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काशीराम आवास कालोनी में गंदगी की भरमार, शोपीस बनी पानी की टंकी

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट
काशीराम कालोनी दुर्दशा का शिकार हो गयी है। यहां के रहने वाले गरीब
लोगों को न तो बिजली के दर्शन हो रहे हैं और नही पानी के हर तरफ गंदगी का
अम्बार लगा हुआ है। यहां के लोगों का जीवन नरक बन गया है। प्रदेश के
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश की गरीब जनता को अपना घर मुहैय्या
कराने के खातिर प्रत्येक जिले के शहर और नगर पंचायतों में काशीराम कालोनी
आवासों का निर्माण करवाया था। जिसमें रहने के लिये एक कमरा, एक बरामदा व
अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध थी। उन्होने पूरी कोशिश की थी कि गरीब परिवारों
को अपना घर नसीब हो सके। दो मंजिल से लेकर चार से पांच मंजिलो तक निर्माण
कार्य कराया गया था और सरकार जाने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री ने अधिकांश
लोगों को मकान आवंटन कर दिया था और सभी गरीबों को कब्जा भी दिला दिया था।
लेकिन जैसे ही बसपा का सरकार का पतन हुआ प्रदेश की सत्ता समाजवादी पार्टी
के हाथों में आयी। उसके बाद से जैसे काशीराम आवास में रहने वाले गरीबों
के खराब दिन शुरु हो गये। जिले में बाराबंकी शहर, नगर पंचायत जैदपुर, नगर
पंचायत सतरिख, देवा, बंकी, फतेहपुर, रामनगर, टिकैतनगर, सिद्धौर,
दरियाबाद, सुबेहा और हैदरगढ़ में करीब पांच हजार आवास काशीराम योजना के
तहत बनाये गये थे। सबसे ज्यादा हालात तो बाराबंकी शहर के काशीराम आवासों
के हैं। यहां पर इतनी गंदगी है कि गरीब आदमी किसी तरह से अपना जीवन यापन
कर रहा है। हर तरफ कूड़ों के ढेर नालियों का गंदा पानी खुलेआम बह रहा है।
जो आवास बनाये गये थे वह इतने खराब थे कि बरसात के मौसम में छतो से पानी
टपक रहा है। बिजली व्यवस्था भी इन आवासों की बद से बदत्तर हो गयी है।
पानी के लिये बनायी गयी पानी की टंकी शोपीस बन गयी है। टंकी से पानी
सप्लाई तो कम होती है लेकिन काशीराम आवास में रहने वाले छोटे-छोटे बच्चे
पानी की टंकियो पर चढ़कर खेलते हैं। जिससे किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो
सकता है। कालोनी के निवासी विश्वनाथ सोनी ने बताया कि काशीराम आवास में
रहने वाले सभी नागरिक काफी परेशान हैं। इन आवासों में सफाई के लिये कभी
कोई सफाई कर्मी नही आता है। जबकि जब बसपा शासनकाल था तो सुबह शाम यहां पर
सफाई का होता था। उन्होने बताया कि इस सम्बन्ध में कई बार जिलाधिकारी
सहित अन्य अधिकारियों से शिकायत की गयी। लेकिन किसी भी अधिकारी ने हम
लोगों की समस्या पर ध्यान नही दिया। उनका यह भी कहना है कि यहां पर रहने
वाले अधिकंश गरीब आवास छोड़कर चले गये हैं और किराये के मकानो में रह रहे
हैं।

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