अधिकारी अंजान, एसपी से हुई शिकायत
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/blog-post_770.html
बाराबंकी। समाज में लोगों की एक सोंच है कि सरकारी नौकरी मिल जाये।
तनख्वाह मिलेगी। घर का खर्चा चलेगा। इसके बावजूद अपनी सरकार से ही चोरी
करने से लोग बाज नहीं आते। सरकार को लाखों का चूना चंद पलों में लगा
डालते हैं। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन विभाग की सरकारी बसों का डीजल
बेंचा जाता है और अधिकारियों को इस बात की भनक तक नहीं। बड़ा अजीब
इत्तिफाक है कि लम्बी दूरी की बसों में इस कारगुजारी को बड़ी आसानी से
अंजाम दिया जाता है। ज्ञात हो कि लम्बी दूरी की बसों में एक मुख्य चालक
के साथ उसका सहयोगी चालक भी रहता है। सहयोगी चालक सिर्फ चालन कार्य में
ही सहयोग नहीं करता बल्कि हर प्रकार के गोरखधंधे का सूत्रधार भी होता है।
खास कर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बसे गांवों में इनका पूरा सिस्टम
पहले से ही फिक्स रहता है। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त
जानकारी के अनुसार, यह गोरखधंधा परिवहन विभाग की बसों के चालकों द्वारा
हाइवे के आस-पास के गांवों में पहले से मुस्तैद उनके दलालों के माध्यम से
अंजाम दिया जाता है। परिवहन निगम सबकुछ जानते हुए भी चुप्पी मारे बैठा
है। सूत्रों के अनुसार, इन बसों के चालक अपनी सहायता के लिए एक सहायक को
चालक के रूप में रख लेते हैं। यह सहायक चालक लम्बी दूरी की बसों पर जहां
चालक के स्थान पर बसें चलाते हैं। वहीं पहले से निश्चित स्थानों पर डीजल
निकाल कर सड़क के किनारे बसे अपने गांवों में स्टोर कर उसकी बिक्री भी
करते हैं। वैसे तो निगम का चेकिंग स्टाफ बसों की जांच करने के लिए दिन-भर
भागा-दौड़ी करता है। लेकिन उसे यह कभी नहीं दिखता की बसों पर सहायक चालक
के रूप में उपस्थित यह व्यक्ति किस अधिकार से बिना टिकट चल रहा है। कोटवा
सड़क के पास स्थित ग्राम मेड़ुवा निवासी नागेन्द्र कुमार सिंह पुत्र
पृथ्वीराज सिंह इसी प्रकार कैसरबाग डिपो की बस पर नियुक्त चालक अरविन्द
सिंह द्वारा निजी तौर पर सहायक चालक के तौर पर रखे गये हैं। वह अनाधिकृत
रूप से बस चलाने के साथ ही डीजल चोरी कर थाना रामसनेहीघाट स्थित ग्राम
मेड़ुवा में उसे अपने घर पर स्टोर कर उसे बेंचने का धंधा करता है। जिसकी
लिखित शिकायत पुलिस से करते हुए एडवोकेट पूनम सिंह ने इस मामले की जांच
कर अविलम्ब इसे बंद कराने व दोषियों को दण्ड दिये जाने की मांग की है।
वहीं इस सम्बन्ध में जब एआरएम आरके वर्मा से जानकारी की गयी तो उनका कहना
था कि मेरे संज्ञान में यह चोरी नही है अगर शिकायत मिलेगी तो जांच करवाकर
दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी।
तनख्वाह मिलेगी। घर का खर्चा चलेगा। इसके बावजूद अपनी सरकार से ही चोरी
करने से लोग बाज नहीं आते। सरकार को लाखों का चूना चंद पलों में लगा
डालते हैं। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन विभाग की सरकारी बसों का डीजल
बेंचा जाता है और अधिकारियों को इस बात की भनक तक नहीं। बड़ा अजीब
इत्तिफाक है कि लम्बी दूरी की बसों में इस कारगुजारी को बड़ी आसानी से
अंजाम दिया जाता है। ज्ञात हो कि लम्बी दूरी की बसों में एक मुख्य चालक
के साथ उसका सहयोगी चालक भी रहता है। सहयोगी चालक सिर्फ चालन कार्य में
ही सहयोग नहीं करता बल्कि हर प्रकार के गोरखधंधे का सूत्रधार भी होता है।
खास कर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बसे गांवों में इनका पूरा सिस्टम
पहले से ही फिक्स रहता है। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त
जानकारी के अनुसार, यह गोरखधंधा परिवहन विभाग की बसों के चालकों द्वारा
हाइवे के आस-पास के गांवों में पहले से मुस्तैद उनके दलालों के माध्यम से
अंजाम दिया जाता है। परिवहन निगम सबकुछ जानते हुए भी चुप्पी मारे बैठा
है। सूत्रों के अनुसार, इन बसों के चालक अपनी सहायता के लिए एक सहायक को
चालक के रूप में रख लेते हैं। यह सहायक चालक लम्बी दूरी की बसों पर जहां
चालक के स्थान पर बसें चलाते हैं। वहीं पहले से निश्चित स्थानों पर डीजल
निकाल कर सड़क के किनारे बसे अपने गांवों में स्टोर कर उसकी बिक्री भी
करते हैं। वैसे तो निगम का चेकिंग स्टाफ बसों की जांच करने के लिए दिन-भर
भागा-दौड़ी करता है। लेकिन उसे यह कभी नहीं दिखता की बसों पर सहायक चालक
के रूप में उपस्थित यह व्यक्ति किस अधिकार से बिना टिकट चल रहा है। कोटवा
सड़क के पास स्थित ग्राम मेड़ुवा निवासी नागेन्द्र कुमार सिंह पुत्र
पृथ्वीराज सिंह इसी प्रकार कैसरबाग डिपो की बस पर नियुक्त चालक अरविन्द
सिंह द्वारा निजी तौर पर सहायक चालक के तौर पर रखे गये हैं। वह अनाधिकृत
रूप से बस चलाने के साथ ही डीजल चोरी कर थाना रामसनेहीघाट स्थित ग्राम
मेड़ुवा में उसे अपने घर पर स्टोर कर उसे बेंचने का धंधा करता है। जिसकी
लिखित शिकायत पुलिस से करते हुए एडवोकेट पूनम सिंह ने इस मामले की जांच
कर अविलम्ब इसे बंद कराने व दोषियों को दण्ड दिये जाने की मांग की है।
वहीं इस सम्बन्ध में जब एआरएम आरके वर्मा से जानकारी की गयी तो उनका कहना
था कि मेरे संज्ञान में यह चोरी नही है अगर शिकायत मिलेगी तो जांच करवाकर
दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी।

