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इंसानियत और तालीम एक सिक्के के दो पहलू : मौलाना कल्बे रुशैद

असगर नकी
सुल्तानपुर । इंसानियत के लिये तालीम और तालीम के लिये इंसानियत का होना ज़रूरी है, यानी इनसानियत और तालीम एक सिक्के के दो पहलू हैं, ये बातें कमला नेहरु शिक्षण  संस्थान में ला फेकलटी की ओर से "एकजहती" के बैनर तले आयोजित सेमिनार में शिया धर्म गुरु कल्बे रुशैद रिज़वी ने कही।
कमला नेहरु शिक्षण  संस्थान में ला फेकलटी के छात्रों एवं मीडिया के बीच मौलाना श्री रिज़वी ने कहा की हिंदुस्तान एक आज़ाद मुल्क है जहां आज़ाद ख़याल के लोग बहस करते हैं मगर इसके नतीजे अच्छे आयें तो बहस करने में नुकसान नहीं है, उन्होंने कहा कि आज इंसानियत को बदनाम करने के लिये जो ज़हर घोला गया है उससे सब वाकिफ हैं और इससे देश का नुकसान हो रहा, लेकिन नुकसान तो नुकसान है "चाहे नाखून का हो या खून का" सवाल तो ये है के नुकसान किसका हुआ और किसने किया? उन्होंने कहा कि मुल्क का नुकसान न तो कुर्सी पर बैठने वालों के ज़रिये होना चाहिए और न कुर्सी के नीचे रहने वालों के ज़रिये।
मौलाना श्री रुशैद ने कहा की राजनीति बुरी चीज़ नहीं है हां मिट्टी की राजनीति होनी चाहिए कुर्सी की नहीं, उन्होंने कहा की लोग शिक्षा से दूर हैं, ऐसा नहीं है की पूरे समाज की ये दशा हो लेकिन आबादी साहिल से बहुत दूर है, तो कोशिश करनी चाहिए इसलिये कुआं प्यासे तक नहीं जाता प्यासा कुएं तक जाता है।
उधर मौजूदा हालात पर मौलाना ने कहा कि इस हालात में सबसे बड़ी कमी नियत की है, हम अपने मरीज़ को अटैक के बाद ठीक कराने के लिये एक डाक्टर से दूसरे डाक्टर और फिर देश के बड़े डाक्टर के पास लेकर जाते हैं तो मुल्क के लिये ये सोंच क्यों नहीं रखते? उन्होंने कहा कि इसके लिये देश का वोटर जो चुनने वाला है वो जिसे भी चुने बेहतर चुने, अपने चौधरी की सुने और अपनी अक्ल की करे।
इस मौके पर कमला नेहरु के डायरेक्टर, प्राचार्य, ज़हीर जैदी आदि सम्मानित लोग एवं छात्र मौजूद रहे, सम्मेलन का संचालन सुशील सिंह ने किया।

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