक्शन लगा दिया जायेगा। नही तो यह कहकर मरीज वापस लौटा दिया
जाता है कि अभी जिले से इंजेक्शन नही आया है। वर्तमान समय में प्राथमिक
स्वास्थ्य केन्द्र सिद्धौर में जमकर भ्रष्टाचार कायम है और डाक्टरों से
लेकर कर्मचारी तक अपना मनमाना रवैया अपनाएं हुए हैं। कई बार स्थानीय
नागरिकों ने इसकी शिकायत मुख्य चिकित्सा प्रभारी से की लेकिन उन्होने भी
शिकायत पर कोई ध्यान नही दिया। कस्बा निवासी मो. नफीस सहित स्थानीय
नागरिकों ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर कार्यवाही की मांग
की है। वहीं इस सम्बन्ध में जब मुख्य चिकित्सा प्रभारी से पूंछा गया तो
उनका कहना था कि अभी मुझे इस तरह की शिकायत नही मिली है। अगर शिकायत
मिलेगी तो कार्यवाही की जायेगी।
डाक्टर आते हैं और न ही वहां पर कार्यरत कर्मचारी मरीज जो आते हैं। उनके
साथ भी बदसलूकी तो की ही जाती है। इतना ही नही दवा देने और इंजेक्शन
लगाने के नाम पर अवैध वसूली भी की जा रही है। जो मरीज पैसा नही देता है।
उसको बैरंग वापस लौटा दिया जाता है। क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रदेश के
स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर लापरवाह कर्मचारियों और डाक्टरों के
विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है। प्रदेश सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने
सत्ता संभालने के बाद यह घोषणा कर दी थी कि सरकारी अस्पतालों में दवाएं
मुफ्त मिलेंगी और बड़े अस्पतालों में निःशुल्क चेकअप किया जायेगा। लेकिन
प्रदेश मुखिया की घोषणा सिर्फ कागजों पर ही सीमित रह गयी। हकीकत में तो
अधिकांश अस्पतालों में न ही दवाएं हैं और न ही डाक्टर। अगर कहीं पर
डाक्टर हैं तो वहां पर पता चलता है कि मरीजों को दवाएं नही दी जा रही
हैं। डाक्टर पर्चा लिखते हैं। लेकिन यह जरुर कहते हैं कि कृपया बाहर के
मेडिकल स्टोर से दवाई खरीद लें। कहीं-कहीं पर तो मरीज घण्टो इंतजार करते
हैं लेकिन डाक्टर के दर्शन दुर्लभ होते हैं। सबसे ज्यादा दयनीय हालत
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सिद्धौर की है। यहां पर कहने को तीन डाक्टर
कार्यरत है। लेकिन उनमें से अधिकांश डाक्टर अस्पताल से नदारद रहते हैं।
इन डाक्टरों का न तो आने के समय है और न ही जाने का। सिर्फ संविदा पर आये
डा. अजय रावत मरीजों को देखने के लिये पहुंच जाते हैं। मरीजों को देखने
के बाद जब डाक्टर दवा का पर्चा बनाकर देते हैं और कहते हैं कि सामने से
दवाई ले लो तो दवा स्टोर में तैनात फार्मेसिस्ट यह कहते हैं कि यहां पर
दवाई नही है। जब मरीज सुविधा शुल्का देता है तो उसको दवाएं उपलब्ध करा दी
जाती हैं। कुत्ता काटने का इंजेक्शन लगवाना हो तो 50 रुपये सुविधा शुल्क
दे दीजिए इंजेक्शन लगा दिया जायेगा। नही तो यह कहकर मरीज वापस लौटा दिया
जाता है कि अभी जिले से इंजेक्शन नही आया है। वर्तमान समय में प्राथमिक
स्वास्थ्य केन्द्र सिद्धौर में जमकर भ्रष्टाचार कायम है और डाक्टरों से
लेकर कर्मचारी तक अपना मनमाना रवैया अपनाएं हुए हैं। कई बार स्थानीय
नागरिकों ने इसकी शिकायत मुख्य चिकित्सा प्रभारी से की लेकिन उन्होने भी
शिकायत पर कोई ध्यान नही दिया। कस्बा निवासी मो. नफीस सहित स्थानीय
नागरिकों ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर कार्यवाही की मांग
की है। वहीं इस सम्बन्ध में जब मुख्य चिकित्सा प्रभारी से पूंछा गया तो
उनका कहना था कि अभी मुझे इस तरह की शिकायत नही मिली है। अगर शिकायत
मिलेगी तो कार्यवाही की जायेगी।

