ग्रामीणों ने नये सिरे से पुनः नीलामी करने की मांग
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/blog-post_493.html
रामसनेहीघाट, बाराबंकी। तहसील प्रशासन पर सत्ता के दबाव में मत्स्य पालन
के लिये तालाबों की मनमानी करने का आरोप लगाते हुए मछुवा समुदाय के लोगों
ने उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर नीलामी तिथि को निरस्त करने की
माँग करते हुए दुबारा नीलामी कराने की मांग की है। दिये गये शिकायती
प्रार्थना पत्र में मछुवा समुदाय के लोगो ने कहा गया है कि तालाब नीलामी
के लिये 14 जुलाई की तिथि निर्धारित की गयी थी। उसी दिन नीलामी में
हिस्सा लेने के लिये प्रार्थना पत्र दिया था किन्तु उसमें अज्ञानतावश
जाति व आय प्रमाण पत्र नहीं लगा था। यह कहा गया कि लेखपाल से रिपोर्ट
लगवा ली जायेगी। कुछ लोगों से शपथ पत्र देने की बात कही गयी थी।इसके बाद
सभी लोगों से बोली लगाने के लिये जमानत राशि भी जमा करवा ली गयी थी। बाद
में सभी को बुलाया गया लेकिन निर्धारित 15 जुलाई को भी नीलामी कार्यवाही
नहीं हुयी तथा नीलामी की तिथि बढाते हुए 18 जुलाई की तिथि कर दी गयी।
लेकिन एक बार फिर वही हुआ और 18 जुलाई को भी नीलामी नही की गई और सभी को
हर बार की तरह 19 जुलाई को एक बार फिर बुलाया गया लेकिन जब सभी लोग फोन
करके 21 जुलाई को एक बार फिर बुलाया गया। नीलामी अधिकारी द्वारा नीलामी
के लिए बार बार दौडान के बाद तहसील क्षेत्र के कुशफर गांव निवासी भोलानाथ
निषाद, शिवप्रसाद, राजरानी निषाद, लायकराम, शिवसागर ने एसडीएम को शिकायती
पत्र देकर उसमें कहा है कि 21 जुलाई को सभी होने वाली नीलामी का इंतजारकर
रहे थे लेकिन मौके पर उनके गांव के कुछ लोग मौजूद रहे और वह अधिकारियों
से बात कर रहे थे जिसके बाद नीलामी प्रक्रिया के दौरान यह कहा गया कि
जिसके पास आय जाति प्रमाण पत्र नहीं है वह नीलामी में हिस्सा नहीं ले
सकते हैं। इसके बाद नीलामी अधिकारी ने शिकायतकर्ताओं को वहां से हटाकर
मनमानी ढंग से नीलामी कर दी गई। पीडितो ने की गई नीलामी प्रक्रिया को
निरस्त करने की मांग की है। उपजिलाधिकारी ने जांच बाद कार्यवाही करने का
आश्वासन दिया है।
के लिये तालाबों की मनमानी करने का आरोप लगाते हुए मछुवा समुदाय के लोगों
ने उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर नीलामी तिथि को निरस्त करने की
माँग करते हुए दुबारा नीलामी कराने की मांग की है। दिये गये शिकायती
प्रार्थना पत्र में मछुवा समुदाय के लोगो ने कहा गया है कि तालाब नीलामी
के लिये 14 जुलाई की तिथि निर्धारित की गयी थी। उसी दिन नीलामी में
हिस्सा लेने के लिये प्रार्थना पत्र दिया था किन्तु उसमें अज्ञानतावश
जाति व आय प्रमाण पत्र नहीं लगा था। यह कहा गया कि लेखपाल से रिपोर्ट
लगवा ली जायेगी। कुछ लोगों से शपथ पत्र देने की बात कही गयी थी।इसके बाद
सभी लोगों से बोली लगाने के लिये जमानत राशि भी जमा करवा ली गयी थी। बाद
में सभी को बुलाया गया लेकिन निर्धारित 15 जुलाई को भी नीलामी कार्यवाही
नहीं हुयी तथा नीलामी की तिथि बढाते हुए 18 जुलाई की तिथि कर दी गयी।
लेकिन एक बार फिर वही हुआ और 18 जुलाई को भी नीलामी नही की गई और सभी को
हर बार की तरह 19 जुलाई को एक बार फिर बुलाया गया लेकिन जब सभी लोग फोन
करके 21 जुलाई को एक बार फिर बुलाया गया। नीलामी अधिकारी द्वारा नीलामी
के लिए बार बार दौडान के बाद तहसील क्षेत्र के कुशफर गांव निवासी भोलानाथ
निषाद, शिवप्रसाद, राजरानी निषाद, लायकराम, शिवसागर ने एसडीएम को शिकायती
पत्र देकर उसमें कहा है कि 21 जुलाई को सभी होने वाली नीलामी का इंतजारकर
रहे थे लेकिन मौके पर उनके गांव के कुछ लोग मौजूद रहे और वह अधिकारियों
से बात कर रहे थे जिसके बाद नीलामी प्रक्रिया के दौरान यह कहा गया कि
जिसके पास आय जाति प्रमाण पत्र नहीं है वह नीलामी में हिस्सा नहीं ले
सकते हैं। इसके बाद नीलामी अधिकारी ने शिकायतकर्ताओं को वहां से हटाकर
मनमानी ढंग से नीलामी कर दी गई। पीडितो ने की गई नीलामी प्रक्रिया को
निरस्त करने की मांग की है। उपजिलाधिकारी ने जांच बाद कार्यवाही करने का
आश्वासन दिया है।

