अनुप्रिया पटेल के मंत्री बनते ही अपना दल में उठा तूफान
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लखनऊ। अनुप्रिया पटेल के मोदी सरकार में मंत्री बनते ही अपना दल में तूफान उठना शुरू हो गया है। अपना दल ने अनुप्रिया को मंत्री बनाए जाने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अपना दल में मां कृष्णा पटेल और बेटी अनुप्रिया के बीच जंग और तेज हो ने आसार हैं। बता दें कि आज ही अनुप्रिया ने राज्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है।
अपना दल के सांसद कुंवर हरिवंश सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अपना दल को बिना बताए अनुप्रिया को कैबिनेट में लिया गया है। हमारी पार्टी एनडीए का हिस्सा है। अनुप्रिया पार्टी से सस्पेंड थीं इसके बावजूद उन्हें मंत्री बनाया गया। हम सिर्फ बीजेपी से बात करेंगे। बीजेपी के साथ विलय का कोई सवाल ही नहीं है।
वहीं अनुप्रिया पटेल ने कहा कि माता जी के आशीर्वाद से ही मैं आज यहां तक पहुंची हूं। मां कभी अपनी बेटी से नाराज़ नहीं होती। पार्टी के बीजेपी में विलय के सवाल पर अनुप्रिया ने कहा कि भविष्य के बारे में बता नहीं सकती लेकिन 2 जुलाई को अमित शाह ने कहा था कि 2017 में बीजेपी-अपना दल में गठबंधन होगा।
पिछले साल अक्तूबर में अनुप्रिया को मां ने महासचिव पद से हटा दिया था. मां ने अपनी बड़ी बेटी पल्लवी पटेल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था, जिसके बाद वर्चस्व की लड़ाई और तेज हो गई थी। आज अनुप्रिया के शपथ ग्रहण में उनकी दो अन्य बहनें शामिल हुईं। अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन कुर्मी समाज के बड़े नेता और पूर्वांचल में अपने समुदाय में अच्छी पकड़ रखने वाले इस परिवार के बीच कलह चरम पर है।
माना जा रहा है कि 'अपना दल' की मिर्जापुर से सांसद अनुप्रिया पटेल को मोदी मंत्रिमंडल में जगह उत्तर प्रदेश की राजनीति और अगले साल प्रस्तावित राज्य विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मिली है। ऐसी संभावना है कि वह अपनी पार्टी 'अपना दल' का भाजपा में विलय भी कर सकती हैं।
भाजपा पिछले 15 वर्षो से राज्य में सत्ता से बाहर है। अनुप्रिया पटेल (35) अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोकप्रिय कुर्मी नेता सोनेलाल पटेल की बेटी हैं, जिनका 2009 में निधन हो गया था। भाजपा को उम्मीद है कि वह उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती के दलित उम्मीदवारों के नेतृत्व का सामना कर सकती हैं।
पूर्वी भारत में कुर्मियों की अच्छी-खासी तादाद को देखते हुए अनुप्रिया को मंत्रिमंडल में शामिल करने की प्रबल संभावना थी। अनुप्रिया के मंत्रिमंडल में शामिल होने से जाति कारक भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा राज्य में अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में है। दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज, एमिटी विश्वविद्यालय और कानपुर विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त अनुप्रिया के पास मनोविज्ञान और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स डिग्री है।
अपना दल के सांसद कुंवर हरिवंश सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अपना दल को बिना बताए अनुप्रिया को कैबिनेट में लिया गया है। हमारी पार्टी एनडीए का हिस्सा है। अनुप्रिया पार्टी से सस्पेंड थीं इसके बावजूद उन्हें मंत्री बनाया गया। हम सिर्फ बीजेपी से बात करेंगे। बीजेपी के साथ विलय का कोई सवाल ही नहीं है।
वहीं अनुप्रिया पटेल ने कहा कि माता जी के आशीर्वाद से ही मैं आज यहां तक पहुंची हूं। मां कभी अपनी बेटी से नाराज़ नहीं होती। पार्टी के बीजेपी में विलय के सवाल पर अनुप्रिया ने कहा कि भविष्य के बारे में बता नहीं सकती लेकिन 2 जुलाई को अमित शाह ने कहा था कि 2017 में बीजेपी-अपना दल में गठबंधन होगा।
पिछले साल अक्तूबर में अनुप्रिया को मां ने महासचिव पद से हटा दिया था. मां ने अपनी बड़ी बेटी पल्लवी पटेल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था, जिसके बाद वर्चस्व की लड़ाई और तेज हो गई थी। आज अनुप्रिया के शपथ ग्रहण में उनकी दो अन्य बहनें शामिल हुईं। अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन कुर्मी समाज के बड़े नेता और पूर्वांचल में अपने समुदाय में अच्छी पकड़ रखने वाले इस परिवार के बीच कलह चरम पर है।
माना जा रहा है कि 'अपना दल' की मिर्जापुर से सांसद अनुप्रिया पटेल को मोदी मंत्रिमंडल में जगह उत्तर प्रदेश की राजनीति और अगले साल प्रस्तावित राज्य विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मिली है। ऐसी संभावना है कि वह अपनी पार्टी 'अपना दल' का भाजपा में विलय भी कर सकती हैं।
भाजपा पिछले 15 वर्षो से राज्य में सत्ता से बाहर है। अनुप्रिया पटेल (35) अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोकप्रिय कुर्मी नेता सोनेलाल पटेल की बेटी हैं, जिनका 2009 में निधन हो गया था। भाजपा को उम्मीद है कि वह उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती के दलित उम्मीदवारों के नेतृत्व का सामना कर सकती हैं।
पूर्वी भारत में कुर्मियों की अच्छी-खासी तादाद को देखते हुए अनुप्रिया को मंत्रिमंडल में शामिल करने की प्रबल संभावना थी। अनुप्रिया के मंत्रिमंडल में शामिल होने से जाति कारक भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा राज्य में अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में है। दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज, एमिटी विश्वविद्यालय और कानपुर विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त अनुप्रिया के पास मनोविज्ञान और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स डिग्री है।

